DD Hospital Semra में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) और आईसीयू (ICU) वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है। यह कदम मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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DD Hospital Semra पर कार्रवाई क्यों की गई?
रायपुर में 4 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
यह कार्रवाई 22 जून 2026 को गंभीर हालत में जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी के उपचार से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित कर DD Hospital Semra का विस्तृत निरीक्षण कराया।
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DD Hospital Semra जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
जांच टीम की रिपोर्ट में अस्पताल के संचालन को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आईं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी
निरीक्षण में पाया गया कि गंभीर मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता नहीं थी। इसके बावजूद अस्पताल गंभीर मरीजों का उपचार कर रहा था।
आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जरूरी संसाधनों और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी शिकायतें
जांच के दायरे में यह शिकायत भी शामिल रही कि आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा था। प्रशासन ने इन आरोपों की भी जांच की।
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DD Hospital Semra मामले में पुनः निरीक्षण में क्या मिला?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तथा सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा किए गए पुनः निरीक्षण में एक और गंभीर तथ्य सामने आया।
जांच में पाया गया कि एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का उपचार आवश्यक विशेषज्ञों और पर्याप्त सुविधाओं के बिना किया गया। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट तथा पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
इसके बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार जारी रखना जांच अधिकारियों ने गंभीर चिकित्सीय लापरवाही माना।
प्रशासन ने जारी किया सख्त आदेश
अस्पताल प्रबंधन को पहले कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। हालांकि जांच रिपोर्ट और अस्पताल द्वारा प्रस्तुत जवाब का परीक्षण करने के बाद प्रशासन ने पाया कि कई तथ्य सही नहीं पाए गए तथा संबंधित अधिनियमों के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।
इसके आधार पर जिला प्रशासन ने निम्न आदेश जारी किए—
- ऑपरेशन थिएटर (OT) तत्काल प्रभाव से सील।
- ICU वार्ड सील।
- अस्पताल का लाइसेंस अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त।
- आदेश की प्रति स्वास्थ्य विभाग, पुलिस अधीक्षक, CMHO तथा अन्य संबंधित विभागों को भेजी गई।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर
कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने नर्सिंग होम एक्ट तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। किसी भी अस्पताल द्वारा नियमों की अनदेखी या चिकित्सीय लापरवाही पाए जाने पर बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
DD Hospital Semra के खिलाफ की गई यह कार्रवाई राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
