Durg-Bhilai में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक माहौल एकदम गरम हो गया है। जिला कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने एक प्रेस वार्ता में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर जनता को जानबूझकर भ्रमित कर रही है।
यह प्रेस वार्ता दुर्ग ग्रामीण अध्यक्ष राकेश ठाकुर, दुर्ग शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल और भिलाई नगर अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने संयुक्त रूप से आयोजित की। तीनों नेताओं ने एक सुर में भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाए।
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Durg-Bhilai में महिला आरक्षण पर सियासत तेज
Durg-Bhilai की राजनीति में इन दिनों महिला आरक्षण सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा इस संवेदनशील मुद्दे को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
राकेश ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाल में संसद में पेश किया गया प्रस्ताव महिला आरक्षण से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं था। उनके अनुसार यह प्रस्ताव मूल रूप से परिसीमन से संबंधित था, जिसे भाजपा ने महिला आरक्षण का रंग दे दिया।
विपक्ष ने उस प्रस्ताव का विरोध किया और सदन में उसे गिरा दिया। इसके बाद भाजपा ने प्रचार शुरू कर दिया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के विरुद्ध है, जो सरासर झूठ है।
कांग्रेस का आरोप — भाजपा फैला रही है भ्रम
कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि भाजपा दो अलग-अलग मुद्दों — महिला आरक्षण और परिसीमन — को जानबूझकर एक साथ मिला रही है। यह राजनीतिक चाल जनता को गुमराह करने के लिए बनाई गई है।
धीरज बाकलीवाल ने कहा कि Durg-Bhilai और पूरे छत्तीसगढ़ की महिलाएं इस सच को समझती हैं। भाजपा की यह रणनीति महिला मतदाताओं को धोखा देने की कोशिश है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि पार्टी हमेशा से महिला सशक्तिकरण की पक्षधर रही है और आज भी अपने उसी रुख पर दृढ़ है।
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 — क्या है पूरा सच?
कांग्रेस नेताओं ने एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा — नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही संसद के दोनों सदनों से पारित होकर कानून का रूप ले चुका है।
इसके बावजूद भाजपा यह प्रचार कर रही है जैसे महिला आरक्षण अभी लागू नहीं हुआ और कांग्रेस ने इसका विरोध किया। कांग्रेस के अनुसार यह प्रचार पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है।
16 अप्रैल 2026 के प्रस्ताव की असलियत
16 अप्रैल 2026 को संसद में एक प्रस्ताव लाया गया था जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की बात थी। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित थीं।
इस प्रस्ताव में 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन करने का प्रावधान भी शामिल था। कांग्रेस का कहना है कि यह महिला आरक्षण का प्रस्ताव नहीं, बल्कि परिसीमन का प्रस्ताव था।
परिसीमन और पुराने आंकड़ों पर दुर्ग-भिलाई कांग्रेस के तीखे सवाल
Durg-Bhilai के कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। उनका पहला सवाल यह है कि जब देश में नई जनगणना 2026-27 में होने वाली है, तो 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों किया जा रहा है?
2036 तक का इंतजार क्यों?
कांग्रेस ने दूसरा बड़ा सवाल यह उठाया कि महिला आरक्षण को मौजूदा लोकसभा में ही 33 प्रतिशत क्यों लागू नहीं किया जा सकता? यदि कानून बन चुका है तो उसे अभी क्यों नहीं लागू किया जा रहा?
भाजपा ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसे 2036 तक टाल दिया है। कांग्रेस का कहना है कि यह देश की महिलाओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय है।
कानून पारित होने के बाद भी अगर 10-12 साल तक उसे लागू न किया जाए, तो वह कानून महज एक कागजी दस्तावेज बनकर रह जाता है।
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महिला आरक्षण की असली शुरुआत किसने की?
भिलाई नगर अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने ऐतिहासिक तथ्य सामने रखते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण की नींव कांग्रेस ने ही रखी थी।
1989 में कांग्रेस सरकार ने ही पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की शुरुआत की थी। इस ऐतिहासिक कदम को 1993 में संवैधानिक दर्जा मिला।
इस निर्णय के चलते आज देशभर में लाखों महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में काम कर रही हैं और स्थानीय शासन में उनकी मजबूत भागीदारी है।
Durg-Bhilai कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा?
महामंत्री योगिता चंद्राकर ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर केवल राजनीति कर रही है। उनका आरोप था कि परिसीमन के जरिए भाजपा अपना राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।
Durg-Bhilai की महिलाओं को यह समझना होगा कि उनके नाम पर जो राजनीति हो रही है, उसका असल मकसद क्या है। कांग्रेस नेताओं ने आम जनता से अपील की कि वे इस भ्रामक प्रचार से सावधान रहें।
धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने घोषणापत्र और कार्यों में हमेशा महिला आरक्षण की पक्षधर रही है और आगे भी रहेगी।
Durg-Bhilai की राजनीति में महिलाएं बनीं केंद्र बिंदु
Durg-Bhilai में महिला आरक्षण को लेकर छिड़ी यह सियासी जंग साफ बता रही है कि आने वाले चुनावों में महिला मतदाता सबसे अहम भूमिका निभाएंगी।
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम कानून तो बन गया, लेकिन उसे 2036 तक टालना महिलाओं के साथ राजनीतिक धोखा है। भाजपा पर परिसीमन की आड़ में महिला आरक्षण को लटकाने का सीधा आरोप लगाया गया है।
Durg-Bhilai की जनता और खासकर महिलाओं को यह तय करना होगा कि वे किसके वादों पर भरोसा करें — उस पार्टी पर जो कानून बनाकर भी उसे लागू नहीं करती, या उस पर जिसने 1989 में ही पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण की नींव रख दी थी।
