रायपुर, 18 अप्रैल 2026। Jan Sanskriti Manch (जसम) छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है। हाल ही में संपन्न जसम के पहले राज्य सम्मेलन में प्रदेश की जानी-मानी लेखिका रूपेंद्र तिवारी को छत्तीसगढ़ जसम की पहली अध्यक्ष चुना गया। यह सम्मेलन न केवल एक संगठनात्मक मील का पत्थर है, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन की जड़ें और गहरी होने का संकेत भी है।
मुख्य समाचार — Jan Sanskriti Manch का पहला राज्य सम्मेलन संपन्न
छत्तीसगढ़ में Jan Sanskriti Manch का लगातार विस्तार हो रहा है और इसी कड़ी में प्रदेश का पहला राज्य सम्मेलन हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस सम्मेलन में प्रदेश भर के लेखकों, कवियों, विचारकों, संस्कृतिकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय था — प्रदेश पदाधिकारियों और 35 सदस्यीय कार्यकारिणी का चयन, जो रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, अंबिकापुर, धमतरी, जांजगीर-चांपा और जगदलपुर जैसे प्रमुख शहरों का प्रतिनिधित्व करती है।

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रूपेंद्र तिवारी — Jan Sanskriti Manch छत्तीसगढ़ की पहली अध्यक्ष
एक लेखिका जो बनीं सांस्कृतिक आंदोलन की अगुआ
रूपेंद्र तिवारी को Jan Sanskriti Manch छत्तीसगढ़ की पहली अध्यक्ष चुना जाना न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की स्वीकृति है, बल्कि यह प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन में महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।
रूपेंद्र तिवारी एक सुपरिचित लेखिका हैं, जिनकी रचनाएं छत्तीसगढ़ की सामाजिक सच्चाइयों, महिला संघर्ष और जनजीवन को गहराई से उकेरती हैं।
उनके नेतृत्व में Jan Sanskriti Manch छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक और वैचारिक आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
राजकुमार सोनी — राष्ट्रीय सचिव और प्रदेश सचिव दोनों
राजकुमार सोनी जो पहले से Jan Sanskriti Manch के राष्ट्रीय सचिव हैं, उन्हें अब प्रदेश जसम का भी सचिव नियुक्त किया गया है।
यह दोहरी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करेगी कि राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर जसम की नीतियों और कार्यक्रमों में बेहतर समन्वय हो।
मुदित मिश्र बिलासपुर को उप सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो बिलासपुर क्षेत्र में जसम की गतिविधियों को और सक्रिय करेंगे।
Jan Sanskriti Manch का संरक्षक मंडल — विचारकों और साहित्यकारों की फेहरिस्त
मार्क्सवादी चिंतन और साहित्य का संगम
Jan Sanskriti Manch के नवगठित संरक्षक मंडल में छत्तीसगढ़ और देश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित साहित्यकार और विचारक शामिल हैं:
- राजेश्वर सक्सेना — सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी चिंतक
- नंद कश्यप — वरिष्ठ विचारक
- सियाराम शर्मा — साहित्य आलोचक
- वासुकी प्रसाद उन्मत — जनकवि
- कैलाश बनवासी — प्रसिद्ध कथाकार
- जितेंद्र गढ़वी — साहित्यकार
इन सभी विभूतियों की मौजूदगी Jan Sanskriti Manch को वैचारिक गहराई और साहित्यिक विश्वसनीयता प्रदान करती है।
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उपाध्यक्ष, सह-सचिव और कोषाध्यक्ष — Jan Sanskriti Manch की पूरी टीम
हर क्षेत्र को मिला प्रतिनिधित्व
उपाध्यक्ष:
- हरगोविंद पुरी — मध्यप्रदेश जसम के समन्वयक और उपाध्यक्ष
