छत्तीसगढ़ में मेडिकल स्टोर्स बंद का असर

Medical Stores Strike के चलते आज छत्तीसगढ़ में दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित नजर आया। रायपुर, दुर्ग, बालौद, मुंगेली समेत प्रदेशभर में निजी मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

यह एक दिवसीय हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर की गई है। दवा विक्रेता ऑनलाइन दवा बिक्री और नए नियमों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं।

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Medical Stores Strike क्यों किया गया

दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव से छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

इसके अलावा केमिस्ट संघों ने GSR 817 और GSR 220 नियमों का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि बिना डॉक्टर की पर्ची दवा बिक्री को बढ़ावा देना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

दवा विक्रेताओं ने जताई चिंता

दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो छोटे व्यापारियों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।


रायपुर में 3300 से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद

राजधानी रायपुर में Medical Stores Strike का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला।

यहां 3300 से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे पूरे शहर में दवाइयों की उपलब्धता प्रभावित हुई।

केवल सरकारी केंद्रों पर मिल रही दवाइयां

रायपुर में अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर और सरकारी दवा केंद्र खुले रहे।

गंभीर मरीजों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।


दुर्ग में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का असर

Durg में भी मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह बंद रहे।

सुबह से निजी दवा दुकानें बंद होने के कारण मरीजों को दवाइयों के लिए काफी परेशान होना पड़ा।

कलेक्टर ने लोगों से की अपील

Abhijeet Singh ने लोगों से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और धन्वंतरि केंद्रों से दवाइयां लेने की अपील की।

दवा विक्रेता संघ ने भरोसा दिलाया कि जरूरतमंद मरीजों को अत्यावश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी।

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बालौद और मुंगेली में भी दिखा बड़ा असर

Balod जिले में करीब 400 निजी मेडिकल स्टोर बंद रहे। इससे पूरे जिले का दवा कारोबार प्रभावित हो गया।

हालांकि आपातकालीन सेवाओं के लिए सरकारी अस्पतालों और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों को खुला रखा गया।

मुंगेली जिले में सभी मेडिकल स्टोर बंद

Mungeli जिले में सभी मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह बंद रहे।

इससे कई मरीजों और उनके परिवारों को जरूरी दवाइयां खरीदने के लिए भटकना पड़ा।


Medical Stores Strike से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल स्टोर बंद होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।

विशेष रूप से बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज और रोजाना दवा लेने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हुई।

प्रशासन ने जारी किया टोल-फ्री नंबर

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए टोल-फ्री नंबर भी जारी किया है।

प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद पहुंचाई जा सके।


ऑनलाइन फार्मेसी को लेकर बढ़ा विवाद

दवा व्यापारियों और ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन बिक्री के कारण नियमों का सही पालन नहीं हो पा रहा और इससे मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

वहीं आम लोगों का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दवाइयां सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।

इस मुद्दे पर सरकार और व्यापारियों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।


Medical Stores Strike ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं और दवा आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा असर डाला है।

रायपुर, दुर्ग, बालौद और मुंगेली समेत कई जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रहने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालांकि सरकारी दवा केंद्रों और अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था की गई, लेकिन इस आंदोलन ने ऑनलाइन फार्मेसी और पारंपरिक दवा कारोबार के बीच बढ़ते विवाद को उजागर कर दिया है।

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