G7 Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती चुनौतियों के बीच भरोसे, साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बताया। फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में भारत सहित कई देशों के नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, कर्ज संकट और स्वास्थ्य आपदाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर है। ऐसे समय में नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
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G7 Summit 2026 में पीएम मोदी का बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity’ विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया में साझेदारियां तभी सफल हो सकती हैं जब उनकी नींव आपसी विश्वास पर आधारित हो। पीएम मोदी के अनुसार वर्तमान समय में “विश्वास” सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बन चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सहयोग और पारदर्शी साझेदारी के माध्यम से ही संभव है।
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समुद्री व्यापार पर भारत की चिंता
G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाले समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार में बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसके साथ ही संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत पर भी दुख व्यक्त किया गया।
G7 Summit 2026 में रूस-यूक्रेन युद्ध पर बढ़ा दबाव
शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। G7 देशों ने रूस पर दबाव बढ़ाने और युद्ध समाप्त करने के लिए नए कदमों पर सहमति जताई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस को समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूसी तेल पर प्रतिबंधों को फिर से लागू किया जा सकता है।
कनाडा ने रूस पर लगाए नए प्रतिबंध
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रूस के शैडो फ्लीट, ऊर्जा राजस्व, रक्षा उद्योग और दुष्प्रचार से जुड़े संगठनों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की।
इन कदमों का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और यूक्रेन को समर्थन देना बताया गया है।
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भारत-कनाडा संबंधों को नई दिशा
G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच महत्वपूर्ण बैठक भी हुई।
दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, नवाचार, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की। यह बैठक भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई साझेदारी पर जोर
दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग के लिए सकारात्मक संकेत है।
इबोला संकट और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर चर्चा
G7 नेताओं ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में फैल रहे इबोला प्रकोप पर भी चिंता जताई।
सम्मेलन में जारी संयुक्त बयान में स्वास्थ्य सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए मजबूत और समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया गया।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इबोला का प्रकोप अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
G7 Summit 2026 में वैश्विक कर्ज संकट पर चिंता
G7 देशों ने बढ़ते वैश्विक ऋण संकट को भी गंभीर चुनौती बताया।
नेताओं ने कहा कि कई देशों पर बढ़ता कर्ज आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर रहा है और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के लिए वित्तीय संसाधनों को सीमित कर रहा है।
विकासशील देशों को मिलेगा समर्थन
G7 देशों ने बहुपक्षीय विकास बैंकों से जोखिम-साझाकरण तंत्र को बढ़ावा देने और सुधार कार्यक्रम लागू करने वाले देशों को अधिक निवेश समर्थन देने की अपील की।
इस पहल का उद्देश्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है।
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G7 Summit 2026 से भारत को क्या संदेश मिला?
भारत ने इस मंच का उपयोग वैश्विक भरोसे, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति के मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और संतुलित राय रखने के लिए किया।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का समर्थक है।
G7 Summit 2026 केवल एक कूटनीतिक सम्मेलन नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, युद्ध, स्वास्थ्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दिशा तय करने वाला मंच साबित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास, साझेदारी और वैश्विक एकजुटता का जो संदेश दिया, वह वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में G7 Summit 2026 के फैसलों का प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर देखने को मिल सकता है।