- अजय शुक्ला — रायपुर जसम
- घनश्याम त्रिपाठी — भिलाई
- निहाल सोनी — बिलासपुर
सह-सचिव:
- सनियारा खान — रायपुर जसम
- सुरेश वाहने — भिलाई
- योगेन्द्र साहू — बिलासपुर जसम
कोषाध्यक्ष: संस्कृतिकर्मी सुलेमान खान को कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सांस्कृतिक टीम में महिलाओं की मजबूत भागीदारी
जसम की सांस्कृतिक टीम में रायपुर से वर्षा बोपचे, सुनीता शुक्ला और समीक्षा नायर को शामिल किया गया है।
यह महिला भागीदारी Jan Sanskriti Manch की प्रगतिशील सोच और लैंगिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
35 सदस्यीय कार्यकारिणी — छत्तीसगढ़ के कोने-कोने का प्रतिनिधित्व
Jan Sanskriti Manch की व्यापक और विविध कार्यकारिणी
Jan Sanskriti Manch छत्तीसगढ़ की 35 सदस्यीय कार्यकारिणी में प्रदेश के सात प्रमुख क्षेत्रों से प्रतिनिधि शामिल हैं:
रायपुर से: नरोत्तम शर्मा, वंदना, भुआल, इंद्र कुमार राठौर, डॉ. संजू पूनम, अखिलेश एडगर, मोहित जायसवाल, नरेश गौतम, सर्वज्ञ नायर, पायल, नरेश साहू
भिलाई से: वरिष्ठ लेखिका मीता दास, बृजेन्द्र तिवारी, कमलेश्वर साहू, जय प्रकाश नायर, पापा राव, विद्याभूषण, अंजन कुमार, अशोक तिवारी, संतोष बंजारा, पूर्णिमा साहू, दिव्या
बिलासपुर से: आदित्य सोनी, गौरव गुलहरे, मीना, सौरभ कश्यप, आकाश चौहान
अन्य क्षेत्रों से:
- अंबिकापुर — दीपक सिंह, कामिनी त्रिपाठी
- अशोक नगर — जसपाल बांगा, श्याम सुंदर मुदगल
- धमतरी — रज्जाक खान, लोकेश्वर कुमार
- जांजगीर-चांपा — पुजाली पटले
- जगदलपुर — संस्कृतिकर्मी आशीष रंगनाथ
यह विविधता यह सिद्ध करती है कि Jan Sanskriti Manch केवल किसी एक शहर या क्षेत्र का संगठन नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना का प्रतिनिधि मंच है।
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Jan Sanskriti Manch का छत्तीसगढ़ में महत्व और भविष्य की दिशा
प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन की नई उड़ान
Jan Sanskriti Manch की स्थापना का मूल उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और कला के माध्यम से समाज में न्याय, समानता और प्रगतिशील मूल्यों को स्थापित करना है।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां आदिवासी संस्कृति, लोककला और सामाजिक विषमताएं एक साथ मौजूद हैं, Jan Sanskriti Manch की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
नई कार्यकारिणी के गठन के साथ जसम अब प्रदेश के हर जिले तक अपनी पहुंच बनाने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नाटकों, कविता पाठों और वैचारिक संगोष्ठियों के माध्यम से जनचेतना जगाने की दिशा में काम करेगा।
Jan Sanskriti Manch छत्तीसगढ़ का नया अध्याय
Jan Sanskriti Manch छत्तीसगढ़ का यह पहला राज्य सम्मेलन और नई कार्यकारिणी का गठन प्रदेश के सांस्कृतिक और वैचारिक परिदृश्य में एक ताज़ी हवा के झोंके की तरह है।
रूपेंद्र तिवारी के रूप में एक सशक्त महिला नेतृत्व, राजकुमार सोनी की राष्ट्रीय-प्रादेशिक दोहरी जिम्मेदारी और रायपुर से जगदलपुर तक फैली 35 सदस्यीय कार्यकारिणी — यह सब मिलकर Jan Sanskriti Manch को छत्तीसगढ़ का सबसे व्यापक और प्रतिनिधित्वपूर्ण सांस्कृतिक मंच बनाते हैं।
आने वाले समय में Jan Sanskriti Manch निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ की जनता की आवाज़ बनेगा — साहित्य के माध्यम से, संस्कृति के माध्यम से और संघर्ष के माध्यम से।
