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Online Betting Fraud में तीन आरोपी गिरफ्तार

Online Betting Fraud मामले में ओडिशा के गंजाम जिले में पुलिस ने अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी किराए के मकान से कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग एप्लिकेशन को प्रमोट कर रहे थे और लोगों को अधिक रिटर्न का लालच देकर पैसे जमा करवाने के लिए प्रेरित करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के रामगढ़ निवासी 26 वर्षीय सत्रुघ्न कुमार पांडेय तथा छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी 30 वर्षीय धर्मदास माणिकपुरी और 30 वर्षीय जगदीश सेठी उर्फ सूरज के रूप में हुई है।

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Online Betting Fraud का नेटवर्क कैसे पकड़ा गया?

पुलिस को सूचना मिली थी कि गंजाम जिले के रंभा थाना क्षेत्र के अंतर्गत किराए के मकानों में कुछ लोग कथित रूप से ऑनलाइन बेटिंग एप्लिकेशन का संचालन और प्रचार कर रहे हैं। इसके बाद साइबर पुलिस ने संदिग्ध ठिकानों पर कार्रवाई की।

रिपोर्टों के अनुसार छापेमारी के दौरान दो लोगों को मौके से पकड़ा गया, जबकि कुछ संदिग्ध वहां से भाग निकले। बाद में मोबाइल नंबरों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने जगदीश सेठी को भी गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर लोगों को अधिक मुनाफे का झांसा देकर बेटिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा जमा करने के लिए प्रेरित करते थे। इस मामले में करीब ₹1 करोड़ के कथित फ्रॉड की जांच का भी उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है।

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Online Betting Fraud में 86 SIM और 78 कार्ड जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग सामग्री बरामद की। इसमें तीन लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, 86 SIM कार्ड, 78 ATM/डेबिट कार्ड और 16 बैंक पासबुक शामिल हैं।

इसके अलावा पुलिस ने एक मोटरसाइकिल और कई दस्तावेज भी जब्त किए हैं। बरामद सामान की बड़ी संख्या को देखते हुए जांच टीम कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और वित्तीय लेन-देन का पता लगाने में जुटी है।

पुलिस की प्रारंभिक डिजिटल जांच में अलग-अलग लोगों की पहचान और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी भी मिलने की बात सामने आई है। इसके साथ ही बेटिंग प्लेटफॉर्म के संदर्भ, लॉगिन क्रेडेंशियल और जमा-निकासी से संबंधित रिकॉर्ड मिलने की जानकारी दी गई है।

डिजिटल रिकॉर्ड से सामने आए अहम सुराग

जांच के दौरान जब्त मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों की प्रारंभिक जांच में ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े यूजर आईडी, पासवर्ड और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई है।

कुछ रिपोर्टों में Reddy Play 11, Hush 777, 100 Panel और Fairplay जैसे प्लेटफॉर्म के संदर्भ मिलने का उल्लेख है। हालांकि इन प्लेटफॉर्म के नाम डिजिटल जांच में सामने आने मात्र से किसी प्लेटफॉर्म की आपराधिक भूमिका सिद्ध नहीं होती।

पुलिस ने बरामद दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री को जांच का हिस्सा बनाया है। फोरेंसिक परीक्षण के बाद ही कथित नेटवर्क की वास्तविक संरचना और लेन-देन की पूरी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

Online Betting Fraud केस में आगे की जांच

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) और 66(D) के तहत केस दर्ज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार केस 19 सितंबर 2026 को दर्ज किया गया था।

अब जांच टीम जब्त मोबाइल, लैपटॉप, SIM कार्ड और बैंकिंग दस्तावेजों का फोरेंसिक परीक्षण कर रही है। इसके जरिए अन्य संभावित सहयोगियों, फरार संदिग्धों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

यह मामला अंतरराज्यीय साइबर अपराध और ऑनलाइन बेटिंग के नाम पर कथित वित्तीय धोखाधड़ी की जांच से जुड़ा है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

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Online Betting Fraud मामले में गंजाम पुलिस की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा अब डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन तक पहुंच गया है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी संख्या में SIM कार्ड, ATM कार्ड, बैंक पासबुक तथा डिजिटल उपकरणों की बरामदगी के बाद पुलिस अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है। फोरेंसिक रिपोर्ट और वित्तीय ट्रेल से इस कथित नेटवर्क की वास्तविक स्थिति और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में आगे जानकारी मिलने की संभावना है।

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