Polavaram Project: 6 गंभीर खामियां, CAG की सख्त चेतावनी

Polavaram Project को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह देश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।

हालांकि नई ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम अब तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं। खासकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में संभावित डूब क्षेत्र को रोकने के लिए बनने वाले सुरक्षात्मक तटबंधों का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ है।

सीएजी ने आंध्र प्रदेश सरकार को सलाह दी है कि वह इस मुद्दे को दोनों राज्यों के साथ मिलकर जल्द सुलझाए, ताकि परियोजना का काम तेजी से पूरा हो सके।


Polavaram Project पर CAG की गंभीर टिप्पणियां

Polavaram Project पर 2017-18 से 2022-23 तक की अवधि के लिए किए गए प्रदर्शन ऑडिट में कई महत्वपूर्ण कमियां सामने आई हैं।

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा में गांवों को डूब क्षेत्र से बचाने के लिए सुरक्षात्मक तटबंध बनाए जाने थे। इन तटबंधों का निर्माण मूल योजना के अनुसार 2014-15 तक पूरा हो जाना चाहिए था।

लेकिन अब तक इनका काम शुरू नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण यह बताया गया कि दोनों राज्यों में आवश्यक जनसुनवाई प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 2019 से 2023 के बीच परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश सरकार का बजट समर्थन काफी कम हो गया। इससे परियोजना की गति प्रभावित हुई।

सीएजी ने राज्य सरकार को सलाह दी कि परियोजना के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आवंटित धन का सही और प्रभावी उपयोग भी किया जाए, ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके।

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Polavaram Project की स्थिति

गोदावरी नदी पर बनने वाली Polavaram Project देश की एक बड़ी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना है। इसका उद्देश्य सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण भी है।

हालांकि इस परियोजना के कारण कुछ क्षेत्रों में डूब क्षेत्र बनने की आशंका भी है। खासकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ गांव इस प्रभाव क्षेत्र में आते हैं।

इसी कारण इन क्षेत्रों में सुरक्षात्मक तटबंध बनाने की योजना तैयार की गई थी। लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और प्रक्रियागत कारणों से इन कार्यों में देरी हो गई।

सीएजी ने यह भी पाया कि कुछ कार्यों के ठेके नियमों के विपरीत तरीके से दिए गए। कुछ मामलों में निविदा शर्तों में बदलाव कर एक ही ठेकेदार को काम दिया गया।

अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक रिपोर्ट देखें:
https://cag.gov.in


Key Facts: Polavaram Project

  • सीएजी ने परियोजना पर प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट जारी की।
  • छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सुरक्षात्मक तटबंध का निर्माण शुरू नहीं हुआ।
  • 2019 से 2023 के बीच बजट समर्थन में कमी पाई गई।
  • कुछ ठेकों में नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए।
  • भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों में भी देरी दर्ज की गई।

संभावित प्रभाव

Polavaram Project से जुड़े इन खुलासों के बाद परियोजना की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर बहस तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षात्मक तटबंध समय पर नहीं बने, तो पड़ोसी राज्यों के कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे को जल्द सुलझाना जरूरी है।

इसके अलावा भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों को भी तेज करने की जरूरत बताई गई है। क्योंकि जलाशय में पानी भरने से पहले प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाना जरूरी है।

सीएजी ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को ठेका प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना चाहिए। इससे प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा और परियोजना की लागत भी नियंत्रित रहेगी।


Polavaram Project देश की एक महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना है। लेकिन सीएजी की रिपोर्ट ने इसके क्रियान्वयन में कई गंभीर चुनौतियों को उजागर किया है।

यदि सरकार इन सिफारिशों को गंभीरता से लागू करती है, तो परियोजना की गति तेज हो सकती है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की चिंताओं का समाधान भी संभव होगा।

भविष्य में Polavaram Project की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन पारदर्शिता, समन्वय और समयबद्ध कार्यान्वयन को कितनी प्राथमिकता देता है।

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