रायपुर के अस्पतालों में इलाज पर संकट, 15 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा, सामने आई बड़ी वजह

Super Specialist Doctors की कमी अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। एक समय प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की मजबूत टीम हुआ करती थी, वहीं अब स्थिति चिंताजनक हो गई है। वेतन विसंगति और प्रशासनिक देरी के कारण कई डॉक्टर सरकारी सेवाओं से दूर होते जा रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि पूरे राज्य के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में केवल दस नियमित सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही बचे हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में कई सुपर स्पेशियलिटी विभाग बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

Super Specialist Doctors की कमी से स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट

Super Specialist Doctors की कमी ने रायपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार पूरे राज्य के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में अभी केवल 10 नियमित सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यह संख्या प्रदेश की आबादी और स्वास्थ्य जरूरतों के मुकाबले बेहद कम मानी जा रही है।

इस संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण वेतन विसंगति बताया जा रहा है। बताया जाता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर काम करने वाले प्रोफेसरों को लगभग तीन लाख रुपये तक वेतन मिलता है। वहीं वर्षों से सेवा दे रहे नियमित प्रोफेसरों को करीब दो लाख सत्तर हजार रुपये वेतन मिलता है।

इस अंतर ने डॉक्टरों में असंतोष पैदा कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि समान कार्य करने के बावजूद वेतन में इतना अंतर उचित नहीं है। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़कर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार अब तक 15 विशेषज्ञ डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें से 10 डॉक्टरों ने दाऊ कल्याण सिंह अस्पताल में अपनी नौकरी छोड़ी है। वहीं पांच डॉक्टरों ने मेकाहारा अस्पताल से इस्तीफा दिया है।

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नौ साल से लंबित वेतन विसंगति की फाइल

Super Specialist Doctors की समस्या अचानक नहीं बनी है। इसकी जड़ें पिछले कई वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक देरी में छिपी हैं। बताया जा रहा है कि वेतन विसंगतियों को दूर करने से संबंधित एक महत्वपूर्ण फाइल पिछले नौ वर्षों से सरकारी दफ्तरों में लंबित पड़ी है।

डॉक्टरों का कहना है कि कई बार इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया गया। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। इसी वजह से कई विशेषज्ञ डॉक्टर निजी अस्पतालों में बेहतर वेतन और सुविधाओं की तलाश में चले गए।

रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज प्रदेश के हजारों मरीजों के लिए अंतिम उम्मीद होते हैं। लेकिन अगर विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या लगातार घटती रही, तो सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द नई नीतियां नहीं बनाई गईं, तो भविष्य में इन विभागों को चलाना मुश्किल हो सकता है।


Super Specialist Doctors

  • Super Specialist Doctors की संख्या पूरे राज्य में केवल 10 रह गई है।
  • वेतन विसंगति के कारण कई डॉक्टरों में असंतोष है।
  • संविदा प्रोफेसरों को लगभग 3 लाख वेतन मिलता है।
  • नियमित प्रोफेसरों को करीब 2.70 लाख रुपये वेतन मिल रहा है।
  • अब तक 15 विशेषज्ञ डॉक्टर सरकारी अस्पतालों से इस्तीफा दे चुके हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर

Super Specialist Doctors की कमी का सीधा असर मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ सकता है। रायपुर के सरकारी अस्पतालों में दूर-दराज जिलों से हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं।

अगर विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या कम होती रही, तो मरीजों को समय पर इलाज मिलना कठिन हो सकता है। कई मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ेगा, जहां इलाज का खर्च काफी ज्यादा होता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सरकार को इस समस्या पर जल्द ध्यान देना चाहिए। वेतन विसंगति को दूर करना और विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में बनाए रखना बेहद जरूरी है।

अगर ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी विभागों में ताले लगने की स्थिति भी बन सकती है।

अधिक जानकारी के लिए
https://cghealth.nic.in
https://mohfw.gov.in


कुल मिलाकर Super Specialist Doctors की कमी छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। वेतन विसंगति और प्रशासनिक देरी के कारण कई विशेषज्ञ डॉक्टर सरकारी अस्पतालों से दूर हो रहे हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो रायपुर के सुपर स्पेशियलिटी विभागों पर संकट और गहरा सकता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार जल्द कदम उठाए, ताकि Super Specialist Doctors की कमी दूर हो और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।

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