Laxmi Sakhi Millets Cart योजना छत्तीसगढ़ की उन महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम बन चुकी है, जो आर्थिक आत्मनिर्भरता का सपना देखती थीं।
रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही राज्य के समग्र विकास की सबसे मजबूत नींव है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के जरिए स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेट्स कार्ट और चेक वितरित किए गए, जिससे वे खुद का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
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महिला सशक्तिकरण को मिली नई दिशा
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कार्यक्रम में स्पष्ट कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो उसका असर पूरे समाज और राज्य की प्रगति पर साफ दिखाई देता है।
सरकार का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है।
Laxmi Sakhi Millets Cart इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस और प्रभावशाली कदम है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
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Laxmi Sakhi Millets Cart से कितनी कमाई हो रही है?
Laxmi Sakhi Millets Cart का सबसे चमकदार उदाहरण कांकेर जिले के नरहरपुर से सामने आया है।
यहाँ की महिलाएं इस योजना के माध्यम से रोजाना 2 से 3 हजार रुपये और महीने में 25 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
यह आंकड़ा न केवल इन महिलाओं के परिवारों के लिए बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी ताकत बन रहा है।
मिलेट्स कार्ट – स्वरोजगार का नया मॉडल
Laxmi Sakhi Millets Cart के जरिए महिलाएं मिलेट्स यानी मोटे अनाज से बने उत्पाद बेचकर अपनी आजीविका चला रही हैं।
मिलेट्स यानी ज्वार, बाजरा, रागी जैसे पौष्टिक अनाजों की बढ़ती मांग के बीच यह व्यवसाय महिलाओं के लिए दीर्घकालिक और टिकाऊ रोजगार का स्रोत बन रहा है।
‘लखपति दीदी’ बनाने का सरकारी संकल्प
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कार्यक्रम में ऐलान किया कि राज्य सरकार का स्पष्ट उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है।
इसके लिए सरकार तीन मोर्चों पर काम कर रही है – वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और बाजार उपलब्धता।
Laxmi Sakhi Millets Cart इसी बड़े लक्ष्य की एक अहम कड़ी है, जो महिलाओं को न केवल रोजगार दे रही है बल्कि उन्हें एक उद्यमी की पहचान भी दिला रही है।
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महिला कोष और सक्षम योजना – कम ब्याज पर बड़ा लोन
सिर्फ 3% ब्याज पर मिल रहा लोन
महिला कोष योजना के तहत महिलाओं को मात्र 3% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
पहली बार 2 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है। समय पर भुगतान करने पर दूसरी बार 6 लाख रुपये तक का ऋण लेने की सुविधा मिलती है।
सक्षम योजना – व्यक्तिगत स्वरोजगार को बढ़ावा
सक्षम योजना के माध्यम से महिलाओं को व्यक्तिगत स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है।
इस योजना से जुड़कर महिलाएं पापड़ निर्माण, श्रृंगार सामग्री की दुकान और किराना व्यवसाय जैसे छोटे लेकिन लाभदायक उद्यम शुरू कर रही हैं और नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
Laxmi Sakhi Millets Cart: हजारों महिलाओं को मिला आर्थिक सहारा
सरकारी आंकड़े इस योजना की सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं।
2022-23 में 10,500 महिलाओं को 10.70 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। 2023-24 में 2500 स्व-सहायता समूहों को 31 करोड़ रुपये देने का लक्ष्य रखा गया है।
| वर्ष | लाभार्थी महिलाएं/समूह | ऋण राशि |
|---|---|---|
| 2022-23 | 10,500 महिलाएं | ₹10.70 करोड़ |
| 2023-24 | 2500 समूह (लक्ष्य) | ₹31 करोड़ |
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि Laxmi Sakhi Millets Cart और सहयोगी योजनाएं महिलाओं के जीवन में वास्तविक और मापनीय बदलाव ला रही हैं।
बस्तर से शुरू हुआ, पूरे राज्य में फैला अभियान
Laxmi Sakhi Millets Cart अभियान की औपचारिक शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर बस्तर में हुई थी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने संयुक्त रूप से इस पहल का शुभारंभ किया था। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल और दूरदराज के क्षेत्र से शुरुआत करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार वास्तव में अंतिम पंक्ति की महिला तक पहुंचना चाहती है।
अब यह अभियान पूरे प्रदेश में विस्तार पा रहा है और हजारों नई महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोल रहा है।
कार्यक्रम में कौन-कौन रहे उपस्थित?
रायपुर में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण हस्तियां उपस्थित रहीं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में हितग्राही महिलाएं मौजूद रहीं।
कार्यक्रम में Laxmi Sakhi Millets Cart प्राप्त करने वाली महिलाओं के अनुभव सुनकर उपस्थित सभी लोग प्रेरित हुए।
Laxmi Sakhi Millets Cart योजना छत्तीसगढ़ की उन हजारों महिलाओं के लिए एक नई सुबह लेकर आई है, जो आर्थिक निर्भरता से मुक्त होकर अपने परिवार और समाज को मजबूत बनाना चाहती थीं।
रोजाना 2 से 3 हजार और महीने में 30 हजार रुपये तक की कमाई, 3% ब्याज पर लोन और लखपति दीदी का सपना – यह सब मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जो महिलाओं को वास्तविक ताकत दे रहा है।
Laxmi Sakhi Millets Cart सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की महिलाओं की आत्मनिर्भरता और गरिमा की एक नई कहानी है – जो बस्तर से शुरू होकर पूरे राज्य में फैल रही है।
