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छत्तीसगढ़ में Open Jail की नई पहल

Open Jail यानी खुली जेल व्यवस्था को छत्तीसगढ़ सरकार जेल सुधार और कैदियों के सामाजिक पुनर्वास से जोड़कर आगे बढ़ाने जा रही है। 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर राज्य में छह नई ओपन जेलें शुरू करने की तैयारी है। यह पहल कैदियों को जेल की चारदीवारी से बाहर नियंत्रित तरीके से काम करने और धीरे-धीरे सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने का अवसर देगी।

नई व्यवस्था में पात्र कैदियों को दिन के समय उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार काम करने के लिए बाहर जाने की अनुमति होगी। उन्हें कृषि, निर्माण, सिलाई, हस्तशिल्प और स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिल सकता है। दिन का काम पूरा होने के बाद उन्हें शाम तक संबंधित जेल परिसर में वापस लौटना होगा।

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Open Jail में कैदियों को क्या सुविधा मिलेगी

Open Jail का मुख्य उद्देश्य केवल कैदियों को बाहर काम करने की अनुमति देना नहीं, बल्कि उन्हें कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से समाज में दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।

जेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था में राज्य के मौजूदा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ने की बात कही गई है। मॉडल में व्यावसायिक प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता को प्रमुखता दी जा रही है।

जगदलपुर सेंट्रल जेल में 50 अच्छे आचरण वाले कैदियों को इस व्यवस्था में शामिल करने की योजना बताई गई है। इनमें 25 पुरुष और 25 महिलाएं होंगी।

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कौन से कैदी होंगे पात्र?

Open Jail की सुविधा सभी बंदियों के लिए स्वतः उपलब्ध नहीं होगी। राज्य के गजट में निर्धारित पात्रता शर्तों के अनुसार कैदी की उम्र 30 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

इसके अलावा जेल में उसका आचरण अनुशासित और अच्छा होना जरूरी है। न्यूनतम 10 वर्ष या आजीवन कारावास की सजा पाने वाले पात्र बंदियों में से कम से कम सात वर्ष की सजा पूरी करना भी आवश्यक शर्तों में शामिल है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे कैदियों को नियंत्रित स्वतंत्रता देना है, जिनके व्यवहार और रिकॉर्ड से यह संकेत मिलता हो कि वे समाज में दोबारा जिम्मेदारी के साथ जीवन शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

किन कैदियों को नहीं मिलेगा मौका

सरकार ने Open Jail व्यवस्था के लिए कुछ स्पष्ट अपात्रता श्रेणियां भी निर्धारित की हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुल 11 श्रेणियों के कैदियों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है।

इनमें राज्य या सशस्त्र बलों के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराए गए लोग, मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदले जाने वाले मामलों के दोषी तथा IPC की 44 और BNS की 46 धाराओं के तहत दोषी ठहराए गए कैदी शामिल हैं।

इस तरह ओपन जेल में प्रवेश का फैसला केवल सजा की अवधि पर नहीं, बल्कि अपराध की प्रकृति, आचरण और निर्धारित पात्रता मानकों के आधार पर होगा।

यह भी पढ़ें: बिलासपुर डिटेंशन सेंटर का मामला

छह Open Jail की क्षमता कितनी होगी?

राज्य में प्रस्तावित सुविधाओं की क्षमता अलग-अलग रखी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

  • बेमेतरा: 200 पुरुष बंदी
  • दुर्ग: 50 पुरुष बंदी
  • जगदलपुर: 50 बंदी, 25 पुरुष और 25 महिलाएं
  • रायपुर: 25 महिला बंदी
  • अंबिकापुर: 15 पुरुष बंदी
  • बिलासपुर: 10 बंदी, 5 पुरुष और 5 महिलाएं

बेमेतरा के पथर्रा गांव में 200 क्षमता वाली ओपन जेल के निर्माण का काम पूरा होने और संचालन की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल सरकारी हलफनामे में भी दी गई थी।

जेलों में बढ़ती भीड़ की चुनौती

छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्था लंबे समय से क्षमता से अधिक बंदियों की चुनौती का सामना कर रही है। 21 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की 33 जेलों में 14,383 की क्षमता के मुकाबले 18,700 से अधिक कैदी हैं। राज्य में पांच सेंट्रल जेल, 20 जिला जेल और आठ उप-जेल हैं।

हालांकि ओपन जेलों की क्षमता कुल बंदी संख्या की तुलना में सीमित है, लेकिन ऐसी व्यवस्था लंबे समय से सजा काट रहे और पात्र कैदियों के पुनर्वास में अलग भूमिका निभा सकती है।

पुनर्वास और रोजगार पर जोर

Open Jail मॉडल में जेल से बाहर काम करने की अनुमति को नियंत्रित स्वतंत्रता के साथ जोड़ा गया है। कैदियों को अपनी आजीविका के लिए काम करने, कौशल विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा, जबकि शाम को उन्हें निर्धारित परिसर में वापस लौटना होगा।

गांधी जयंती पर इस पहल की शुरुआत का उद्देश्य जेल व्यवस्था में सुधार और सामाजिक पुनर्वास के संदेश को सामने लाना है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्रता, निगरानी, रोजगार और पुनर्वास की व्यवस्था किस तरह लागू होती है।

छत्तीसगढ़ की Open Jail पहल जेल सुधार को केवल बंद रखने की व्यवस्था से आगे ले जाकर पुनर्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की कोशिश है। छह प्रस्तावित केंद्रों में पात्र और अनुशासित कैदियों को काम का अवसर मिलने से उनके समाज में पुनः स्थापित होने की प्रक्रिया को समर्थन मिल सकता है। साथ ही, जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की चुनौती के बीच यह मॉडल सुधारात्मक न्याय की दिशा में एक अलग व्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण रहेगा।

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