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Droupadi Murmu Chhattisgarh Visit: रायपुर और बस्तर में खास कार्यक्रम

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा गुरुवार, 22 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। इस दौरान वह रायपुर में धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होंगी और बस्तर में आदिवासी परंपराओं से जुड़े आयोजनों में हिस्सा लेंगी। राष्ट्रपति के दौरे में माता साहिब हसी देवी की 200वीं जयंती पर स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी करना भी शामिल है।

राष्ट्रपति का यह दौरा छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरुवार को रायपुर में कार्यक्रमों के बाद शुक्रवार, 23 अक्टूबर को वह जगदलपुर पहुंचेंगी। वहां मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन और ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित है।

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माता साहिब हसी देवी की 200वीं जयंती पर विशेष सिक्का

Droupadi Murmu Chhattisgarh Visit के दौरान रायपुर में माता साहिब हसी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन होगा। राष्ट्रपति गुरुवार को 200 रुपये का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी करेंगी।

माता साहिब हसी देवी शदाणी दरबार की पांचवीं आध्यात्मिक प्रमुख थीं। उनकी 200वीं जयंती पर जारी होने वाला स्मारक सिक्का और डाक टिकट उनके आध्यात्मिक योगदान और विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है।

स्मारक सिक्के और डाक टिकट ऐतिहासिक व्यक्तित्वों, महत्वपूर्ण अवसरों तथा सांस्कृतिक विरासत को याद रखने का माध्यम होते हैं। इस आयोजन से माता साहिब हसी देवी से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

रायपुर में नुआखाई महोत्सव में शामिल होंगी राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित नुआखाई महोत्सव में भी शामिल होंगी। नुआखाई नई फसल के स्वागत और कृषि परंपरा से जुड़ा प्रमुख त्योहार है।

यह पर्व विशेष रूप से पश्चिमी ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें नई फसल के प्रति आभार व्यक्त करने और सामुदायिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का विशेष महत्व है।

छत्तीसगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति की भागीदारी राज्य की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देने के रूप में देखी जा रही है। नुआखाई जैसे त्योहार कृषि, प्रकृति और सामुदायिक जीवन के बीच गहरे संबंध को दर्शाते हैं।

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बस्तर में मां दंतेश्वरी मंदिर के करेंगी दर्शन

दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार, 23 अक्टूबर को राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी, जो बस्तर जिले का मुख्यालय है। यहां वह प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन करेंगी।

मां दंतेश्वरी मंदिर बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। बस्तर दशहरा की परंपराओं में भी देवी दंतेश्वरी की केंद्रीय भूमिका है। यह उत्सव अपनी विशिष्ट रस्मों और स्थानीय परंपराओं के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है।

राष्ट्रपति का मंदिर दर्शन कार्यक्रम बस्तर की धार्मिक विरासत और स्थानीय आस्था से जुड़े महत्व को सामने लाएगा।

मुरिया दरबार में आदिवासी प्रतिनिधियों से संवाद

Droupadi Murmu Chhattisgarh Visit का एक प्रमुख कार्यक्रम जगदलपुर में आयोजित होने वाला मुरिया दरबार है। राष्ट्रपति यहां बस्तर के विभिन्न जनजातीय समूहों के प्रमुखों और प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी।

मुरिया दरबार बस्तर दशहरा के समापन से जुड़ी एक ऐतिहासिक परंपरा है। इस आयोजन में अलग-अलग जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि एकत्र होते हैं और स्थानीय समस्याओं तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रशासन के सामने रखते हैं।

इस संवाद का उद्देश्य स्थानीय समुदायों की चिंताओं को सामने लाना और उनके समाधान के लिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना रहा है। राष्ट्रपति की इस कार्यक्रम में भागीदारी से आदिवासी समुदायों की परंपराओं और उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिलने की उम्मीद है।

बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार का ऐतिहासिक महत्व

बस्तर दशहरा को दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले दशहरा उत्सवों में गिना जाता है। इसकी अवधि लगभग 75 दिनों की होती है और यह सामान्य दशहरा आयोजनों से अलग स्थानीय रीति-रिवाजों तथा धार्मिक परंपराओं पर आधारित है।

मुरिया दरबार की परंपरा 18वीं शताब्दी से जुड़ी मानी जाती है। स्वतंत्रता से पहले विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रमुख तत्कालीन बस्तर रियासत के शासक और स्थानीय प्रशासन के सामने अपने मुद्दे रखते थे।

आजादी के बाद रियासत के शासक की जगह जिला प्रशासन ने यह भूमिका संभाली और समुदायों की समस्याएं सुनने की परंपरा जारी रही। इस तरह मुरिया दरबार केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज और प्रशासन के बीच संवाद का ऐतिहासिक मंच भी है।

Droupadi Murmu Chhattisgarh Visit के दौरान रायपुर में स्मारक सिक्का जारी करने और नुआखाई महोत्सव में भाग लेने से लेकर जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर के दर्शन तथा मुरिया दरबार में जनजातीय प्रतिनिधियों से संवाद तक कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम निर्धारित हैं। यह दो दिवसीय दौरा छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आदिवासी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर होगा। अब सभी की नजर राष्ट्रपति के इन कार्यक्रमों पर रहेगी।

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