Smart Meter Protest को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बढ़ते बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और बिजली दरों में लगातार हो रही वृद्धि को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी ने जुलाई के पहले सप्ताह से घर-घर अभियान चलाकर लोगों से स्मार्ट मीटर हटाने के समर्थन में आवेदन और समर्थन पत्र भरवाने का निर्णय लिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियों से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, जबकि बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
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Smart Meter Protest को लेकर कांग्रेस का बड़ा ऐलान
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि Smart Meter Protest केवल स्मार्ट मीटर तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली दरों में लगातार हो रही वृद्धि और बढ़ते बिजली बिलों के खिलाफ भी है।
पार्टी का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिजली बिलों को लेकर परेशान हैं। कई लोगों को बिल सुधार के लिए बिजली कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
कांग्रेस का दावा है कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो यह मुद्दा एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
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बिजली बिल और स्मार्ट मीटर पर सरकार घिरी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij ने कहा कि बिजली बिल आम जनता के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका है।
उनका आरोप है कि स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद कई उपभोक्ताओं ने अधिक बिल आने की शिकायत की है। कांग्रेस का कहना है कि लोगों की इन शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
पार्टी ने सरकार से मांग की है कि स्मार्ट मीटर और बिजली दरों से जुड़े मामलों की पारदर्शी समीक्षा की जाए।

Smart Meter Protest के तीन चरणों की रणनीति
पहला चरण: बिजली कार्यालयों का घेराव
कांग्रेस ने 17 जून को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों का घेराव किया। इस दौरान मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन भी किया गया।
दूसरा चरण: जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस
18 जून को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस नेताओं ने बिजली दर वृद्धि और स्मार्ट मीटर को लेकर अपना पक्ष जनता के सामने रखा।
तीसरा चरण: घर-घर जनसंपर्क अभियान
जुलाई के पहले सप्ताह से Smart Meter Protest का तीसरा और सबसे बड़ा चरण शुरू होगा। इस दौरान कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर लोगों से समर्थन पत्र भरवाएंगे और स्मार्ट मीटर हटाने की मांग को मजबूत करेंगे।
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दीपक बैज ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर और बिजली क्षेत्र से जुड़ी कुछ नीतियां बड़े कॉर्पोरेट समूहों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लागू की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार को पहले उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करना चाहिए और उसके बाद नई व्यवस्थाएं लागू करनी चाहिए।
मानसून सत्र में गूंजेगा Smart Meter Protest
कांग्रेस ने घोषणा की है कि आगामी मानसून सत्र में Smart Meter Protest और बिजली दर वृद्धि का मुद्दा विधानसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant और पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel सरकार से इस विषय पर जवाब मांगेंगे।
कांग्रेस का कहना है कि पेट्रोल, डीजल, खाद और बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं की बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम नागरिकों और किसानों पर पड़ रहा है।
भाजपा सरकार पर पांच बार बिजली दर बढ़ाने का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार बनने के बाद बिजली दरों में पांच बार वृद्धि की जा चुकी है। पार्टी का दावा है कि इसका सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग, गरीब परिवारों और किसानों पर पड़ा है।
साथ ही स्मार्ट मीटर को लेकर भी कई क्षेत्रों से अधिक बिल आने की शिकायतें सामने आई हैं। यही कारण है कि Smart Meter Protest अब प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।
Smart Meter Protest का राजनीतिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में बिजली बिल और स्मार्ट मीटर का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकता है। कांग्रेस इस मुद्दे को जनता से सीधे जोड़ने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार अपनी नीतियों का बचाव कर सकती है।
ऐसे में मानसून सत्र और जुलाई में शुरू होने वाला जनसंपर्क अभियान इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला सकता है।
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Smart Meter Protest को लेकर कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की है। बढ़ते बिजली बिल, बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर को लेकर जनता की शिकायतों को पार्टी प्रमुख मुद्दा बना रही है। जुलाई में शुरू होने वाला घर-घर अभियान और आगामी मानसून सत्र में होने वाली बहस यह तय करेगी कि Smart Meter Protest प्रदेश की राजनीति में कितना बड़ा असर डालता है। फिलहाल यह मुद्दा आम उपभोक्ताओं, किसानों और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
