Raipur में फर्जी लोन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में थाना पंडरी में प्रकरण दर्ज है।
Raipur पुलिस ने इस गिरोह के एक और आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। इस ठगी में आरोपियों ने पीड़ित के नाम पर अलग-अलग बैंकों से भारी-भरकम लोन निकाला और उसे अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया।
यह मामला बताता है कि किस तरह संगठित ठग गिरोह बेगुनाह लोगों को निशाना बनाकर उनकी पहचान का दुरुपयोग करते हैं और उन्हें कर्ज के जाल में फंसा देते हैं।
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कैसे हुई ₹27.5 लाख की धोखाधड़ी?
बैंकों को भी बनाया शिकार — फर्जी दस्तावेजों से निकाला लोन
Raipur के थाना पंडरी में दर्ज मामले के अनुसार, इस गिरोह ने पीड़ित प्रार्थी के नाम पर अलग-अलग बैंकों से कुल ₹27 लाख 50 हजार रुपये का लोन निकालकर भारी धोखाधड़ी की।
पीड़ित को पहले यह विश्वास दिलाया गया कि उसे लोन दिलाने में मदद की जाएगी। इस प्रलोभन में फंसाकर उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया और बैंकों से फर्जी तरीके से राशि निकाल ली गई।
यह ठगी की वह खतरनाक प्रवृत्ति है जिसमें पीड़ित को पता भी नहीं चलता और उसके नाम पर लाखों का कर्ज चढ़ जाता है। Raipur में इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
Raipur पुलिस ने फरार आरोपी को दबोचा
लंबी तलाश के बाद बलौदाबाजार निवासी गिरफ्तार
इस मामले में एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन दूसरा आरोपी पुलिस की पकड़ से बचता फिर रहा था।
Raipur पुलिस ने लगातार और सतर्क निगरानी के बाद फरार आरोपी जितेश कुमार चंद्राकर (32 वर्ष), निवासी बलौदाबाजार, को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी काफी समय से फरार था और पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश कर रहा था। लेकिन Raipur पुलिस की मुस्तैदी के आगे उसकी एक न चली।
पूछताछ में क्या-क्या कबूला आरोपी ने?
AC और मोबाइल खरीदकर बेचे — चौंकाने वाला खुलासा
गिरफ्तारी के बाद Raipur पुलिस ने आरोपी जितेश कुमार चंद्राकर से गहन पूछताछ की।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पीड़ित के नाम पर फाइनेंस कराकर दो एयर कंडीशनर (AC) और एक मोबाइल फोन खरीदा। इसके बाद इन सभी वस्तुओं को बाजार में बेच दिया और रकम हड़प ली।
यह एक सुनियोजित ठगी थी, जिसमें पीड़ित के नाम पर उपभोक्ता वस्तुएं लेकर उन्हें नकद में बेचा गया। इससे पीड़ित पर लोन का बोझ आ गया और आरोपी माल बेचकर फरार हो गया।
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पहले आरोपी होरीलाल पंकज की करतूत — Raipur पुलिस का बड़ा खुलासा
फर्जी पदनाम बोर्ड लगाकर बनता था प्रभावशाली — नई धाराएं जोड़ी गईं
जाँच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। इस मामले में पहले गिरफ्तार आरोपी होरीलाल पंकज ने अपनी कार में फर्जी पदनाम का बोर्ड लगा रखा था।
इस बोर्ड के जरिए वह खुद को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करता था। इससे लोगों में उसके प्रति विश्वास पैदा होता था और वे उसकी बातों में आसानी से आ जाते थे।
Raipur पुलिस ने इस कृत्य को भ्रामक और छलपूर्ण मानते हुए होरीलाल पंकज पर अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ दी हैं। यह एक संगठित और पूर्व नियोजित ठगी का स्पष्ट उदाहरण है।
पूरे नेटवर्क की जाँच जारी
कितने और लोग हैं इस गिरोह में?
Raipur पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में अभी अन्य तथ्यों की जाँच जारी है। पुलिस इस पूरे ठगी नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
यह देखा जा रहा है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं, कितने और पीड़ितों को निशाना बनाया गया है, और किन-किन बैंकों से किस प्रकार लोन निकाले गए।
पुलिस का मानना है कि यह एक सुनियोजित गिरोह है और इसके तार और भी गहरे हो सकते हैं। Raipur पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जाँच कर रही है।
फर्जी लोन ठगी से कैसे बचें? — सतर्कता के उपाय
आम नागरिकों के लिए जरूरी सावधानियाँ
Raipur सहित पूरे छत्तीसगढ़ में इस तरह की ठगी से बचने के लिए आम नागरिकों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- अपने दस्तावेज (Aadhaar, PAN, बैंक पासबुक) किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
- लोन दिलाने का वादा करने वाले अनजान एजेंट पर विश्वास न करें।
- बैंक से सीधे संपर्क करें और लोन की जानकारी खुद लें।
- CIBIL स्कोर समय-समय पर चेक करें ताकि आपके नाम पर कोई फर्जी लोन न हो।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में दें।
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Raipur के थाना पंडरी का यह मामला साफ दर्शाता है कि फर्जी लोन गिरोह किस तरह आम लोगों को अपना शिकार बनाते हैं और उनके नाम पर लाखों की ठगी को अंजाम देते हैं। Raipur पुलिस की सतर्कता और लगातार कार्रवाई से दूसरे फरार आरोपी जितेश कुमार चंद्राकर की गिरफ्तारी हुई है।
होरीलाल पंकज जैसे ठग जो फर्जी पदनाम का बोर्ड लगाकर खुद को प्रभावशाली दिखाते हैं, वे समाज के लिए बेहद खतरनाक हैं। Raipur के नागरिकों से अपील है कि वे सतर्क रहें, अपने दस्तावेज सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
