Lakhpati Didi की सफलता की यह कहानी छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की रहने वाली राजकुमारी साहू की है, जिन्होंने संघर्ष, मेहनत और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की मदद से अपनी जिंदगी बदल दी। कभी रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर राजकुमारी आज एक सफल उद्यमी हैं और सालाना तीन लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के लिए प्रेरणा बन गई है।
📲 Join 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Lakhpati Didi बनने से पहले था संघर्षों से भरा जीवन
राजकुमारी साहू का शुरुआती जीवन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार की आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था। बेहतर भविष्य और दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें अपने परिवार के साथ दूसरे राज्यों में मजदूरी करने जाना पड़ा।
पलायन के दौरान उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। हालांकि, उनके मन में हमेशा यह सपना था कि एक दिन वे अपने गांव लौटकर सम्मानजनक जीवन जिएंगी।
Lakhpati Didi बनने में ‘बिहान’ योजना की बड़ी भूमिका
गांव लौटने के बाद राजकुमारी साहू को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया और गांव की 10 महिलाओं को साथ लेकर ‘जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह’ का गठन किया।
समूह ने हर महीने 100 रुपये की बचत से शुरुआत की। धीरे-धीरे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और समूह आर्थिक रूप से मजबूत होता गया।
यह भी पढ़ें: Chhattisgarh Tourism को डिजिटल पहचान देने की बड़ी पहल
आइसक्रीम व्यवसाय से मिली नई पहचान
पलायन के दौरान राजकुमारी ने आइसक्रीम और कुल्फी बनाने का हुनर सीखा था। उन्होंने इसी अनुभव को अपना व्यवसाय बनाने का फैसला किया।
बिहान योजना के तहत उन्हें 1.50 लाख रुपये का बैंक ऋण और 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि (CIF) मिली। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने घर पर मटका कुल्फी, आइसक्रीम और बादाम शेक जैसे उत्पाद तैयार करना शुरू किया।
बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के कारण उनके उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी और स्थानीय बाजार में अच्छी पहचान मिली।
📲 Join 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
आज सालाना तीन लाख रुपये से अधिक की आय
आज राजकुमारी साहू का उद्यम सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। उनका स्वयं सहायता समूह और व्यवसाय मिलकर सालाना तीन लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहा है।
इसी उपलब्धि के कारण वे अब प्रदेश की सफल Lakhpati Didi के रूप में पहचानी जाती हैं।
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
राजकुमारी साहू अब केवल सफल उद्यमी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोल मॉडल भी बन चुकी हैं। वे अपने समूह की अन्य महिलाओं को व्यवसाय, बचत और स्वरोजगार से जुड़ी जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ और मजबूत इच्छाशक्ति किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
राजकुमारी साहू की सफलता बताती है कि स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। आज वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।
Lakhpati Didi राजकुमारी साहू की प्रेरक कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि अवसर, मेहनत और सरकारी सहयोग एक साथ मिल जाएं तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। बिहान योजना ने न केवल उनके पलायन की मजबूरी खत्म की, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की नई पहचान भी दिलाई। उनकी सफलता आज हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही है।
