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President Droupadi Murmu Bastar Visit: नक्सलवाद से मुक्ति, विकास और आदिवासी समाज पर राष्ट्रपति का बड़ा संदेश

President Droupadi Murmu Bastar Visit के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलकर विकास की राह पर आगे बढ़ने की बात कही। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर दशहरा महोत्सव 2026 के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि जनजातीय समुदायों के युवा विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने समान अवसर, जनजातीय उद्यमियों को आर्थिक सहायता, बाजार तक पहुंच और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया।

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नक्सलवाद से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हुआ है और अब विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

उनका संदेश बस्तर के भविष्य और क्षेत्र में विकास की संभावनाओं पर केंद्रित रहा। बस्तर लंबे समय से नक्सलवाद की चुनौती से प्रभावित रहा है। ऐसे में क्षेत्र में शांति, विकास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है।

राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि बदलते हालात में जनजातीय समाज के युवाओं को देश की प्रगति में योगदान देने के अधिक अवसर मिलेंगे।

2047 तक विकसित भारत में आदिवासी युवाओं की भूमिका

President Droupadi Murmu Bastar Visit का एक प्रमुख संदेश जनजातीय युवाओं की भागीदारी से जुड़ा रहा। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि आदिवासी समुदाय के युवा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में सक्रिय योगदान देंगे।

उन्होंने समान विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना और जनजातीय समुदायों को आगे बढ़ने के अवसर मिलना इस लक्ष्य के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

बस्तर जैसे क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने से युवाओं के लिए नई संभावनाएं तैयार हो सकती हैं।

जनजातीय उद्यमियों को आर्थिक सहायता और बाजार से जोड़ने पर जोर

राष्ट्रपति ने जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की।

स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने से जनजातीय समुदायों की आजीविका मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इससे पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम और समुदायों के आर्थिक अवसरों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समान विकास के ऐसे प्रयास विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक होंगे।

बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार का महत्व

बस्तर दशहरा महोत्सव क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह उत्सव पूरे क्षेत्र के जनजातीय समुदायों को एक साथ लाता है।

उन्होंने मुरिया दरबार को लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिबिंब बताया। इस पारंपरिक मंच पर लोग अपने नेताओं के सामने समस्याएं, चिंताएं और शिकायतें रखते हैं। यह परंपरा स्थानीय समाज और पारंपरिक नेतृत्व के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है।

सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार के दौरान राष्ट्रपति ने मांझी, चालकी, पुजारियों और अन्य पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की तथा उनकी बातें सुनीं।

मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा, बच्चों से भी की मुलाकात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर जगदलपुर पहुंचीं। दिन में उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

इसके बाद उन्होंने सिरहासार भवन में मुरिया दरबार में हिस्सा लिया। लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा महोत्सव से जुड़े विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और स्थानीय स्कूली बच्चों से बातचीत भी की।

कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश के कई मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

जंगल और पहाड़ बचाने की राष्ट्रपति की अपील

राष्ट्रपति ने क्षेत्र के जंगलों और पहाड़ियों को सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन भोजन, पानी और जीवन के लिए आवश्यक दूसरी जरूरतें पूरी करते हैं।

उन्होंने प्रकृति का संरक्षण प्रत्येक समुदाय की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया। बस्तर की प्राकृतिक संपदा और वन क्षेत्र स्थानीय जीवन, आजीविका तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

राष्ट्रपति का संदेश विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की जरूरत को भी रेखांकित करता है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी से प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सतत विकास के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।

विकास, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण पर जोर

President Droupadi Murmu Bastar Visit बस्तर की जनजातीय संस्कृति, विकास की संभावनाओं और स्थानीय समुदायों की भूमिका को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा। राष्ट्रपति ने नक्सलवाद से आगे बढ़ने, आदिवासी युवाओं को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ने, उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और प्रकृति की रक्षा करने का संदेश दिया। अब इन लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने में सरकारी प्रयासों, स्थानीय संस्थाओं और समुदायों की भागीदारी अहम रहेगी।

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