Durg News: भव्य शोभायात्रा, चित्रगुप्त जयंती में उमड़ा जनसैलाब

Durg शहर में चित्रगुप्त जयंती के अवसर पर भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिला। Durg में कायस्थ समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे शहर को उत्सव के माहौल में बदल दिया।

इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर समाज की एकता और आस्था का परिचय दिया।

Durg में कायस्थ सभा द्वारा भगवान चित्रगुप्त जयंती पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा कसारीडीह स्थित कायस्थ सभा भवन से शुरू हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर में पूजा-अर्चना और अभिषेक से हुई, जिसमें मुख्य यजमान के रूप में समाज के प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

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Durg की शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब

Durg में निकली इस शोभायात्रा में लगभग 200 से अधिक कायस्थ परिवारों ने भाग लिया। रथ पर सजे भगवान चित्रगुप्त के स्वरूप ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जहां जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया। Durg में इस दौरान श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला।

Durg Chitragupt Jayanti Shobhayatra with decorated chariot

Durg में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

इस आयोजन के दौरान दुर्ग में महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य जैसे गरबा, भांगड़ा और लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इससे कार्यक्रम और भी आकर्षक बन गया।

वरिष्ठ नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी खुशी जाहिर की। दुर्ग में इस आयोजन ने सभी आयु वर्ग के लोगों को एक मंच पर ला दिया।

दुर्ग में समाज की एकजुटता का संदेश

दुर्ग में आयोजित इस कार्यक्रम ने समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का संदेश दिया। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह आयोजन दुर्ग में सामाजिक समरसता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया।

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दुर्ग आयोजन की विशेष झलकियां

  • भव्य शोभायात्रा में सजे रथ और धार्मिक झांकियां
  • 200 से अधिक परिवारों की भागीदारी
  • पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय सहभागिता
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इन सभी पहलुओं ने दुर्ग में इस आयोजन को यादगार बना दिया।

अंत में कहा जा सकता है कि दुर्ग में आयोजित चित्रगुप्त जयंती समारोह ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। ऐसे आयोजन न केवल समाज को जोड़ते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से भी जोड़ते हैं। दुर्ग में यह आयोजन एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

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