arun vora एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह राजनीति नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मुलाकात है। दुर्ग में स्थित वोरा निवास में फिल्म “भक्त माँ कर्मा” की टीम ने पहुंचकर एक खास संवाद स्थापित किया।
यह मुलाकात सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दुर्ग में Arun Vora निवास पर फिल्म टीम की मुलाकात
दुर्ग में स्थित वोरा निवास में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक Arun Vora की धर्मपत्नी श्रीमती मंजू अरुण वोरा से फिल्म टीम ने सौजन्य भेंट की।
इस दौरान टीम ने फिल्म “भक्त माँ कर्मा” के निर्माण, विषय और उद्देश्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। मुलाकात का माहौल बेहद सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक रहा।
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फिल्म ‘भक्त माँ कर्मा’ का उद्देश्य
फिल्म “भक्त माँ कर्मा” का मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। फिल्म के माध्यम से माँ कर्मा के जीवन, उनके समाजसेवा कार्यों और सांस्कृतिक योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
फिल्म टीम ने बताया कि यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री को मिलेगा बढ़ावा
इस मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री के विकास पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल में फिल्म निर्माता अजय खांडेकर,
Chhattisgarh Film Welfare Association Society
के संरक्षक अजय शर्मा, उपाध्यक्ष सन्निधि राव, डायरेक्टर शशिकांत कौशिक, स्क्रिप्ट राइटर राजेश साहू, संगीतकार डी.पी. विश्वकर्मा, डॉ. सोहन लाल वर्मा और रामनाथ साहू शामिल रहे।
साथ ही छत्तीसगढ़ी फिल्म प्रमोटर और कांग्रेस नेता विकास यादव भी उपस्थित थे। सभी ने मिलकर क्षेत्रीय सिनेमा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
यह पूरी टीम बिलासपुर से दुर्ग पहुंची थी और उन्होंने मंजू वोरा से मुलाकात कर अपनी फिल्म को लेकर समर्थन और मार्गदर्शन प्राप्त किया।
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Arun Vora से जुड़ी मुलाकात का महत्व
arun vora से जुड़ी यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि यह सांस्कृतिक सहयोग का प्रतीक है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि राजनीति और सिनेमा मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
इस तरह की पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री को नई पहचान मिल सकती है।
अंत में कहा जा सकता है कि arun vora से जुड़ी यह खबर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को दर्शाती है। फिल्म “भक्त माँ कर्मा” के माध्यम से राज्य की परंपराओं और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है। आने वाले समय में इस तरह के सहयोग से क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
