Women’s Reservation को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को करीब 10 घंटे तक लंबी और तीखी बहस देखने को मिली। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच कई बार जोरदार नोंक-झोंक हुई। बहस के दौरान माहौल इतना गरमा गया कि विपक्ष ने सदन का बहिष्कार कर दिया।
विपक्ष की गैरमौजूदगी में सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़ा शासकीय संकल्प पारित कर दिया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
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Women’s Reservation पर 33 फीसदी आरक्षण की मांग
सदन में परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
सरकार की ओर से कहा गया कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए यह कदम जरूरी है। वहीं विपक्ष ने जनगणना और परिसीमन के बाद ही इसे लागू करने की मांग दोहराई।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष का कहना था कि पहले सदन के बाहर निंदा प्रस्ताव की बात कही गई थी, लेकिन अब शासकीय संकल्प लाकर चर्चा की जा रही है।
कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लेकर आई है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा परिसीमन और जनगणना के मुद्दे को लेकर इसका विरोध करना समझ से परे है।
परिसीमन को बताया जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिसीमन होने से क्षेत्र बढ़ते हैं और ज्यादा लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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Women’s Reservation पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बयान
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी Rajwade ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को महिलाओं को आरक्षण देना कभी रास नहीं आया और इसी वजह से हर बार इस बिल का विरोध किया गया।
महिलाओं के अधिकारों की बात
मंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाना चाहती है ताकि वे निर्णय प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकें।
उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण लागू होने से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भाजपा पर पुरुषवादी सोच रखने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि यदि 850 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होता तो करीब 280 सीटें महिलाओं को मिलतीं, जबकि पुरुषों के पास 570 सीटें रहतीं।
कांग्रेस विधायक का बड़ा बयान
कांग्रेस विधायक अनिल भेड़िया ने कहा कि महिला आरक्षण बिल केवल चुनावी झुनझुना बनकर रह गया है।
उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं जानती हैं कि 2023 में बिल पास होने के बावजूद उसे अब तक लागू नहीं किया गया।
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सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे तंज
बहस के दौरान डिप्टी सीएम साव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को 500 रुपये देने का वादा किया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि आज कांग्रेस किस आधार पर महिलाओं के अधिकारों की बात कर रही है।
सदन में कई बार हुआ हंगामा
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन का माहौल गर्म रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों में महिला आरक्षण बड़ा मुद्दा बन सकता है।
निष्कर्ष
Women’s Reservation को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में हुई लंबी बहस ने साफ कर दिया है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक केंद्र बिंदु बना रहेगा। सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष सरकार की मंशा और लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल सदन में शासकीय संकल्प पारित हो चुका है, लेकिन महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस अभी जारी रहने की संभावना है।
