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Lakhpati Didi Campaign: GPM जिले ने लक्ष्य का 90% हासिल कर रचा नया कीर्तिमान

Lakhpati Didi Campaign के तहत छत्तीसगढ़ का गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का नया मॉडल बनकर उभरा है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत संचालित इस अभियान में जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के निर्धारित लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल कर उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती आय, आत्मनिर्भरता और मजबूत होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमाण मानी जा रही है।

राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल परिवार तक सीमित न रखकर आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है। इसी दिशा में Lakhpati Didi Campaign लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहा है।

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Lakhpati Didi Campaign में GPM जिले की बड़ी उपलब्धि

वित्तीय वर्ष 2025-26 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को 10,124 लखपति दीदी तैयार करने का लक्ष्य मिला था। अब तक 9,095 महिलाएं इस लक्ष्य को प्राप्त कर चुकी हैं, जो कुल लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है।

यह उपलब्धि जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान और स्वयं सहायता समूहों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। इससे जिले की हजारों महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच से महिलाओं को मिला संबल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनें और राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण, विपणन सुविधाएं और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को मिल रहा है।

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Lakhpati Didi Campaign से बढ़ी महिलाओं की आय

जिले में वर्तमान समय में 6,010 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों को औसतन 1.92 लाख रुपये प्रति समूह का ऋण उपलब्ध कराया गया है।

इस वित्तीय सहायता से कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। इससे हजारों महिलाओं की नियमित आय में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।


बिहान मिशन की भूमिका रही अहम

Lakhpati Didi Campaign की सफलता में बिहान मिशन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

महिलाओं को केवल ऋण उपलब्ध कराने तक ही सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें उद्यमिता विकास, कौशल प्रशिक्षण, बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने और उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

इसी कारण जिले की बड़ी संख्या में महिलाएं आज सफल उद्यमी बनकर अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं।


स्वयं सहायता समूहों से मजबूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था

स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

महिलाएं अब कृषि आधारित व्यवसाय, डेयरी, बकरी पालन, खाद्य उत्पाद निर्माण, सिलाई, हस्तशिल्प और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों के जरिए अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं।

इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत आधार तैयार हुआ है।


महिलाओं में बढ़ा आत्मविश्वास और नेतृत्व

Lakhpati Didi Campaign ने केवल आर्थिक बदलाव नहीं किया, बल्कि महिलाओं में नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी विकसित की है।

आज कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों का सफल संचालन कर रही हैं और अन्य महिलाओं को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे सामाजिक बदलाव भी तेजी से दिखाई दे रहा है।


Lakhpati Didi Campaign छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी अभियान बन चुका है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले द्वारा 90 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार, जिला प्रशासन और बिहान मिशन के संयुक्त प्रयास ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। आने वाले समय में यह अभियान आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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