Skip to main content

4thnation

UTU Paper Leak: असिस्टेंट प्रोफेसर गिरफ्तार, B.Tech की दो परीक्षाएं रद्द, व्हाट्सएप ग्रुप से खुला राज

UTU Paper Leak मामले ने उत्तराखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देहरादून स्थित वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) में कथित प्रश्नपत्र लीक होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने B.Tech सेमेस्टर की दो परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। मामले में देहरादून पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर एक असिस्टेंट प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है।

👉 4thNation WhatsApp चैनल से जुड़ें: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


UTU Paper Leak: क्या है पूरा मामला?

देहरादून के वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) में B.Tech के Machine Learning for Internet of Things विषय का प्रश्नपत्र कथित रूप से परीक्षा से पहले लीक होने का मामला सामने आया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने B.Tech सेमेस्टर की दो परीक्षाएं रद्द कर दीं। साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह भी पढ़ें: NEET Paper Leak Protest: जंतर-मंतर पर पहुंचे पुलिस कांस्टेबल के दावे पर पुलिस का पलटवार


B.Tech की दो परीक्षाएं क्यों रद्द हुईं?

विश्वविद्यालय के अनुसार, जांच के दौरान यह पाया गया कि परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न पहले से एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए सवालों से मेल खाते थे।

इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए 7 और 8 जुलाई को निर्धारित B.Tech सेमेस्टर की संबंधित परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया गया।

अब विश्वविद्यालय नई परीक्षा तिथि की घोषणा अलग से करेगा।


UTU Paper Leak में असिस्टेंट प्रोफेसर गिरफ्तार

देहरादून पुलिस ने इस मामले में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, आशीष गुप्ता उस टीम का हिस्सा थे जिसे Machine Learning for Internet of Things विषय का प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

जांच में आरोप है कि उन्होंने परीक्षा की गोपनीयता का उल्लंघन करते हुए कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी साझा की।


व्हाट्सएप ग्रुप से कैसे खुला राज?

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेन्द्र डोभाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि परीक्षा में पूछे गए कई सवाल पहले से कॉलेज से जुड़े एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए थे।

इसी आधार पर विश्वविद्यालय की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और कथित लीक प्रश्नपत्र भी अपने कब्जे में ले लिए हैं।


एफआईआर में कौन-कौन सी धाराएं लगीं?

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक विनय कुमार पटेल की शिकायत पर प्रेमनगर थाने में एफआईआर संख्या 144/26 दर्ज की गई।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है—

  • धारा 316 – आपराधिक न्यास भंग (Criminal Breach of Trust)
  • धारा 318(4) – धोखाधड़ी (Cheating)
  • धारा 61(2) – आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)

पुलिस ने कहा है कि यदि जांच में यह पता चलता है कि किसी अन्य व्यक्ति ने भी लीक प्रश्नपत्र का अनुचित लाभ उठाया है, तो उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार की मंशा परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने की है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर त्वरित और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

आरोपी प्रोफेसर को अदालत में पेश किया जाएगा और मामले की विस्तृत जांच जारी है।


NEET पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ी चिंता

UTU Paper Leak ऐसे समय सामने आया है जब देश पहले से ही विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चर्चा कर रहा है।

हाल के महीनों में NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस हुई थी। ऐसे में UTU का यह मामला भी परीक्षा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर नई चिंता पैदा करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने और वितरण की प्रक्रिया को और अधिक तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है।


UTU Paper Leak ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्वविद्यालय द्वारा दो परीक्षाएं रद्द करना और पुलिस द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र लीक में और कौन-कौन शामिल था तथा कितने लोगों को इसका अनुचित लाभ मिला। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना समय की मांग है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *