Khet Bachao Abhiyan के माध्यम से दंतेवाड़ा जिले में कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने और लोगों को पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्राकृतिक खेती और मिलेट्स उत्पादन को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल खेती की पद्धति बदलना नहीं, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसानों की आजीविका को सुरक्षित करना भी है। कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई यह रणनीतिक योजना आने वाले वर्षों में जिले की कृषि व्यवस्था को नई पहचान दे सकती है।
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Khet Bachao Abhiyan का मुख्य उद्देश्य
दंतेवाड़ा जिले में शुरू किया जा रहा Khet Bachao Abhiyan कृषि भूमि की उर्वरता को संरक्षित करने और किसानों की खेती की लागत कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अभियान के तहत मिट्टी के स्वास्थ्य का पुनर्जीवन, जल संरक्षण, पारंपरिक बीजों का संरक्षण और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ मिट्टी ही भविष्य की खाद्य सुरक्षा और किसान समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी है।
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प्राकृतिक खेती और मिलेट्स पर रहेगा विशेष फोकस
मिलेट्स को मिला है ‘श्री अन्न’ का दर्जा
दंतेवाड़ा की भौगोलिक परिस्थितियों और आदिवासी परंपराओं को ध्यान में रखते हुए ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसी फसलों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।
इन फसलों को ‘सुपरफूड’ और ‘श्री अन्न’ का दर्जा प्राप्त है। ये कम पानी में तैयार हो जाती हैं और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त मानी जाती हैं।
प्राकृतिक खेती से घटेगी लागत
प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों की आवश्यकता बेहद कम होती है। इससे किसानों की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और मुनाफा बढ़ता है।
इसके साथ ही उपभोक्ताओं को रसायन-मुक्त और पौष्टिक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध होती है।
Khet Bachao Abhiyan पांच चरणों में होगा लागू
पहला चरण: मृदा स्वास्थ्य मैपिंग
योजना के तहत सबसे पहले जिले में सॉयल हेल्थ कार्ड और मृदा स्वास्थ्य मैपिंग को मजबूत किया जाएगा।
इससे किसानों को अपनी भूमि की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलेगी और वे बेहतर फसल प्रबंधन कर सकेंगे।
दूसरा चरण: मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा
रागी, कोदो और कुटकी जैसी पौष्टिक फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
तीसरा चरण: जैविक खाद निर्माण प्रशिक्षण
किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद और ब्लू-ग्रीन एल्गी उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम हो सके।
चौथा चरण: सामुदायिक बीज बैंक
अभियान के तहत पारंपरिक बीज मंडियों और 40 सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना की जाएगी।
इससे स्थानीय बीजों का संरक्षण और संवर्धन संभव हो सकेगा।
पांचवां चरण: एक लाख पौधों का रोपण
खेतों की मेड़ों पर ग्लिरिसिडिया जैसे हरित खाद देने वाले पौधों का रोपण किया जाएगा।
अभियान के अंतर्गत एक लाख पौधों के वितरण और रोपण का लक्ष्य रखा गया है।
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Khet Bachao Abhiyan के तहत तय किए गए लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले की 135 ग्राम पंचायतों में अभियान लागू किया जाएगा।
इसके तहत:
- 4,600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती
- 4,300 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स उत्पादन
- 40 सामुदायिक बीज बैंक की स्थापना
जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से भी मिलेट्स को लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।
किसानों को होंगे कई बड़े लाभ
लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी
अभियान के सफल क्रियान्वयन से किसानों की उत्पादन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई गई है।
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता घटने से खेती अधिक लाभदायक बनेगी।
राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगा दंतेवाड़ा का मिलेट्स
Khet Bachao Abhiyan के माध्यम से जिले में उत्पादित मिलेट्स को राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना भी बनाई गई है।
इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी
मिलेट्स में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये हृदय स्वास्थ्य, हड्डियों की मजबूती, एनीमिया की रोकथाम और मधुमेह नियंत्रण में सहायक माने जाते हैं।
दंतेवाड़ा बनेगा टिकाऊ कृषि मॉडल
कृषि विभाग रागी के साथ-साथ कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन फसलों को भी बढ़ावा दे रहा है।
बहुफसली प्रणाली अपनाने से किसानों की आय के स्रोत बढ़ेंगे और कृषि अधिक टिकाऊ बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Khet Bachao Abhiyan निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सफल होता है, तो दंतेवाड़ा पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्राकृतिक खेती का मॉडल जिला बन सकता है।
Khet Bachao Abhiyan दंतेवाड़ा जिले में कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। प्राकृतिक खेती, मिलेट्स उत्पादन, जल संरक्षण और बीज संरक्षण जैसे प्रयास किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को भी मजबूत करेंगे। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो Khet Bachao Abhiyan दंतेवाड़ा को प्राकृतिक कृषि और किसान समृद्धि की नई पहचान दिला सकता है।
