Mahanadi Water Dispute को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब समाधान की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। रविवार को पुरी में दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल की अगुवाई में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 30 मई को होने वाली Mahanadi Water Dispute Tribunal (MWDT) की अगली सुनवाई से पहले दोनों राज्य संयुक्त रिपोर्ट पेश कर सकते हैं।
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महानदी जल विवाद पर पुरी में अहम बैठक
पुरी में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा, अतिरिक्त महाधिवक्ता बिश्वजीत दुबे और स्थायी अधिवक्ता विनायक शर्मा शामिल हुए।
वहीं ओडिशा की ओर से एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य, जल संसाधन विभाग की प्रमुख सचिव शुभा शर्मा और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।
बैठक के बाद ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने कहा कि कई मुख्य मुद्दों पर “सकारात्मक और उल्लेखनीय प्रगति” हुई है। हालांकि बैठक की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
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MWDT की सुनवाई से पहले बढ़ी उम्मीद
30 मई को Mahanadi Water Dispute Tribunal में इस मामले की अगली सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि दोनों राज्य कुछ सहमति वाले मुद्दों पर संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकते हैं।
ओडिशा सरकार का कहना है कि तकनीकी समिति स्तर पर बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है। अब अगला चरण मंत्रीस्तरीय समितियों के बीच होगा।
ओडिशा ने उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव की अध्यक्षता में मंत्रीस्तरीय समिति बना दी है, जबकि छत्तीसगढ़ को अभी अपनी समिति गठित करनी है।
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Mahanadi Water Dispute में क्या हैं मुख्य मुद्दे
छत्तीसगढ़ के बैराज और जल परियोजनाएं बनीं विवाद की वजह
Mahanadi Water Dispute का मुख्य कारण छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बनाए गए बैराज और अन्य जल परियोजनाएं हैं।
ओडिशा का आरोप है कि इन परियोजनाओं की वजह से गैर-मानसूनी महीनों में महानदी का जल प्रवाह कम हो गया है। इससे निचले क्षेत्रों में खेती और पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ओडिशा लगातार यह मांग करता रहा है कि छत्तीसगढ़ पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़े ताकि किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ की रणनीति
राजनीतिक स्तर पर भी इस विवाद को सुलझाने की कोशिश तेज हो गई है। ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि बीजेपी सरकार आने के बाद समाधान की संभावनाएं बढ़ी हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के दौरान ओडिशा के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्य अब अदालत के बाहर सहमति आधारित समाधान खोजने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मंत्रीस्तरीय समिति पर क्या बोला ओडिशा
MWDT ने हाल ही में दोनों राज्यों को मंत्रीस्तरीय समिति बनाने का निर्देश दिया था। इसका उद्देश्य विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशना है।
ओडिशा सरकार ने तुरंत समिति बना दी, लेकिन छत्तीसगढ़ की ओर से अभी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि जैसे ही छत्तीसगढ़ अपनी समिति बनाएगा, दोनों राज्यों के मंत्रियों के बीच सीधी वार्ता शुरू होगी।
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किसानों और जल प्रवाह का बड़ा सवाल
महानदी ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। लाखों किसान इस नदी के पानी पर निर्भर हैं।
ओडिशा का कहना है कि गैर-मानसूनी मौसम में पानी की कमी से सिंचाई पर गंभीर असर पड़ रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ का तर्क है कि विकास परियोजनाएं राज्य की जरूरतों के लिए जरूरी हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि दोनों राज्य डेटा साझा कर पारदर्शिता बढ़ाएं, तो Mahanadi Water Dispute का समाधान जल्दी निकल सकता है।
महानदी बचाओ आंदोलन की प्रतिक्रिया
इस बीच “महानदी बचाओ आंदोलन” ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। संगठन ने कहा है कि वह मंत्रीस्तरीय समिति के सदस्यों से मुलाकात करेगा और ट्रिब्यूनल में जमा किए गए जल उपलब्धता के आंकड़ों पर चर्चा करेगा।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जनता और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला होना चाहिए।
Mahanadi Water Dispute को लेकर पुरी में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने समाधान की उम्मीद को मजबूत किया है। 30 मई की ट्रिब्यूनल सुनवाई से पहले दोनों राज्यों के बीच सहमति बनने की संभावना बढ़ती दिख रही है।
यदि तकनीकी और मंत्रीस्तरीय स्तर पर बातचीत सफल रहती है, तो यह न केवल ओडिशा और छत्तीसगढ़ बल्कि लाखों किसानों और आम लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
