Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas के अवसर पर 14 अगस्त को रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुरातत्व संचालनालय परिसर स्थित ओपन एयर थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 1947 के विभाजन में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने विस्थापित परिवारों के साहस, संघर्ष और धैर्य को नमन करते हुए कहा कि इतिहास केवल अतीत का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि वह वर्तमान को दिशा देने और भविष्य को सुरक्षित करने की सीख देता है। उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।
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Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas का भावपूर्ण संदेश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 1947 का भारत विभाजन केवल जमीन और सीमाओं का बंटवारा नहीं था। यह एक ऐसी मानवीय त्रासदी थी, जिसने लाखों लोगों को अपने जन्मस्थान, घर और प्रियजनों से दूर होने के लिए मजबूर कर दिया।
बंगाली, सिख और सिंधी सहित कई समुदायों के परिवारों ने विस्थापन का दर्द झेला। विभाजन को प्रत्यक्ष रूप से देखने वाली पीढ़ी आज काफी हद तक हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी यादें और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचते रहे हैं।
साय ने कहा कि विस्थापित परिवारों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में लगभग शून्य से अपना जीवन दोबारा शुरू किया। मेहनत, दृढ़ संकल्प और साहस के बल पर उन्होंने न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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विस्थापित परिवारों के संघर्ष को किया याद
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas के रूप में मनाने का निर्णय लिया, ताकि विभाजन में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी जा सके और विस्थापित परिवारों के संघर्ष को सम्मान मिल सके।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इतिहास के इस पीड़ादायक अध्याय से परिचित कराना जरूरी है। विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य समाज में किसी प्रकार का वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इतिहास से सीख लेना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब समाज एकजुट और सशक्त रहेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार विभाजन से प्रभावित परिवारों और उनकी आने वाली पीढ़ियों के प्रति संवेदनशीलता के साथ खड़ी है।
डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने दिया एकता का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने समाज की एकता को राष्ट्र की एकता की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि भारत की अखंडता और एकता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने लोगों से 14 अगस्त के अवसर पर यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि देश की एकता और अखंडता से कभी समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों ने घर, संपत्ति और अपने प्रियजनों को खोया। इसके बावजूद उन्होंने नए सिरे से जीवन खड़ा किया और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके संघर्ष और त्याग को देश की सामूहिक स्मृति में उचित स्थान मिलना चाहिए।
इतिहास की पीड़ा से भविष्य के लिए सीख
डॉ. द्विवेदी ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए सर Cyril Radcliffe की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जुलाई 1947 में भारत पहुंचे रैडक्लिफ को बहुत कम समय में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
उन्होंने कहा कि विभाजन के परिणामों को समझना आज भी जरूरी है। इतिहास के अनुभव समाज को उन ताकतों के प्रति सतर्क करते हैं, जो लोगों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास करती हैं।
उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
सीएम साय ने निकाला मौन मार्च
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुरातत्व संचालनालय से अंबेडकर चौक तक आयोजित मौन मार्च में हिस्सा लिया। मार्च के जरिए विभाजन में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक मोतीलाल साहू, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि, समाज के प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए। विभाजन से प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और स्मृतियां भी साझा कीं।
Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas से एकजुटता का संदेश
Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas का उद्देश्य विभाजन की पीड़ा को याद करने के साथ उन परिवारों के संघर्ष और योगदान को सम्मान देना है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन फिर से खड़ा किया।
रायपुर के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय और डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने इतिहास को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि अतीत की त्रासदी से सीख लेकर वर्तमान में एकजुटता बनाए रखी जाए।
Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas केवल विभाजन के दर्द को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और भाईचारे के संकल्प को मजबूत करने का दिन भी है। रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों और विस्थापित परिवारों को श्रद्धांजलि देते हुए इतिहास की सीख को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर एकजुट और सशक्त भारत का निर्माण ही इस स्मृति दिवस की सबसे महत्वपूर्ण भावना है।
