भारतीय जनता पार्टी में भिलाई जिले के अंदर चल रही गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और भाजयुमो अध्यक्ष सौरभ जायसवाल द्वारा जारी 13 मंडलों की सूची पर पार्टी आलाकमान ने रोक लगा दी है।
इस फैसले के साथ ही विरोध में जारी दूसरी सूची को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद उजागर हो गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी मंडल सूची पर रोक क्यों लगी
भारतीय जनता पार्टी में जारी मंडल अध्यक्षों की सूची को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब 10 मंडल अध्यक्षों ने अपनी अलग सूची जारी कर दी।
इससे यह साफ हो गया कि पार्टी के भीतर एकमत की कमी है।
सूची जारी होने के बाद ही विरोध शुरू हो गया था और मामला लगातार बढ़ता गया, जिसके चलते संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
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भिलाई में भारतीय जनता पार्टी के 3 गुट सक्रिय
भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी खींचतान
भिलाई में भारतीय जनता पार्टी के भीतर तीन अलग-अलग गुट सक्रिय बताए जा रहे हैं।
इन गुटों के बीच लंबे समय से तालमेल की कमी देखी जा रही थी, जो अब खुलकर सामने आ गई है।
स्थिति यह रही कि भाजयुमो मंडल अध्यक्षों की सूची में दो गुट एक साथ आ गए, जबकि तीसरे गुट की सूची को रोकना पड़ा।
कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर क्या कहा
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस नेता Rakesh Thakur ने कहा कि भाजपा में गुटबाजी चरम पर है और कार्यकर्ता अपने ही नेताओं का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आमतौर पर लोग प्रशासनिक दफ्तरों का घेराव करते हैं, लेकिन यहां अपनी ही पार्टी कार्यालय का घेराव देखने को मिला।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सूची में कुछ ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी गई है, जिन पर गंभीर आरोप हैं।
भारतीय जनता पार्टी का जवाब और सफाई
कांग्रेस के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी पलटवार किया।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष Jagannath Panigrahi ने कहा कि पार्टी में अनुशासन है और सभी कार्यकर्ता मिलकर काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने संगठन की स्थिति देखनी चाहिए, क्योंकि उन्हीं कमियों के कारण वह देशभर में कमजोर हो रही है।
प्रदेश नेतृत्व की दखल से मामला शांत
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Kiran Singh Deo ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भिलाई के नेताओं को रायपुर बुलाया।
बैठक के बाद दोनों सूचियों को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
भाजयुमो जिला अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने भी माना कि समन्वय की कमी के कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ।
अब नई सूची सभी पदाधिकारियों की सहमति से जारी की जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक चुनौती
भारतीय जनता पार्टी के लिए यह घटनाक्रम एक संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व इसे सुधारने की दिशा में कदम उठा रहा है, लेकिन इस तरह के विवाद कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाल सकते हैं।
निष्कर्ष
भारतीय जनता पार्टी में भिलाई का यह विवाद दिखाता है कि बड़े संगठन में भी समन्वय की कमी किस तरह से सामने आ सकती है।
फिलहाल प्रदेश नेतृत्व के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया है, लेकिन आने वाले समय में यह देखना होगा कि भारतीय जनता पार्टी इस स्थिति को कैसे संभालती है और संगठन को मजबूत बनाए रखती है।
