Navdrishti Foundation की प्रेरणा से दुर्ग जिले में एक परिवार ने मानवता और समाज सेवा का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। विजय नगर निवासी स्वर्गीय हंसा सोलंकी के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान कर दो लोगों के जीवन में रोशनी लाने का निर्णय लिया।
यह नेक कार्य समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। परिवार के इस फैसले की सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने सराहना की है।
हंसा सोलंकी परिवार ने किया नेत्रदान
नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्य यतीन्द्र चावड़ा की बुआ श्रीमती हंसा सोलंकी के निधन के बाद उनके पुत्र हितेश सोलंकी, उमेश सोलंकी, बहू लीना सोलंकी और पौत्री वरुणी की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई।
परिवार ने दुख की इस घड़ी में भी समाज सेवा का रास्ता चुना। इस निर्णय से दो जरूरतमंद लोगों को नई दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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Navdrishti Foundation टीम ने संभाली पूरी व्यवस्था
नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान Navdrishti Foundation की टीम विजय नगर स्थित निवास पर मौजूद रही।
टीम के सदस्य कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, यतीन्द्र चावड़ा, रितेश जैन, राजेश पारख, सपन जैन और प्रभुदयाल उजाला ने पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्था के सदस्यों ने परिवार को भावनात्मक सहयोग भी प्रदान किया।
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डॉक्टरों ने किया कॉर्निया संग्रहण
शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की डॉ. अंजलि कश्यप, डॉ. याशिका चन्द्रा और नेत्र सहायक विवेक कसार ने कॉर्निया संग्रहण की प्रक्रिया पूरी की।
विशेषज्ञ टीम ने निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत सफलतापूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न की। इससे दो दृष्टिबाधित लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है।
Navdrishti Foundation लगातार चला रही जागरूकता अभियान
Navdrishti Foundation के सदस्य यतीन्द्र चावड़ा ने बताया कि संस्था लगातार नेत्रदान, देहदान और त्वचा दान को लेकर लोगों को जागरूक कर रही है।
उन्होंने कहा,
“आज अपने परिवार में नेत्रदान का निर्णय लेकर हमने समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं।”
परिवार ने भावुक होकर कही यह बात
स्वर्गीय हंसा सोलंकी के पुत्र हितेश सोलंकी ने बताया कि उनकी मां लंबे समय से बीमार थीं। पूरे परिवार ने उनकी सेवा की, लेकिन निधन के बाद परिवार को गहरा दुख पहुंचा।
उन्होंने कहा,
“मां के संस्कार हमेशा समाज सेवा के लिए प्रेरित करते थे। इसी सोच के साथ हमने नेत्रदान का फैसला लिया।”
परिवार का कहना है कि यह निर्णय उनकी मां को सच्ची श्रद्धांजलि देने जैसा है।
समाज के लिए प्रेरणादायक बना यह कदम
Navdrishti Foundation के सदस्य प्रभुदयाल उजाला ने कहा कि सोलंकी परिवार हमेशा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में आगे रहा है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान का यह फैसला समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। इससे अन्य लोग भी अंगदान और नेत्रदान के लिए प्रेरित होंगे।
श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे सदस्य
नवदृष्टि फाउंडेशन के कई सदस्यों ने स्वर्गीय हंसा सोलंकी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्ज्वल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रभुदयाल उजाला, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन और राकेश जैन उपस्थित रहे।
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Navdrishti Foundation बना समाज सेवा की मिसाल
आज Navdrishti Foundation केवल एक संस्था नहीं, बल्कि समाज सेवा और मानवता की भावना का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है।
नेत्रदान जैसे फैसले न केवल जरूरतमंदों को नई रोशनी देते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देते हैं।
Navdrishti Foundation की प्रेरणा से सोलंकी परिवार द्वारा किया गया नेत्रदान समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। दुख की घड़ी में भी मानवता को प्राथमिकता देकर परिवार ने यह साबित किया कि किसी की जिंदगी में रोशनी लाना सबसे बड़ा पुण्य है।
ऐसे प्रयास समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
