Anganwadi Saree DBT Scheme के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार लागू किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के लिए साड़ी की केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब साड़ी खरीदी के लिए निर्धारित राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
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Anganwadi Saree DBT Scheme क्या है?
Anganwadi Saree DBT Scheme का उद्देश्य साड़ी वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और हितग्राही-केंद्रित बनाना है। पहले साड़ियों की खरीदी संचालनालय स्तर पर केंद्रीकृत तरीके से की जाती थी।
हालांकि हाल के वर्षों में इस प्रक्रिया को लेकर कई सुझाव और मुद्दे सामने आए थे। इन्हीं पहलुओं की समीक्षा के बाद विभाग ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) आधारित व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया।
इस नई व्यवस्था के तहत साड़ी खरीदी की राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
साड़ी खरीदी की पुरानी व्यवस्था हुई समाप्त
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लागू इस निर्णय के बाद केंद्रीकृत साड़ी खरीदी की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक प्रक्रियाएं कम होंगी और हितग्राहियों को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। साथ ही खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
Anganwadi Saree DBT Scheme से क्या होगा फायदा?
इस योजना के तहत कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी पसंद, सुविधा और स्थानीय उपलब्धता के अनुसार साड़ी खरीद सकेंगी।
इससे उन्हें गुणवत्ता और उपयोगिता के आधार पर बेहतर विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा। यह निर्णय महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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Anganwadi Saree DBT Scheme से बढ़ेगी पारदर्शिता
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की सोच है कि सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे।
इसी उद्देश्य से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। Anganwadi Saree DBT Scheme भी इसी सोच का विस्तार है।
सरकार का मानना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और शासन की राशि सीधे पात्र व्यक्तियों तक पहुंचेगी।
कार्यकर्ताओं को मिलेगी पसंद की साड़ी चुनने की आजादी
नई व्यवस्था के तहत साड़ी का मूल डिजाइन पूर्ववत रखा जाएगा। हालांकि अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से चर्चा के बाद तय किया जाएगा।
साड़ी का रंग और डिजाइन विभाग करेगा तय
विभाग द्वारा साड़ी का रंग और डिजाइन निर्धारित कर उसकी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
इससे पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहेगी। वहीं कॉटन, सिंथेटिक या अन्य कपड़े का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता और सहायिकाएं कर सकेंगी।
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डीबीटी मॉडल को क्यों माना जा रहा बड़ा सुधार?
विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित व्यवस्थाएं प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने में प्रभावी साबित होती हैं।
Anganwadi Saree DBT Scheme के माध्यम से लाभार्थियों को निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा और सरकारी राशि का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगा।
यह मॉडल राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और सुशासन की अवधारणा को भी मजबूत करता है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हित में अहम कदम
मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि विभाग वर्षों से चली आ रही व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा कर रहा है।
जहां भी सुधार की आवश्यकता महसूस होगी, वहां हितग्राहियों के हित में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सम्मान, सुविधा और अधिकारों की रक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रति यूनिफॉर्म 500 रुपये तक का प्रावधान
भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है।
इसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। नई व्यवस्था के तहत यह राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
Anganwadi Saree DBT Scheme छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को न केवल अपनी पसंद की साड़ी चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंचेगा। Anganwadi Saree DBT Scheme भविष्य में प्रशासनिक सुधारों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित व्यवस्था का एक सफल मॉडल साबित हो सकती है।
