Popcorn Maize Farming छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक सफल विकल्प बनकर उभरी है। राजनांदगांव जिले में फसल विविधीकरण और फसल चक्र परिवर्तन के तहत किसानों ने पारंपरिक धान की खेती छोड़कर पॉपकॉर्न मक्का की खेती अपनाई, जिससे उन्हें बेहतर बाजार और अधिक आय प्राप्त हुई।
राज्य सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। किसानों को न केवल उत्पादन का उचित मूल्य मिल रहा है बल्कि अनुबंध खेती के माध्यम से बाजार की चिंता भी समाप्त हो रही है।
605 किसानों ने अपनाई Popcorn Maize Farming
राजनांदगांव जिले में रबी वर्ष 2025-26 के दौरान गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी ने 605 किसानों के साथ अनुबंध खेती की।
इस पहल के तहत कुल 1763 एकड़ भूमि में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कराई गई। किसानों को बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हुई।
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अनुबंध खेती से मिला सुरक्षित बाजार
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अनुबंध खेती किसानों के लिए जोखिम कम करने का प्रभावी माध्यम है।
Popcorn Maize Farming के तहत किसानों को पहले से तय कीमत पर फसल बेचने का अवसर मिला, जिससे बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम हुआ।
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Popcorn Maize Farming से 5 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री
गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी ने किसानों से 1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मक्का खरीदा।
कंपनी द्वारा 5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का पॉपकॉर्न मक्का खरीदा गया है। इसमें से अब तक 3.73 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है, जबकि शेष भुगतान की प्रक्रिया जारी है।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि Popcorn Maize Farming किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रति एकड़ मिला बेहतर उत्पादन
कृषि विभाग के अनुसार किसानों को औसतन 19.33 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ।
यह उत्पादन स्तर पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हुआ है।
Popcorn Maize Farming में किसानों ने बनाए नए रिकॉर्ड
जिले के कई किसानों ने उत्पादन और आय दोनों के मामले में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
ललित कुमार साहू बने सबसे बड़े उत्पादक
छुरिया विकासखंड के ग्राम भरीटोला निवासी किसान श्री ललित कुमार साहू ने 23.56 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती की।
इस खेती से उन्हें 6 लाख 95 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। जिले में सर्वाधिक क्षेत्र में मक्का उत्पादन करने का गौरव भी उन्हें मिला।
वेद प्रकाश चंद्राकर ने हासिल किया उत्कृष्ट उत्पादन
राजनांदगांव विकासखंड के किसान श्री वेद प्रकाश चंद्राकर ने 9.5 एकड़ क्षेत्र में Popcorn Maize Farming कर 32.66 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया।
इससे उन्हें 5 लाख 27 हजार रुपये से अधिक की आय हुई।
देवराम पटेल ने किया शानदार प्रदर्शन
ग्राम जमलेश्वर के किसान श्री देवराम पटेल ने 35.5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त कर लगभग 4 लाख 67 हजार रुपये की आय अर्जित की।
उनकी सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
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Popcorn Maize Farming से फसल विविधीकरण को मिला बढ़ावा
राज्य सरकार लगातार किसानों को धान के अलावा अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रेरित कर रही है।
Popcorn Maize Farming इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फसल विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में स्थिरता भी आती है।
जल संरक्षण में भी मिल रहा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का की खेती धान की तुलना में कम पानी की मांग करती है।
इससे भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम होता है।
मिट्टी की उर्वरता में सुधार
फसल चक्र परिवर्तन से मिट्टी के पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है।
मक्का जैसी वैकल्पिक फसलें भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद करती हैं, जिससे भविष्य की फसलों का उत्पादन बेहतर होता है।
किसानों के लिए नई उम्मीद बना फसल चक्र परिवर्तन
राजनांदगांव जिले के किसानों की सफलता अब पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
कृषि विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान धान के स्थान पर वैकल्पिक और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाते हैं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
Popcorn Maize Farming ने राजनांदगांव जिले के किसानों के लिए आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का नया रास्ता खोला है। 605 किसानों द्वारा 1763 एकड़ में की गई खेती और 5 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री इस मॉडल की सफलता को साबित करती है। Popcorn Maize Farming न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रही है। आने वाले वर्षों में यह खेती छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
