Ramgarh Mahotsav 2026 के समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मंगलवार को सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ पहुंचे। उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मानी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा और प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का अवलोकन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत है, जिसका संरक्षण और संवर्धन सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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समारोह में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
Ramgarh Mahotsav 2026: सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं का किया अवलोकन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीताबेंगरा गुफा का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। यह गुफा विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध है।
इसके साथ ही उन्होंने जोगीमारा गुफा में मौजूद प्राचीन शिलालेखों और भित्तिचित्रों का भी अवलोकन किया। इतिहासकार इन गुफाओं को भारतीय इतिहास, स्थापत्य और चित्रकला की अमूल्य धरोहर मानते हैं।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर मुख्यमंत्री का संदेश
Ramgarh Mahotsav 2026 के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक संसाधनों से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि यहां की सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशेष पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें प्रदेश की ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत को करीब से जान सकें और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलें।
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Ramgarh Mahotsav 2026: कालिदास और मेघदूतम् से जुड़ा है रामगढ़
रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय साहित्य और इतिहास में विशेष महत्व रखती हैं।
मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी प्रसिद्ध कृति ‘मेघदूतम्’ की रचना की थी। इसी ऐतिहासिक और साहित्यिक स्मृति को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव आयोजित किया जाता है।
लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा का प्राकृतिक रंगमंच तथा जोगीमारा गुफा की दूसरी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा इस स्थल को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाती है।
हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग भी बनी आकर्षण का केंद्र
रामगढ़ की एक और प्रमुख पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची यह सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इस सुरंग का निर्माण हुआ। इसके दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं पूरे क्षेत्र को और अधिक ऐतिहासिक तथा रहस्यमयी स्वरूप प्रदान करती हैं। रामगढ़ का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।
Ramgarh Mahotsav 2026 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत को नई पहचान देने का महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश स्पष्ट है कि इन धरोहरों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। Ramgarh Mahotsav 2026 के माध्यम से राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी लगातार प्रयास कर रही है।
