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अब अंगूठा नहीं लगाएगी हीराबाई, धमधा के क्वारनटाईन सेंटर में 15 दिनों में हुई साक्षर

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दुर्ग (छत्तीसगढ़)। लॉक डाउन के दौरान कैसे ग्रामीणों के वक्त का सबसे बेहतर इस्तेमाल हो, इसको लेकर सभी क्वारन्टीन केंद्रों में कुछ न कुछ गतिविधि चलाई गई लेकिन धमधा में एक विशेष काम हुआ। यहां लोगों को शब्दों की ताकत से परिचित कराया गया। सभी क्वारन्टीन केंद्रों में निरक्षर लोगों की पहचान कर इन्हें साक्षर बनाने शब्दों की पहचान कराने का काम शुरू हुआ। इस महायज्ञ की शुरुआत हुई राजपुर ग्राम से। यहां नागपुर से प्रवासी श्रमिक हीरा बाई आईं थीं। एसडीएम दिव्या वैष्णव ने उनसे कहा कि आपको साक्षर बनाना है हमारा साथ दोगी। हीराबाई ने हामी भरी, खूब मेहनत की, अब अक्षर पहचान लेती हैं। हस्ताक्षर कर लेती हैं। उनके लिए अक्षर का सुनहरा संसार खुल गया है। इसके लिए धमधा ब्लॉक के बीईओ, सरपंच और सचिव ने भी काफी काम किया।

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हीरा बाई ने बताया कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। अब वे अंगूठा नहीं लगाएंगी। सिग्नेचर करेंगी। ऐसा सोचकर भी बहुत अच्छा लगता था और अब मैं यह कर रही हूं। हीरा बाई ने बताया कि काम करते थे, कहाँ पर क्या लिखा है। यह समझ नहीं आता था, पता नहीं कितने बार लोगों ने लूटा होगा। अब अक्षर की ताकत साथ है। लॉक डाउन के समय का अच्छा उपयोग हो गया है। एसडीएम ने बताया कि यह समय इनके लिए काफी उपयोगी है क्योंकि साक्षरता की कक्षा में एक दो घंटे ही समय दे सकती थीं। अब तो पूरा दिन है। सबसे बड़ी बात यह है कि अक्षर ज्ञान को लेकर जो निष्ठा हीरा बाई ने दिखाई, वो काबिलेतारीफ है। हम अब सभी क्वारन्टीन केंद्रों में निरक्षर लोगों को चिन्हांकित कर इस दिशा में काम कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
बातचीत में हीरा बाई ने आखिर में छत्तीसगढ़ी में कहा। कभी बाप-पुरखा इस्कूल नहीं देखें रहंव, मोर दाई-ददा मन मोला पढ़ाये बर नहीं भेजिस हे अउ ए बीमारी के डर हा मोला 14 दिन भर इस्कूल में बन्द कर देहे।
14 दिन की अवधि हीराबाई ने लॉक डाउन की जरूर काटी है लेकिन इसके प्रतिफल में उन्हें 40 साल की निरक्षरता से आजादी मिल गई है। साक्षर होने के उनके संकल्प से अन्य लोगों को भी सृजनात्मक गतिविधि करने और हुनर बढ़ाने का प्रोत्साहन मिला है।
एसडीएम ने बताया कि शुक्रवार को कलेक्टर अंकित आनंद ने धमधा ब्लॉक के विभिन्न क्वारन्टीन केंद्रों का निरीक्षण किया और इस तरह के सृजनात्मक कार्य करने और सीखने लोगों को प्रोत्साहित भी किया।