Mahesh Kashyap ने सुकमा जिले में आयोजित जैविक एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा के संयुक्त तत्वावधान में ‘खेती बचाओ अभियान’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना था।
कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और प्राकृतिक खेती, जैविक खाद निर्माण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
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Mahesh Kashyap ने किसानों और मत्स्य पालकों को बांटी सामग्री
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित Mahesh Kashyap ने विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत किसानों और मत्स्य पालकों को आवश्यक सामग्री वितरित की।
इस दौरान चार मत्स्य पालकों को आधुनिक मछली पकड़ने के जाल और आइस बॉक्स प्रदान किए गए। इससे मछलियों के सुरक्षित भंडारण में सुविधा होगी और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का निःशुल्क वितरण भी किया गया। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार की उम्मीद जताई गई।
किसानों को योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान किसानों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की लागत कम करना और उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।
विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के बारे में भी जागरूक किया।
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Mahesh Kashyap ने प्राकृतिक खेती को बताया भविष्य
कार्यशाला में कृषि, उद्यानिकी, मछलीपालन और पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने जैविक खाद निर्माण, फसल विविधीकरण, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी उन्नत पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की। किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि पर जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके माध्यम से उत्पादन लागत कम होती है और किसानों को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होता है।
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Mahesh Kashyap ने सुकमा को जैविक जिला बनाने का आह्वान
अपने संबोधन में Mahesh Kashyap ने कहा कि दंतेवाड़ा की तरह सुकमा को भी जैविक जिला बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक फसलें तैयार कर सकते हैं। इससे बाजार में उनकी उपज की मांग भी बढ़ेगी।
Mahesh Kashyap ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं तथा कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी मार्गदर्शन से जिले के किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
खेती बचाओ अभियान बना किसानों के लिए लाभकारी
‘खेती बचाओ अभियान’ के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, लागत में कमी और उत्पादन वृद्धि के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
यह अभियान किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
500 से अधिक किसानों ने लिया भाग
कार्यशाला में जिले के तीनों विकासखंडों से आए 500 से अधिक किसान भाई-बहनों ने सक्रिय सहभागिता की।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुन्द ठाकुर, सहायक संचालक मछलीपालन उदय सबनक तथा उप संचालक कृषि पी.आर. बघेल के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं के समाधान भी प्राप्त किए और नई तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई।
Mahesh Kashyap द्वारा सुकमा में आयोजित इस जैविक एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला ने किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित किया है। किसानों को योजनाओं का लाभ, आधुनिक तकनीकों की जानकारी और प्राकृतिक खेती अपनाने का संदेश देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है। यदि इसी तरह सामूहिक प्रयास जारी रहे तो Mahesh Kashyap का सुकमा को जैविक जिला बनाने का सपना जल्द ही साकार हो सकता है और इससे किसानों की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को नई मजबूती मिलेगी।
