Manipur एक बार फिर हिंसा और अशांति की आग में जल रहा है। 7 अप्रैल 2026 को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी गाँव में एक संदिग्ध रॉकेट हमले में एक BSF जवान के पाँच साल के बेटे और छह महीने की बेटी की नींद में ही मौत हो गई।
यह हमला इतना भयावह था कि पूरे घाटी क्षेत्र में रोष की लहर दौड़ गई। इस घटना के बाद नागरिक समाज संगठनों और मेइरा पैबिस (महिला मशाल वाहकों) ने 19 अप्रैल से 23 अप्रैल तक पाँच दिवसीय पूर्ण बंद का आह्वान किया।
Manipur की धरती पर मासूम बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है।
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Manipur हिंसा की जड़ें — मई 2023 से अब तक
Manipur में मौजूदा संघर्ष की शुरुआत मई 2023 में हुई थी। उच्च न्यायालय के एक आदेश ने मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने पर विचार करने को कहा था, जिससे मेइती और कुकी समुदायों के बीच जानलेवा जातीय हिंसा भड़क उठी।
यह आदेश बाद में वापस ले लिया गया, लेकिन दोनों समुदायों के बीच दरार बढ़ती रही।
Manipur में इस हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं।
2025 में हिंसा की घटनाएं कुछ कम हुई थीं, लेकिन शांति की स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
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7 अप्रैल का वह काला दिन — रॉकेट हमले में गई दो जिंदगियाँ
आरोप है कि संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा दागे गए रॉकेट ने बिष्णुपुर के ट्रोंगलाओबी में एक घर को निशाना बनाया।
उस रात दोनों बच्चे सो रहे थे। पाँच साल का भाई और उसकी मात्र छह महीने की बहन — दोनों ने इस हमले में अपनी जान गँवाई। उनकी माँ भी इस हमले में घायल हो गई।
उसी दिन प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने CRPF कैंप पर हमला कर दिया — गाड़ियाँ जलाई गईं, संपत्ति नष्ट की गई। सुरक्षाबलों की कार्रवाई में तीन लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक घायल हुए।
राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है।
Manipur में बंद और इंटरनेट बंद — सामान्य जीवन ठप
Manipur में मई 2023 से भारत के सबसे लंबे इंटरनेट शटडाउन में से एक देखा गया है, जहाँ मोबाइल सेवाएं बार-बार बंद और चालू होती रही हैं। हाल ही में, 18 अप्रैल 2026 को घाटी के पाँच जिलों में 11 दिनों के बाद इंटरनेट सेवा बहाल की गई।
कुछ जिलों में कर्फ्यू भी लगाया गया।
बंद के दौरान स्कूल, बाजार और सार्वजनिक परिवहन सेवाएँ पूरी तरह बंद रहीं। बंद का असर मेइती समुदाय के सभी पाँच घाटी जिलों और उखरूल व सेनापति जिलों के नागा-बाहुल्य क्षेत्रों पर पड़ा।
इम्फाल घाटी में उरिपोक और नगाराम जैसे इलाकों में धरना-प्रदर्शन हुए। लोगों का दर्द और गुस्सा सड़कों पर उबल रहा था।
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CRPF जवानों पर हमला — महिला कर्मियों समेत 6 घायल
इम्फाल के थांगमेईबंद इलाके में एक मशाल रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हुई।
पुलिस ने 18 अप्रैल को एक रैली के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद 21 लोगों को गिरफ्तार किया और तीन CRPF कर्मियों को गंभीर रूप से घायल बताया गया।
घायल CRPF कर्मियों में तीन महिला जवान — रितिका कुमारी, संतोष कुमारी और संचिता इंद्रा शामिल थीं, जिन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
थांगमेईबंद, सागोलबंद और उरिपोक इलाकों में टकराव भड़का। सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया, आँसू गैस के गोले दागे, रबर बुलेट और हवाई फायरिंग की — जबकि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी और गुलेल से जवाब दिया।
Manipur पुलिस ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पेट्रोल बम, कैटापल्ट और पत्थरों का इस्तेमाल सुरक्षाबलों पर किया।
Manipur में United Naga Council का शटडाउन
बंद का यह दौर सिर्फ मेइती संगठनों तक सीमित नहीं रहा।
United Naga Council ने भी एक अलग घटना के विरोध में तीन दिवसीय “कुल बंद” का आह्वान किया। यह बंद 18 अप्रैल को इम्फाल से उखरूल जाने वाले नागरिक वाहनों के काफिले पर संदिग्ध उग्रवादियों के हमले की प्रतिक्रिया में था, जिसमें एक सेवानिवृत्त सेना के जवान और एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई।
इस बंद ने उखरूल और सेनापति जिलों के नागा-बाहुल्य इलाकों में सामान्य जीवन को पूरी तरह ठप कर दिया।
Manipur में एक साथ कई संगठनों का बंद इस बात का संकेत है कि हिंसा अब एक समुदाय तक सीमित नहीं रही।
Manipur हिंसा के 3 साल — 260 मौतें, 60,000 विस्थापित
मई 2023 से शुरू हुई हिंसा ने Manipur को किस हद तक तोड़ा है, यह आँकड़े खुद बोलते हैं।
इस संघर्ष में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं।
शुरुआत में यह हिंसा मेइती और कुकी समुदायों के बीच थी, लेकिन अब यह लगभग हर वर्ग और समुदाय को अपनी चपेट में ले चुकी है।
प्रदर्शनकारी अब उग्रवादियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, NRC लागू करने और 2027 की जनगणना से पहले पहचान प्रक्रिया पूरी करने की माँग कर रहे हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया — NIA को सौंपी जाँच
राज्य सरकार ने बच्चों की हत्या के मामले की जाँच NIA को सौंप दी है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार तय समय सीमा में मांगें पूरी नहीं करती तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
अधिकारियों ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अपनी माँगें कानूनी तरीके से उठाने की अपील की है।
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Manipur की धरती पर दो मासूम बच्चों की बर्बर मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इस राज्य में शांति की जड़ें अभी भी खोखली हैं। बंद, इंटरनेट शटडाउन, कर्फ्यू और सुरक्षाबलों पर हमले — यह सब एक ऐसे समाज की तस्वीर है जो न्याय और सुरक्षा के लिए तरस रहा है।
जब तक Manipur में सभी समुदायों के बीच स्थायी संवाद, न्यायिक जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं आती, तब तक यह अशांति थमने वाली नहीं है। देश को इस राज्य की पीड़ा पर ध्यान देना होगा — वरना Manipur का यह दर्द और गहरा होता जाएगा।
