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Pensioners DA Issue: धारा 49(6) हटाने की मांग तेज, पेंशनरों ने रैली निकालकर प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

Pensioners DA Issue एक बार फिर चर्चा में है। मध्यप्रदेश के बालाघाट में प्रोग्रेसिव पेंशनर संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में पेंशनरों ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) को हटाने की मांग को लेकर बैठक की, रैली निकाली और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। पेंशनरों का कहना है कि इस धारा के कारण उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में कम महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा है, जिससे वर्षों से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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Pensioners DA Issue: आखिर क्या है पूरा मामला?

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का गठन वर्ष 2000 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत हुआ था। पेंशनरों का कहना है कि अधिनियम की धारा 49(6) अब भी लागू है, जबकि दोनों राज्यों का गठन हुए 26 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

प्रोग्रेसिव पेंशनर संघ का दावा है कि इसी प्रावधान के कारण पेंशनरों को महंगाई भत्ते में नियमित कर्मचारियों के बराबर लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आय प्रभावित हो रही है।


पेंशनरों को कैसे हो रहा आर्थिक नुकसान?

प्रोग्रेसिव पेंशनर संघ के जिलाध्यक्ष ए.एल. मोहारे ने बताया कि पेंशनरों को मिलने वाला महंगाई भत्ता नियमित कर्मचारियों की तुलना में काफी कम है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यह अंतर उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाल रहा है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकारों से धारा 49(6) हटाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।


Pensioners DA Issue पर पेंशनरों ने निकाली रैली

मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में पेंशनरों ने पहले बैठक कर अपनी रणनीति बनाई। इसके बाद शहर में रैली निकालकर प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा गया।

ज्ञापन में मांग की गई कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) को समाप्त किया जाए, ताकि पेंशनरों को भी नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ते का पूरा लाभ मिल सके।

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अन्य राज्यों का दिया उदाहरण

पेंशनर संघ का कहना है कि उत्तर प्रदेश से अलग बने उत्तराखंड, बिहार से बने झारखंड और आंध्र प्रदेश से बने तेलंगाना में इस तरह का कोई बाध्यकारी प्रावधान लागू नहीं है।

संघ के अनुसार केवल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच यह व्यवस्था अभी भी लागू है, जिसके कारण दोनों राज्यों के पेंशनरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पेंशनरों का तर्क है कि जब अन्य राज्यों में ऐसी व्यवस्था समाप्त हो चुकी है, तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मामले में भी इस धारा की समीक्षा की जानी चाहिए।


26 साल बाद भी नहीं हुआ समाधान

पेंशनरों ने कहा कि राज्य पुनर्गठन को 26 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उनकी प्रमुख मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। उनका कहना है कि समय के साथ वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हुईं, महंगाई भत्ता बढ़ा, लेकिन धारा 49(6) से जुड़ा मुद्दा अभी भी लंबित है।

उन्होंने सरकार से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेने और पेंशनरों के हित में आवश्यक संशोधन करने की मांग की।


प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

रैली के समापन के बाद प्रोग्रेसिव पेंशनर संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) हटाने तथा पेंशनरों को महंगाई भत्ते में समान लाभ देने की मांग की गई।

संघ ने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेकर लंबे समय से लंबित समस्या का समाधान करेगी।


Pensioners DA Issue केवल महंगाई भत्ते का मामला नहीं, बल्कि हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आर्थिक हितों से जुड़ा विषय है। पेंशनरों का कहना है कि राज्य पुनर्गठन के 26 वर्ष बाद भी धारा 49(6) लागू रहने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि इस लंबे समय से लंबित मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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