Vedanta Power: सक्ती विस्फोट में 25 मौतें — ₹35 लाख मुआवजा जारी, अनिल अग्रवाल पर FIR, NTPC-GE पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश

सक्ती, छत्तीसगढ़ | 27 अप्रैल 2026

Vedanta Power ने सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि उसने 14 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई पावर प्लांट में हुए भयावह विस्फोट में मारे गए और घायल हुए सभी 35 प्रभावित व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को मुआवजा वितरित कर दिया है।

इस हादसे में 25 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। Vedanta Power के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है।

यह मामला अब राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।


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Vedanta Power ने जारी किया मुआवजा — कितना मिला किसे?

₹35 लाख मृतकों के परिजनों को, ₹15 लाख घायलों को

Vedanta Power ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कंपनी ने हादसे में मारे गए 25 श्रमिकों के परिवारों को प्रत्येक को ₹35 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इसके साथ ही घायल हुए कर्मचारियों को ₹15 लाख प्रत्येक की राशि दी गई है। कंपनी का दावा है कि सभी 35 प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों को यह मुआवजा पहले ही जारी किया जा चुका है।

क्या यह मुआवजा पर्याप्त है?

हालाँकि Vedanta Power ने मुआवजे की घोषणा की है, लेकिन श्रमिक संगठनों और विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं कि क्या ₹35 लाख किसी की जान की भरपाई कर सकता है?

एक ओर लापरवाही से मौत का आरोप और FIR, दूसरी ओर मुआवजे की राशि — इन दोनों के बीच कंपनी की जवाबदेही का सवाल अभी भी खुला है।


सिंघीतराई प्लांट में कैसे हुआ हादसा?

14 अप्रैल को Unit-1 में हुआ भीषण विस्फोट

Vedanta Power के बयान के अनुसार, यह हादसा 14 अप्रैल 2026 को सिंघीतराई स्थित प्लांट के Unit-1 में हुआ।

बयान में कहा गया कि दबावयुक्त गर्म पानी और भाप के अचानक रिसाव से साइट पर मौजूद 35 मजदूर प्रभावित हुए। यह हादसा इतना भीषण था कि 25 मजदूरों की मौके पर या बाद में अस्पताल में मौत हो गई।

NTPC-GE का था परिचालन — Vedanta का बड़ा दावा

Vedanta Power ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि इस Unit का परिचालन और रखरखाव NTPC GE Power Services Ltd. (NGSL) — जो NTPC और GE का संयुक्त उपक्रम है — द्वारा किया जा रहा था।

यानी कंपनी शुरू से ही यह साबित करने की कोशिश में है कि प्लांट का प्रत्यक्ष संचालन उसके हाथों में नहीं था।


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Vedanta Power के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का बड़ा बयान

X पर लिखा — “हमने पूरी जिम्मेदारी NGSL को सौंपी थी”

Vedanta Power के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए खुद को और कंपनी को इस हादसे की सीधी जिम्मेदारी से अलग करने की कोशिश की।

उन्होंने लिखा — “हमने अपने Athena प्लांट में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा। हमने इस प्लांट की पूरी जिम्मेदारी NGSL — NTPC और GE की पार्टनरशिप — को सौंप दी थी। ठेकेदार और कर्मचारी भी उन्हीं के थे। विशेषज्ञता भी उन्हीं की थी।”

“Athena” प्लांट का क्या है कनेक्शन?

अनिल अग्रवाल ने अपने बयान में “Athena” का जिक्र किया। दरअसल Vedanta Power ने यह प्लांट “Athena” कंपनी से खरीदा था। खरीद के बाद प्लांट की देखरेख NGSL को सौंपी गई थी।

यह बयान यह भी दर्शाता है कि Vedanta Power इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी तो स्वीकार कर रही है, लेकिन कानूनी जवाबदेही से बचने की रणनीति अपना रही है।


NTPC-GE पर जिम्मेदारी — Vedanta का बचाव या सच?

अनिल अग्रवाल ने अपने बयान में एक दिलचस्प उपमा दी। उन्होंने कहा — “यह वैसा ही है जैसे वाहन मालिक अपना वाहन किसी भरोसेमंद ड्राइवर को सौंपे और उम्मीद करे कि ड्राइवर नियमों का पालन करेगा।”

लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्लांट का मालिकाना हक Vedanta Power के पास था, इसलिए अंतिम जिम्मेदारी से वे खुद को अलग नहीं कर सकते।

NTPC की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। NTPC का जवाब इस पूरे विवाद में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।


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Vedanta Power केस: FIR और पुलिस जाँच की स्थिति

छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस हादसे में Vedanta Power के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जाँच जारी है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या प्लांट में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था और हादसे के लिए सीधे तौर पर कौन जिम्मेदार है।

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि अनिल अग्रवाल एक बड़े औद्योगिक घराने के अध्यक्ष हैं और उनके खिलाफ FIR दर्ज होना औद्योगिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम है।


अनिल अग्रवाल का दर्द — बेटे की मौत के बाद 25 और मौतें

अपने X पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने व्यक्तिगत दुख भी साझा किया। उन्होंने लिखा —

“मैंने सुना है कि वक्त अक्सर हमें परखता है, और मैं पिछले कुछ महीनों से यही महसूस कर रहा हूँ। साल की शुरुआत में मैंने अपना जवान बेटा खोया। फिर इस महीने, 14 अप्रैल को, सिंघीतराई प्लांट के दुखद हादसे ने मुझसे 25 अनमोल साथी छीन लिए।”

यह बयान Vedanta Power के चेयरमैन के मानवीय पक्ष को सामने लाता है। लेकिन पीड़ित परिवारों और श्रमिक संगठनों के लिए यह दर्द तब तक अधूरा है जब तक न्याय नहीं मिलता।


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निष्कर्ष

Vedanta Power का मुआवजा वितरण एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इससे जवाबदेही के सवाल खत्म नहीं होते। 25 मजदूरों की जानें गई हैं, FIR दर्ज है, और NTPC-GE की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हैं।

Vedanta Power के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का यह कहना कि उन्होंने सारी जिम्मेदारी NGSL को सौंपी थी — कानूनी दृष्टि से कितना सही है, यह अदालत तय करेगी।

छत्तीसगढ़ सरकार, पुलिस और न्यायपालिका से यह अपेक्षा है कि Vedanta Power हादसे के पीड़ितों को सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि न्याय भी मिले। सिंघीतराई के वे 25 मजदूर जिन्होंने अपनी जान गँवाई, उनके परिवार सिर्फ पैसे नहीं, इंसाफ माँग रहे हैं।

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