Tungal Nature Cafe बना बदलाव की नई पहचान

Tungal Nature Cafe आज छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बदलाव, पुनर्वास और उम्मीद की नई मिसाल बनकर उभरा है। जिस बस्तर क्षेत्र की पहचान कभी नक्सली हिंसा और गोलियों की आवाज से होती थी, वहीं अब पूर्व नक्सली महिलाएं मुस्कुराते हुए पर्यटकों को कॉफी और स्थानीय व्यंजन परोस रही हैं।

साबरी नदी के किनारे और तुंगल डैम के पास स्थित यह कैफे केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। दिसंबर 2025 से शुरू हुए इस कैफे में काम कर रहीं महिलाएं कभी माओवादी संगठनों का हिस्सा थीं।

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Tungal Nature Cafe से बदल रही बस्तर की पहचान

कई दशकों तक बस्तर क्षेत्र नक्सली हिंसा, सुरक्षा अभियानों और डर के माहौल से जूझता रहा। गरीबी, भय और परिस्थितियों के कारण कई युवा माओवादी संगठनों से जुड़ गए थे।

लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। सरकार की पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के प्रयास और विकास कार्यों ने इलाके की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। Tungal Nature Cafe इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

यह कैफे दिखाता है कि अगर अवसर और सम्मान मिले तो हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना संभव है।

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जंगल से मुख्यधारा तक का सफर

पहले जिन हाथों में AK-47 और विस्फोटक हुआ करते थे, उन्हीं हाथों में आज कॉफी मग और ट्रे दिखाई दे रहे हैं। यह बदलाव केवल रोजगार का नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक है।

कैफे में काम कर रही एक महिला ने भावुक होकर कहा:

“हमने अपने जीवन में बहुत अंधेरा देखा है। अब समाज की सेवा करने का मौका मिलना हमारे लिए नए जन्म जैसा है।”

एक अन्य महिला ने बताया कि अब वह अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर पा रही है। पहले ऐसा सपना भी नहीं था।

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कौन हैं Tungal Nature Cafe में काम करने वाली महिलाएं

1. कुहराम रामे

कुहराम रामे एक एरिया कमेटी सदस्य स्तर की नक्सली कैडर थीं। उन पर 5 लाख रुपये का इनाम था। 22 अप्रैल 2024 को आत्मसमर्पण करने के बाद अब वह पर्यटकों को कॉफी और स्थानीय भोजन परोसती हैं।

2. मड़वी बुधरी

मड़वी बुधरी Battalion-1 से जुड़ी थीं और उन पर 8 लाख रुपये का इनाम था। 30 जनवरी 2025 को आत्मसमर्पण करने के बाद अब वह कैफे के किचन और प्रशासनिक काम संभाल रही हैं।

3. मुचाकी सोमे

मुचाकी सोमे उत्तर बस्तर डिविजन प्रेस कमेटी की सदस्य थीं। उन पर 1 लाख रुपये का इनाम था। अब वह ग्राहकों का स्वागत मुस्कुराकर करती हैं।

4. मड़काम पोजे

पूर्व में Keralapal LOS यूनिट के डिप्टी कमांडर रहे मड़काम पोजे अब कैफे संचालन और स्थानीय समन्वय में मदद करते हैं।

5. कलमु पायके

ACM स्तर की कैडर रहीं कलमु पायके पर 5 लाख रुपये का इनाम था। अब वह स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं।

6. अनीता पोडियाम

आत्मसमर्पित कैडर की पत्नी अनीता पोडियाम ने भी इस पहल से जुड़कर नई जिंदगी की शुरुआत की है।


Tungal Nature Cafe पर्यटन का नया केंद्र

साबरी नदी किनारे खूबसूरत लोकेशन

Tungal Nature Cafe की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्राकृतिक लोकेशन है। तुंगल डैम और साबरी नदी के आसपास घने जंगल, शांत वातावरण और हरियाली पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

यह क्षेत्र अब केवल सुरक्षा अभियानों के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन और सकारात्मक बदलाव के लिए भी पहचाना जा रहा है।

यहां आने वाले पर्यटक स्थानीय व्यंजनों के साथ-साथ बस्तर के परिवर्तन को भी करीब से महसूस करते हैं।

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स्थानीय लोगों का मिला समर्थन

शुरुआत में गांव के लोगों के लिए पूर्व नक्सलियों को स्वीकार करना आसान नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे लोगों का नजरिया बदला।

आज आसपास के ग्रामीण कैफे में आते हैं, महिलाओं से बातचीत करते हैं और उन्हें सामान्य जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

स्थानीय युवाओं का मानना है कि Tungal Nature Cafe दूसरे लोगों को भी हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।


Tungal Nature Cafe बना पुनर्वास का मॉडल

छत्तीसगढ़ सरकार लंबे समय से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर काम कर रही है। आर्थिक सहायता, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।

लेकिन Tungal Nature Cafe इन प्रयासों को नई दिशा देता है। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि सम्मान और समाज से दोबारा जुड़ने का अवसर देता है।

अधिकारियों के मुताबिक, महिलाओं की रुचि खाना बनाने और हॉस्पिटैलिटी में थी। इसी वजह से समुदाय की भागीदारी से यह पहल शुरू की गई।


बदलता हुआ बस्तर

एक समय था जब बस्तर का नाम सुनते ही डर और असुरक्षा की तस्वीर सामने आती थी। लेकिन अब यहां सड़कें बन रही हैं, स्कूल खुल रहे हैं, मोबाइल नेटवर्क पहुंच रहा है और पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Tungal Nature Cafe इस नए बस्तर की जीवंत तस्वीर बन चुका है।

यह सिर्फ एक कैफे नहीं, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिन्होंने बंदूक की जगह शांति को चुना।


शांति का संदेश दे रही हर कप कॉफी

Tungal Nature Cafe की सबसे बड़ी ताकत इसकी प्रेरणादायक कहानी है। यहां परोसी जाने वाली हर कप कॉफी यह संदेश देती है कि कोई भी व्यक्ति हमेशा हिंसा में फंसा नहीं रह सकता।

अगर अवसर, भरोसा और सम्मान मिले तो जिंदगी बदल सकती है।

जिन हाथों में कभी हथियार थे, वही हाथ अब गर्मजोशी से मेहमानों का स्वागत कर रहे हैं। यह कैफे आने वाले समय में देशभर के लिए पुनर्वास और सामाजिक बदलाव का मॉडल बन सकता है।

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Tungal Nature Cafe केवल सुकमा का एक छोटा कैफे नहीं है, बल्कि यह शांति, उम्मीद और बदलाव की नई कहानी है। बस्तर की धरती पर हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन अपनाने वाली महिलाओं की यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रही है।

यह कैफे साबित करता है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति नई शुरुआत कर सकता है। आने वाले वर्षों में Tungal Nature Cafe छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में पुनर्वास और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन सकता है।

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