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PWD Chhattisgarh: निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सख्ती

रायपुर, 5 नवंबर 2026। PWD Chhattisgarh ने सड़क, पुल और भवन निर्माण की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए विभागीय अभियंताओं को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। रायपुर में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला ‘निर्माण मंथन’ में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने अभियंताओं से गुणवत्ता, समयबद्धता और आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता देने की अपील की। कार्यशाला में निर्माण प्रक्रिया से लेकर रखरखाव और निविदा प्रणाली तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

PWD Chhattisgarh को बताया विकास का ग्रोथ इंजन

रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में अरुण साव ने कहा कि विभागीय अभियंता विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के शिल्पकार हैं। उन्हें अपनी जिम्मेदारी गंभीरता और सक्रियता से निभाते हुए प्रदेश की अधोसंरचना को मजबूत करना होगा।

उन्होंने लोक निर्माण विभाग को राज्य के विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ बताया। उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद पिछले 26 वर्षों में हुए बड़े बदलावों में विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लोक निर्माण विभाग ने सड़क, पुल और भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में योगदान दिया है।

अरुण साव ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद प्रदेश में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल है। ऐसे में अभियंताओं को अपनी क्षमता और दक्षता का उपयोग करते हुए विकास कार्यों में तेजी लानी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को नई तकनीकों और आधुनिक मशीनरी के अनुरूप काम करने, खुद को अपडेट रखने तथा निर्माण के तय मानकों का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि खराब या त्रुटिपूर्ण निर्माण से पूरे विभाग की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।

निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करना दोनों जरूरी हैं। अभियंताओं को केवल पुराने तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय अपने तकनीकी ज्ञान और विवेक से बेहतर कार्यप्रणाली अपनानी चाहिए।

उन्होंने कार्यालय के साथ-साथ निर्माण स्थलों पर भी सक्रिय रहने की बात कही। उनके अनुसार, फील्ड में नियमित निगरानी और निर्धारित मानकों का पालन होने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।

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फील्ड और फाइल दोनों के काम दुरुस्त रखने के निर्देश

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने अभियंताओं से सकारात्मक सोच और टीमवर्क के साथ काम करने को कहा। उन्होंने कार्यशाला में मिली तकनीकी जानकारी को वास्तविक निर्माण कार्यों में लागू करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अभियंताओं को देश में बने उत्कृष्ट सड़कों, पुलों और भवनों का अध्ययन करना चाहिए। एक्सपोजर विजिट के माध्यम से नई तकनीकों और बेहतर निर्माण पद्धतियों को समझकर विभागीय कार्यों में अपनाया जा सकता है।

सचिव ने ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के साथ हुए अनुबंधों की शर्तों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश भी दिए। नए निर्माण प्रस्ताव तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने की बात कही।

उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट्स को दूर करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों से जुड़ी फाइलों और फील्ड की गतिविधियों, दोनों का रिकॉर्ड और प्रबंधन दुरुस्त होना चाहिए।

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के बाद ही भुगतान

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी ने निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग ने सड़कों की परफॉर्मेंस गारंटी अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी है।

उन्होंने अभियंताओं से कहा कि निर्माण सामग्री और तैयार निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की कड़ाई से जांच की जाए। गुणवत्ता परीक्षण और निर्धारित मानकों के पालन के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि अभियंताओं को केवल कंसल्टेंट या निर्माण एजेंसियों की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें स्वयं तकनीकी जांच कर इंजीनियरिंग मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। सड़क निर्माण में मजबूती के लिए फ्लाई-ऐश के उचित उपयोग की जानकारी भी दी गई।

अभियंताओं को इन तकनीकों और प्रणालियों का प्रशिक्षण

‘निर्माण मंथन’ कार्यशाला में मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता और उप अभियंता शामिल हुए। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अभियंताओं ने तकनीकी विषयों पर चर्चा की।

प्रशिक्षण में प्रमुख रूप से इन विषयों को शामिल किया गया:

  • रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट और व्हाइट टॉप कंक्रीट सड़क निर्माण तकनीक।
  • फ्लेक्सिबल पेवमेंट और सड़क निर्माण की गुणवत्ता।
  • पुल निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण।
  • भवन निर्माण तथा भवनों का रखरखाव।
  • सर्वेक्षण और निर्माण कार्यों का प्राक्कलन।
  • निविदा दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया।
  • वर्क्स एंड अकाउंट्स मॉनिटरिंग इंटीग्रेटेड सिस्टम (WAMIS)।
  • GePNIC के माध्यम से सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट और पंजीयन प्रक्रिया।

सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी ने पुल निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया। कार्यपालन अभियंता पी.के. गुप्ता ने सर्वेक्षण एवं प्राक्कलन की जानकारी दी। अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव ने निविदा दस्तावेजों की प्रक्रिया समझाई।

छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम (CGRIDCL) के अतिरिक्त प्रबंध संचालक शशांक पाण्डेय ने WAMIS, GePNIC और पंजीयन प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण दिया।

बेहतर अधोसंरचना के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ाने की पहल

‘निर्माण मंथन’ कार्यशाला का उद्देश्य विभागीय अभियंताओं को निर्माण की आधुनिक तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से अवगत कराना था। PWD Chhattisgarh में गुणवत्ता जांच, पांच वर्ष की परफॉर्मेंस गारंटी और फील्ड निगरानी पर दिया गया जोर निर्माण कार्यों को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

प्रदेश में मजबूत सड़कें, सुरक्षित पुल और टिकाऊ सरकारी भवन विकसित करने के लिए तकनीकी दक्षता के साथ जवाबदेही भी जरूरी है। PWD Chhattisgarh की इस कार्यशाला में अरुण साव और विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और नियमित निगरानी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन प्रदेश की अधोसंरचना को मजबूत करने में मददगार हो सकता है।

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