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Munshi Premchand Jayanti: दुर्ग के शासकीय महाविद्यालय में प्रेमचंद जयंती पर साहित्यिक आयोजन, विद्यार्थियों ने जाना यथार्थवादी लेखन का महत्व

दुर्ग, 2 अगस्त 2026। Munshi Premchand Jayanti के अवसर पर शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के हिंदी विभाग एवं पब्लिक स्पीकिंग सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के जीवन, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान, सामाजिक चेतना और उनके विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।


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Munshi Premchand Jayanti पर प्राचार्य ने विद्यार्थियों को दिया प्रेरक संदेश

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य व्यक्ति को संवेदनशील बनाता है और समाज के प्रति सोचने-समझने की शक्ति प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं सत्य, ईमानदारी, परिश्रम और मानवता का संदेश देती हैं। आज के युवाओं के लिए जरूरी है कि वे उनके साहित्य का अध्ययन करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं।

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Munshi Premchand Jayanti पर साहित्यिक योगदान और सामाजिक चेतना पर चर्चा

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिनेष सुराना ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान, यथार्थवादी लेखन, पत्रकारिता, ग्रामीण जीवन के चित्रण और सामाजिक चेतना पर विस्तार से अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद केवल लेखक नहीं, बल्कि समाज के सच्चे मार्गदर्शक थे। उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से गरीबी, शोषण, सामाजिक असमानता और मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

वहीं डॉ. रजनीश उमरे ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में थीं।


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विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए प्रेमचंद के साहित्य पर वक्तव्य

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों एवं उपन्यासों पर आधारित अपने विचार प्रस्तुत किए।

मौसमी (बी.एससी. तृतीय वर्ष) ने प्रेमचंद की जीवनी पर प्रकाश डाला। विभा निर्मलकर ने प्रसिद्ध कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’ का वाचन किया, जबकि सौरभ वर्मा ने उपन्यास ‘निर्मला’ का सार प्रस्तुत किया।

इसके अलावा डीडान कुमार और प्रिया निषाद ने प्रेमचंद की कहानियों के सामाजिक परिदृश्य और उनके संदेश पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को उपस्थित शिक्षकों और छात्रों ने सराहा।


कार्यक्रम का सफल संचालन

कार्यक्रम का संचालन राकेश देशमुख ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन शोभना यादव ने किया। आयोजन में हिंदी विभाग के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और पब्लिक स्पीकिंग सोसायटी के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों से साहित्य को केवल परीक्षा का विषय नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम मानने की अपील की।


Munshi Premchand Jayanti के अवसर पर आयोजित यह साहित्यिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा। कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों से परिचित होने का अवसर मिला। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को सही दिशा देने और संवेदनशील नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Munshi Premchand Jayanti जैसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य और सामाजिक चेतना से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।

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