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Online Gambling Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने क्रिकेट सट्टेबाजी मामले में तीन आरोपियों की जमानत खारिज की

Online Gambling Case में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप सट्टेबाजी मामले के तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऑनलाइन जुआ एक संगठित अपराध (Organized Crime) है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।

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Online Gambling Case: हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि ऑनलाइन जुआ केवल एक सामान्य अपराध नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में संचालित होने वाला अपराध है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की गतिविधियां देश की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को जमानत देने का कोई उचित आधार नहीं बनता।

यह मामला छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 112(2) के तहत दर्ज किया गया है।


पुलिस जांच में कैसे हुआ खुलासा?

पुलिस को गश्त के दौरान गुप्त सूचना मिली थी कि एक सफेद कार में बैठे दो व्यक्ति वर्ष 2020 के क्रिकेट वर्ल्ड कप मैच के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी कर रहे हैं।

सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ के दौरान उन्होंने ऑनलाइन सट्टेबाजी में शामिल होने की बात स्वीकार की।

मोबाइल फोन की जांच में कई ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मिले। पुलिस ने इनका स्क्रीनशॉट लेकर जांच का हिस्सा बनाया।

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Online Gambling Case में क्या-क्या बरामद हुआ?

जांच के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए।

मुख्य आरोपी शैकी दरदा के पास से—

  • 8 मोबाइल फोन
  • 12 एटीएम कार्ड
  • 4 बैंक पासबुक
  • ₹14,100 नकद

बरामद किए गए।

दूसरे आरोपी प्रतीक कुमार वाधवानी के पास से—

  • 3 मोबाइल फोन
  • ₹10,500 नकद

बरामद हुए।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई बैंक खाते विभिन्न मोबाइल नंबरों से जुड़े थे, जिनके माध्यम से कथित रूप से ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े वित्तीय लेन-देन किए जा रहे थे।


अन्य आरोपियों के पास से भी मिला इलेक्ट्रॉनिक सामान

चार्जशीट के अनुसार आरोपी प्रकाशचंद मिरी से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।

वहीं धनंजय कुमार वैष्णव के पास से—

  • 16 मोबाइल फोन
  • 1 लैपटॉप
  • 1 इलेक्ट्रॉनिक नोटबुक
  • 1 राउटर

जब्त किया गया।

इसके अलावा आरोपी साकेत जगवानी के पास से—

  • 17 मोबाइल फोन
  • 2 लैपटॉप
  • 1 वाई-फाई राउटर

बरामद किए गए।


कोर्ट ने जमानत क्यों खारिज की?

हाईकोर्ट ने चार्जशीट, मोबाइल फोन से प्राप्त स्क्रीनशॉट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बरामदगी तथा बैंक खातों के बीच कथित लिंक को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री मामले की गंभीरता को दर्शाती है। इसलिए आरोपियों को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी और अंतिम निर्णय साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।


ऑनलाइन सट्टेबाजी पर बढ़ रही सख्ती

हाल के वर्षों में ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध बेटिंग नेटवर्क के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कार्रवाई तेज हुई है।

जांच एजेंसियां डिजिटल भुगतान, बैंक खातों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए संचालित नेटवर्क पर लगातार निगरानी रख रही हैं। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे मामलों में भविष्य की कानूनी कार्रवाई के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


Online Gambling Case में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े मामलों पर न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन जुआ एक संगठित अपराध है और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि, मामले का अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने और सभी साक्ष्यों की न्यायिक जांच के बाद ही होगा।

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