Tiger Skin Smuggling मामले में छत्तीसगढ़ के बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व से एक बड़े अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। संयुक्त कार्रवाई में अब तक तीन बाघों की खाल बरामद की गई है, जबकि सात आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वन विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस गिरोह ने पांच बाघों का शिकार किया था। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाघों की वास्तविक संख्या की पुष्टि फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
📢 Join 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Tiger Skin Smuggling मामले में कैसे हुआ खुलासा?
इस पूरे ऑपरेशन को इंद्रावती टाइगर रिजर्व, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB), राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड, महाराष्ट्र वन विभाग, छत्तीसगढ़ पुलिस, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।
कार्रवाई छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से लगे इलाकों में की गई। शुरुआत में दो बाघों की खाल बरामद हुई थी। बाद में गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर कई स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां से तीसरी खाल भी बरामद कर ली गई।
Tiger Skin Smuggling जांच में पांच बाघों के शिकार की आशंका
जांच एजेंसियों को संदेह है कि गिरोह ने पांच बाघों का शिकार कर उनकी खाल की तस्करी की हो सकती है। हालांकि वन विभाग ने कहा है कि अभी इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) अरुण पांडेय ने बताया कि जब्त की गई तीनों खालों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि ये खालें इंद्रावती टाइगर रिजर्व की हैं या किसी अन्य संरक्षित क्षेत्र की।
यह भी पढ़ें: Chhattisgarh High Court School Prayer: सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थना पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
सात आरोपी गिरफ्तार, पुलिस कांस्टेबल भी निकला गिरोह का सदस्य
Tiger Skin Smuggling मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों में महाराष्ट्र पुलिस का एक कांस्टेबल भी शामिल है, जिसे पहले राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
इसके अलावा एक होमगार्ड जवान की गिरफ्तारी भी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरफ्तारी से संकेत मिलता है कि तस्करी का नेटवर्क काफी संगठित और कई राज्यों तक फैला हुआ हो सकता है।
पैंगोलिन के शल्क भी बरामद, वन्यजीव तस्करी का बड़ा नेटवर्क
जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से पैंगोलिन (सालख) के शल्क भी बरामद किए गए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि गिरोह केवल बाघों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि कई संरक्षित वन्यजीवों की अवैध तस्करी में भी शामिल था।
वन विभाग अब डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के लिए क्यों गंभीर है यह मामला?
इंद्रावती टाइगर रिजर्व लंबे समय से बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए संरक्षण प्रयासों का केंद्र रहा है।
यदि वैज्ञानिक जांच में यह पुष्टि होती है कि बरामद खालें इसी रिजर्व के बाघों की हैं, तो यह संरक्षण अभियान के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। वन अधिकारियों के अनुसार इंद्रावती, महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा वाला इलाका एक महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर है।
हाल के वर्षों में नक्सली प्रभाव कम होने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के कारण इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ी है, जिससे इस गिरोह के खिलाफ समय रहते कार्रवाई संभव हो सकी।
जांच अभी जारी, और गिरफ्तारी की संभावना
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक संदीप बल्गा ने कहा कि जांच अभी जारी है। फिलहाल यह बताना जल्दबाजी होगी कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं या कितने वन्यजीवों का शिकार किया गया।
वन विभाग का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Tiger Skin Smuggling मामले में इंद्रावती टाइगर रिजर्व से तीन बाघों की खाल की बरामदगी वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चेतावनी है। सात आरोपियों की गिरफ्तारी से एक बड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, लेकिन जांच अभी जारी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने बाघों का शिकार हुआ और इस नेटवर्क का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है।
