Aakar 2026 ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, संगीत, नृत्य और आधुनिक रचनात्मकता को एक मंच पर लाकर नई मिसाल पेश की है। रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर में 25 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित 16 दिवसीय कला प्रशिक्षण शिविर का रंगारंग कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ।
इस आयोजन में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 अलग-अलग कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी प्रतिभा को नई दिशा दी।
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Aakar 2026 का भव्य समापन समारोह
समापन समारोह में रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और कला जगत से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में कला प्रेमी, प्रशिक्षु, अभिभावक और प्रशिक्षक उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का उत्साहवर्धन किया।
Aakar 2026 में 1281 प्रतिभागियों ने सीखी 16 कला विधाएं
इस वर्ष Aakar 2026 में पारंपरिक और आधुनिक कला का अनूठा मिश्रण देखने को मिला।
प्रतिभागियों ने टेराकोटा, जूट शिल्प, गोदना कला, रजवार भित्ति चित्र, मंडला एवं मांडना कला, कथक, भरथरी गायन, लोकसंगीत और लोकनृत्य जैसी विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कला की आधुनिक तकनीकों से भी प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।
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नई पीढ़ी को संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने पर जोर
मुख्य अतिथि बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2004 में संस्कृति मंत्री रहते हुए इस प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ऐसे आयोजनों का विस्तार सभी संभागों में होना चाहिए।
बच्चों को मिट्टी और प्रकृति से जोड़ने की जरूरत
उन्होंने कहा कि जब बच्चे मिट्टी और सृजन से जुड़ेंगे, तब उनके भीतर संवेदनशीलता और रचनात्मकता का विकास होगा। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और लोक परंपराओं की जानकारी देना आज की आवश्यकता है।
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Aakar 2026 में सभी वर्गों को मिला अवसर
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अनुसार यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम है।
अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंजीयन शुल्क 200 रुपये से घटाकर 100 रुपये किया गया। वहीं दिव्यांग और अनाथ बच्चों को विशेष रियायत भी दी गई।
अनुभवी कला गुरुओं ने दिया प्रशिक्षण
शिविर में प्रदेश के प्रतिष्ठित कला विशेषज्ञों ने AI आर्ट, क्ले आर्ट, पेंटिंग, बोनसाई, कथक, लोकनृत्य, टेराकोटा, लिप्पन आर्ट, वाद्य यंत्र, क्रोशिया कला सहित कई विधाओं का प्रशिक्षण दिया।
सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों का मन मोह लिया
समापन समारोह में आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा।
प्रशिक्षित प्रतिभागियों ने सुवा नृत्य, कर्मा नृत्य, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन और लोकसंगीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि और कलाकारों के उत्साह ने पूरे माहौल को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
Aakar 2026 बना सांस्कृतिक विरासत और भविष्य के बीच सेतु
Aakar 2026 ने यह साबित किया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी है।
लोककलाओं और आधुनिक तकनीकों के समन्वय ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम तैयार किया है।
Aakar 2026 छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बनकर सामने आया है। 1281 प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी, अनुभवी कला गुरुओं का मार्गदर्शन और पारंपरिक से लेकर आधुनिक कला का समावेश इस आयोजन को विशेष बनाता है। यह शिविर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और रचनात्मकता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का सफल प्रयास साबित हुआ है।
