Supreme Court ordered — यह दो शब्द आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 19 मई 2026 को एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले में अधिकारियों को पागल, लाइलाज बीमार और खतरनाक आवारा कुत्तों को इच्छामृत्यु (euthanasia) देने की अनुमति दे दी।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने नवंबर 2025 के पुराने आदेश को बहाल रखते हुए उसमें बदलाव की माँग करने वाली सभी याचिकाएँ खारिज कर दीं।
यह फैसला देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और बच्चों-बुज़ुर्गों पर होने वाले हमलों की पृष्ठभूमि में आया है।
यह भी पढ़ें: NEET 2026 Paper Leak: एक शिक्षक की हिम्मत ने बदल दिया खेल
📢 हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें और पाएं हर बड़ी खबर सबसे पहले: 👉 यहाँ क्लिक करें और Join करें
Supreme Court Ordered — 5 प्रमुख आदेश जो बदलेंगे तस्वीर
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
1. खतरनाक कुत्तों की इच्छामृत्यु की अनुमति अधिकारी Animal Birth Control Rules के तहत पागल, लाइलाज बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक और आक्रामक कुत्तों को euthanasia दे सकते हैं।
2. सार्वजनिक स्थानों पर कुत्ते नहीं छोड़े जाएँगे अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से उठाए गए कुत्तों को नसबंदी या टीकाकरण के बाद वहीं वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
3. हर जिले में ABC सेंटर अनिवार्य राज्यों को निर्देश दिया गया है कि हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यात्मक Animal Birth Control (ABC) केंद्र स्थापित किया जाए।
4. Anti-Rabies वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित हो अधिकारियों को एंटी-रेबीज़ वैक्सीन और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।
5. सरकारी अधिकारियों को FIR से सुरक्षा कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कार्रवाई करने वाले नगर पालिका और राज्य अधिकारियों को FIR या अन्य दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया गया है।
📢 ताज़ा खबरों से जुड़े रहें — अभी Join करें: 👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
आवारा कुत्तों के हमलों के चौंकाने वाले आँकड़े
Supreme Court ordered के इस फैसले की पृष्ठभूमि में देश के डरावने आँकड़े हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, भारत में 2022 में 21,89,909 कुत्ते के काटने के मामले दर्ज हुए। यह संख्या 2023 में बढ़कर 30,52,521 और 2024 में 37,15,713 हो गई।
रेबीज़ से मौतों में भी भारी वृद्धि हुई — 2022 में 21, 2023 में 50 और 2024 में 54 मौतें हुईं। WHO के अनुसार भारत में विश्व की 36% रेबीज़ मौतें होती हैं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि देश के सबसे व्यस्त IGI एयरपोर्ट पर भी कुत्ते के काटने की घटनाएँ हुईं। एक जर्मन पर्यटक को गुजरात के सूरत में काटा गया, जिससे देश की छवि पर बुरा असर पड़ा।
पुराना आदेश क्या था? नवंबर 2025 की पृष्ठभूमि
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि आवारा कुत्तों को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थानों से हटाकर आश्रयों में ले जाया जाए। यह भी स्पष्ट किया गया था कि ऐसे कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा।
सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया था, सिवाय निर्धारित स्थानों के।
अगस्त 2025 में कोर्ट ने सभी फ्री-रेंजिंग कुत्तों को लेकर निर्देश जारी किए थे और नवंबर 2025 में स्कूलों, अस्पतालों और संस्थागत क्षेत्रों से कुत्ते हटाने के आदेश दिए थे।
NGO और डॉग लवर्स की याचिका क्यों हुई खारिज?
कई NGO और डॉग प्रेमी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पुराने आदेश में बदलाव की माँग की थी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार में बिना कुत्ते के हमले के डर के सार्वजनिक स्थानों पर घूमने का अधिकार भी शामिल है।
कोर्ट ने यह भी कहा, “राज्य एक मूक दर्शक नहीं रह सकता जहाँ मानव जीवन के लिए रोके जा सकने वाले खतरे उन सांविधिक तंत्रों के बावजूद बढ़ते रहें जो इन्हें नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं।”
कोर्ट ने राज्य सरकारों की उदासीनता पर भी कड़ी टिप्पणी की।
📢 हर खबर सबसे पहले आपके WhatsApp पर: 👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Supreme Court Ordered — राज्यों को Compliance Report देनी होगी
Supreme Court ordered के इस फैसले में राज्यों की जवाबदेही भी तय की गई है।
मुख्य सचिवों को 7 अगस्त तक अपने क्षेत्र के उच्च न्यायालयों में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इसके बाद 17 नवंबर तक एकीकृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जानी है।
NHAI को राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा जानवरों की समस्या से निपटने के लिए एक समन्वित निगरानी तंत्र बनाने और विशेष वाहन तैनात करने का निर्देश दिया गया है।
राज्यों को लगातार अनुपालन न करने पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
छत्तीसगढ़ पर क्या होगा असर — रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, दुर्ग?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का सीधा असर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों पर भी पड़ेगा।
रायपुर: राजधानी रायपुर में आवारा कुत्तों की समस्या वर्षों से बनी हुई है। अस्पताल परिसरों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड क्षेत्रों से अब इन्हें हटाना अनिवार्य होगा।
भिलाई: इस्पात नगरी भिलाई में भी आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएँ सामने आती रही हैं। नगर निगम को अब तत्काल ABC सेंटर की व्यवस्था करनी होगी।
बिलासपुर और दुर्ग: इन शहरों में भी नगर पालिकाओं पर अब कोर्ट का सीधा दबाव होगा। 7 अगस्त तक रिपोर्ट देनी होगी।
छत्तीसगढ़ सरकार को हर जिले में ABC सेंटर की स्थापना के साथ-साथ anti-rabies vaccine की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।
📢 छत्तीसगढ़ की हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं: 👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
न्याय और सुरक्षा की जीत — Supreme Court Ordered का संदेश
Supreme Court ordered का यह ऐतिहासिक फैसला लाखों नागरिकों — खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और महिलाओं — के लिए एक बड़ी राहत है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें बिना भय के सार्वजनिक स्थानों पर चलने का अधिकार भी शामिल है।
अब देखना होगा कि छत्तीसगढ़ सहित देश भर के राज्य इस आदेश का कितनी तेज़ी और ईमानदारी से पालन करते हैं। रायपुर, भिलाई, बिलासपुर और दुर्ग की नगर पालिकाओं के सामने यह एक बड़ी परीक्षा है।
