Skip to main content

4thnation

Maize Farming Tips: किसानों के लिए राज्य स्तरीय कृषि सलाह

Maize Farming Tips के तहत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मौजूदा मौसम को देखते हुए किसानों से समय पर वैज्ञानिक पद्धति से मक्का की बुवाई करने की अपील की है। उनका कहना है कि सही तकनीक अपनाने से उत्पादन बढ़ेगा, लागत कम होगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

👉 Join 4thnation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j

राज्य में मानसून की अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को तत्काल खेतों में मक्का की सीधी बुवाई और कतार बोनी शुरू करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार समय पर बोनी करने से अंकुरण बेहतर होता है और फसल की बढ़वार समान रूप से होती है।


Maize Farming Tips: अभी करें वैज्ञानिक तरीके से मक्का की बुवाई

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान मौसम मक्का की खेती के लिए अनुकूल है। खेत में पर्याप्त नमी होने पर किसानों को बिना देरी किए बुवाई शुरू कर देनी चाहिए।

वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि मक्का की खेती हमेशा कतारों में की जाए, ताकि फसल प्रबंधन, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्वों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

यह भी पढ़ें: Soybean Farming Tips: किसानों के लिए नई कृषि निर्देशिका


Maize Farming Tips: बीज दर और कतार बोनी का सही तरीका

विश्वविद्यालय ने मक्का की विभिन्न किस्मों के लिए अलग-अलग बीज दर निर्धारित की है।

संकर और संकुल किस्मों के लिए अनुशंसित बीज दर

  • संकर (Hybrid) किस्मों के लिए: 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
  • संयुक्त/संकुल (Composite) किस्मों के लिए: 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

सही बीज दर अपनाने से पौधों की संख्या संतुलित रहती है और अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।

कतार और पौधों के बीच कितनी दूरी रखें?

सामान्य मक्का की खेती के लिए वैज्ञानिकों ने निम्न दूरी रखने की सलाह दी है—

  • कतार से कतार की दूरी: 60 से 75 सेंटीमीटर
  • पौधे से पौधे की दूरी: 20 से 25 सेंटीमीटर

वहीं मध्यम और देर से पकने वाली विशेष किस्मों के लिए 75 × 25 सेंटीमीटर की दूरी पर बुवाई करने की अनुशंसा की गई है। इससे पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषण मिलता है तथा बेहतर विकास होता है।


संतुलित उर्वरक प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन

Maize Farming Tips में उर्वरक प्रबंधन पर विशेष जोर

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने मक्का की अच्छी पैदावार के लिए संतुलित उर्वरकों के उपयोग पर विशेष बल दिया है।

प्रति हेक्टेयर निम्न मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है—

  • नत्रजन (नाइट्रोजन): 80 से 120 किलोग्राम
  • स्फुर (फास्फोरस): 50 से 75 किलोग्राम
  • पोटाश: 30 से 50 किलोग्राम

वैज्ञानिकों का कहना है कि संतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, पौधों का विकास बेहतर होता है और दानों की गुणवत्ता भी बढ़ती है।


Maize Farming Tips: किसानों को क्या होगा फायदा?

यदि किसान विश्वविद्यालय की Maize Farming Tips का पालन करते हैं, तो उन्हें अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और कम लागत का लाभ मिल सकता है।

वैज्ञानिक पद्धति से बुवाई, अनुशंसित बीज दर, उचित पौध दूरी और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से फसल रोगों का खतरा भी कम होता है और खेती अधिक लाभकारी बनती है।

विश्वविद्यालय ने “समय पर सही बुवाई, बेहतर उत्पादन हमारी जिम्मेदारी” का संदेश देते हुए किसानों से मौसम आधारित वैज्ञानिक सलाह को अपनाने की अपील की है।


Maize Farming Tips के जरिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने छत्तीसगढ़ के किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने का संदेश दिया है। समय पर बुवाई, सही बीज दर, अनुशंसित कतार दूरी और संतुलित उर्वरक प्रबंधन से किसान मक्का की बंपर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। यदि किसान इन वैज्ञानिक सुझावों का पालन करते हैं, तो उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, कृषि लागत घटेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *