Chhattisgarh Conversion Bill: 7 बड़े प्रावधान, विवाद और सख्त कदम

Chhattisgarh Conversion Bill को लेकर राज्य की राजनीति और समाज में नई बहस शुरू हो गई है। मंगलवार को छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी। इस कानून का मकसद जबरन, लालच देकर, धोखे से या दबाव बनाकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।

दरअसल पिछले कुछ वर्षों में राज्य में धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। कभी चर्च पर हमला हुआ, तो कभी ननों की गिरफ्तारी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। ऐसे में सरकार का कहना है कि नया कानून पुराने कानून से ज्यादा सख्त और प्रभावी होगा। इसलिए यह बिल आने वाले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।


Chhattisgarh Conversion Bill क्या है और सरकार क्या चाहती है

Chhattisgarh Conversion Bill को राज्य सरकार “अवैध धर्म परिवर्तन” रोकने के लिए एक बड़ा कदम बता रही है। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कानून देश के अन्य राज्यों के एंटी-कन्वर्ज़न कानूनों का अध्ययन करके तैयार किया गया है।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आने वाले विधानसभा सत्र में इस बिल को पेश किया जाएगा। उनका दावा है कि यह कानून अन्य राज्यों के कानूनों से “एक कदम आगे” होगा।

सरकार का कहना है कि कई जगहों पर जबरन धर्म परिवर्तन, लालच देकर या चमत्कार के नाम पर लोगों को प्रभावित करने के आरोप सामने आए हैं। खास तौर पर “चंगाई सभा” (Healing Congregations) को लेकर भी सरकार ने चिंता जताई है। गृह मंत्री ने कहा कि ऐसी सभाओं में लोगों को भ्रमित किया जाता है और इसलिए नए कानून में इससे निपटने के लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा।

फिलहाल राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को छत्तीसगढ़ फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट 1968 के तहत देखा जाता है। लेकिन सरकार का मानना है कि बदलते हालात के कारण अब ज्यादा सख्त और स्पष्ट कानून की जरूरत है। इसलिए नया बिल 1968 के कानून को मजबूत या अपडेट करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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अधिक जानकारी के लिए भारत में धर्म परिवर्तन कानूनों के बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं:
https://en.wikipedia.org/wiki/Freedom_of_religion_acts_in_India


राज्य में क्यों बढ़ा विवाद

पिछले कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन को लेकर कई घटनाएँ हुई हैं, जिनसे यह मुद्दा काफी संवेदनशील बन गया है।

दिसंबर 2025 में क्रिसमस से एक दिन पहले रायपुर के एक लोकप्रिय मॉल में कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने क्रिसमस की सजावट तोड़ दी थी। यह विरोध बस्तर क्षेत्र में कथित अवैध धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर बुलाए गए छत्तीसगढ़ बंद के दौरान हुआ था।

इसी तरह जुलाई 2025 में केरल की दो ननों को दुर्ग रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप लगा था कि वे नारायणपुर जिले की तीन महिलाओं की तस्करी और धर्म परिवर्तन करा रही थीं। हालांकि बाद में उन महिलाओं ने कहा कि नन सिर्फ उन्हें नौकरी दिलाने में मदद कर रही थीं और कोई धर्म परिवर्तन नहीं हुआ था।

इसके अलावा जनवरी 2023 में नारायणपुर में करीब 50 लोगों की भीड़ ने एक चर्च में तोड़फोड़ की थी और पुलिस अधिकारियों पर हमला किया था। उस घटना के बाद खबरें आईं कि 100 से ज्यादा ईसाई परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया गया और उन्हें कुछ समय तक स्टेडियम में रहना पड़ा।

इन घटनाओं ने राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता और धर्म परिवर्तन पर कानून को लेकर बहस तेज कर दी।


Key Facts about Chhattisgarh Conversion Bill

  • छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने Chhattisgarh Conversion Bill 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी।
  • बिल का मकसद जबरन, लालच देकर या धोखे से धर्म परिवर्तन रोकना है।
  • गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार यह कानून अन्य राज्यों से ज्यादा सख्त होगा।
  • “चंगाई सभा” जैसे धार्मिक आयोजनों को भी कानून के दायरे में लाने की तैयारी है।
  • फिलहाल राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को 1968 के कानून के तहत देखा जाता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

Chhattisgarh Conversion Bill आने से राज्य में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। सरकार इसे धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने का कदम बता रही है।

हालांकि दूसरी तरफ कुछ सामाजिक संगठनों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि ऐसे कानूनों का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। उनका तर्क है कि इससे अल्पसंख्यक समुदायों पर दबाव बढ़ सकता है।

बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में यह मुद्दा पहले से ही संवेदनशील रहा है। वहां धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर कई बार सामाजिक तनाव देखने को मिला है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि नया कानून लागू होने के बाद प्रशासन की भूमिका और जिम्मेदारी दोनों बढ़ जाएंगी।

भारत में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं:
https://en.wikipedia.org/wiki/Freedom_of_religion_in_India


कुल मिलाकर Chhattisgarh Conversion Bill छत्तीसगढ़ की राजनीति और समाज दोनों के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। सरकार का दावा है कि यह कानून अवैध धर्म परिवर्तन को रोकेगा और लोगों को धोखे से बचाएगा। वहीं दूसरी ओर आलोचक इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंतित हैं।

अब सबकी नजर आने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी है, जहां Chhattisgarh Conversion Bill पेश होगा। अगर यह कानून पास हो जाता है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त कानून लागू हैं।

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