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Chief Justice Ramesh Sinha: बिना पर्याप्त सबूत वाहन जब्त नहीं किया जा सकता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Chief Justice Ramesh Sinha की अध्यक्षता वाली छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल अनुमान के आधार पर किसी वाहन को आबकारी अधिनियम (Excise Act) के तहत जब्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक यह वैज्ञानिक रूप से साबित न हो जाए कि जब्त की गई शराब कानूनी सीमा से अधिक है, तब तक वाहन की जब्ती कानूनसम्मत नहीं मानी जाएगी।

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Chief Justice Ramesh Sinha ने वाहन मालिक को क्यों दी राहत?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Chief Justice Ramesh Sinha ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए सेशन कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें जब्त की गई स्कॉर्पियो वाहन को उसके मालिक को लौटाने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने कहा कि वाहन की जब्ती जैसी कठोर कार्रवाई केवल संदेह या अनुमान के आधार पर नहीं की जा सकती। इसके लिए पर्याप्त और वैज्ञानिक साक्ष्य होना अनिवार्य है।


पूरा मामला क्या था?

यह मामला वर्ष 2014 का है। कबीरधाम जिले में पुलिस ने एक स्कॉर्पियो वाहन को रोककर उसमें कथित रूप से 154 बोतल देशी शराब, विदेशी शराब और बीयर बरामद करने का दावा किया था।

इसके बाद वाहन मालिक के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने आबकारी अधिनियम की धारा 47-A के तहत वाहन जब्त कर लिया।

धारा 47-A तभी लागू होती है जब जब्त शराब की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक हो।

बाद में आबकारी आयुक्त ने भी वाहन मालिक की अपील खारिज कर दी। इसके बाद मामला सेशन कोर्ट पहुंचा, जहां वाहन मालिक को राहत मिली। राज्य सरकार ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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Chief Justice Ramesh Sinha ने जांच में पाई बड़ी कमी

सुनवाई के दौरान Chief Justice Ramesh Sinha ने पाया कि पुलिस ने 154 बोतल शराब जब्त करने का दावा तो किया, लेकिन प्रयोगशाला परीक्षण केवल 9 बोतलों का कराया गया।

इन 9 बोतलों में आठ बोतलें 180 मिलीलीटर और एक बोतल 650 मिलीलीटर की थी, जिनकी कुल मात्रा लगभग 2 लीटर ही निकली।

बाकी 145 बोतलों के संबंध में न तो कोई लैब रिपोर्ट पेश की गई और न ही कोई रासायनिक परीक्षण कराया गया।

कोर्ट ने कहा कि बिना परीक्षण यह मान लेना कि सभी बोतलों में शराब ही थी और उनकी मात्रा कानूनी सीमा से अधिक थी, पूरी तरह गलत है।


राज्य सरकार की दलील कोर्ट ने क्यों खारिज की?

राज्य सरकार का कहना था कि वाहन में बड़ी संख्या में शराब की बोतलें बरामद हुई थीं, इसलिए जब्ती उचित थी।

लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि केवल बोतलों की संख्या पर्याप्त नहीं है। कानून के अनुसार यह साबित करना आवश्यक है कि उनमें वास्तव में शराब थी और उसकी मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की संपत्ति जब्त करना एक गंभीर कानूनी कार्रवाई है। इसलिए प्रत्येक कानूनी प्रक्रिया का पालन और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।


Chief Justice Ramesh Sinha ने सेशन कोर्ट के आदेश को बताया सही

मुख्य न्यायाधीश Chief Justice Ramesh Sinha ने कहा कि कलेक्टर ने बिना पर्याप्त प्रमाण के सभी बोतलों में शराब होने का अनुमान लगा लिया, जो कानून के अनुरूप नहीं था।

उन्होंने यह भी कहा कि आबकारी आयुक्त ने भी इस गंभीर त्रुटि को नजरअंदाज कर दिया।

इसके विपरीत सेशन जज ने पूरे रिकॉर्ड का सही तरीके से परीक्षण किया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वाहन की जब्ती को अवैध माना।

हाईकोर्ट ने कहा कि सेशन कोर्ट का आदेश पूरी तरह न्यायसंगत और विधिसम्मत था।


पुनरीक्षण (Revision) और अपील (Appeal) में क्या अंतर है?

फैसले में Chief Justice Ramesh Sinha ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनरीक्षण याचिका (Revision) और अपील (Appeal) दोनों अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण अदालत केवल तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब आदेश में स्पष्ट कानूनी त्रुटि, गंभीर अन्याय या अधिकार क्षेत्र से जुड़ी गलती हो।

यदि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सही निष्कर्ष निकाला है, तो केवल असहमति के आधार पर उस आदेश को पलटा नहीं जा सकता।


फैसले का भविष्य में क्या असर होगा?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में आबकारी अधिनियम के तहत होने वाली जब्ती की कार्रवाइयों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।

इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी एजेंसियों को केवल अनुमान के आधार पर किसी व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार नहीं है। प्रत्येक कार्रवाई के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्य आवश्यक होंगे।


Chief Justice Ramesh Sinha का यह फैसला संपत्ति के अधिकार और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया की रक्षा करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि बिना वैज्ञानिक जांच और पर्याप्त साक्ष्यों के केवल अनुमान के आधार पर वाहन जब्त नहीं किया जा सकता। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करेगा तथा कानून के शासन को और मजबूत करेगा।

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