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Chhattisgarh Security मॉडल में बड़ा बदलाव

Chhattisgarh Security अब केवल कानून-व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियानों तक सीमित नहीं रह गई है। 21 सितंबर 2026 को प्रकाशित ETGovernment की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ पुलिस के DG Training और State Police Academy के निदेशक जी.पी. सिंह ने बताया कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को विकास, कनेक्टिविटी, निवेश और तकनीक से जोड़कर देखा जा रहा है।

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विक्सित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव 2026 में हुई बातचीत में सिंह ने कहा कि किसी निवेशक के लिए केवल जमीन, बिजली और संसाधन महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि सुरक्षित और अनुमानित कारोबारी वातावरण भी जरूरी है। उनके अनुसार सुरक्षा विश्वास पैदा करती है, विश्वास निवेश को बढ़ावा देता है और निवेश से रोजगार के अवसर बनते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में Clear-Hold-Build रणनीति

छत्तीसगढ़ लंबे समय से Left Wing Extremism की चुनौती से प्रभावित रहा है। अब सुरक्षा रणनीति को केवल किसी क्षेत्र में अभियान चलाकर हिंसा रोकने तक सीमित रखने के बजाय Clear, Hold and Build दृष्टिकोण से जोड़ने की बात कही गई है।

इस मॉडल में पहले प्रभावित क्षेत्र को केंद्रित और खुफिया जानकारी आधारित अभियानों से सुरक्षित करना, फिर सुरक्षा उपस्थिति बनाए रखना और उसके बाद वहां शासन तथा विकास की सुविधाएं पहुंचाना शामिल है।

सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं को सुरक्षा के बाद उस क्षेत्र में पहुंचाने पर जोर है। उद्देश्य केवल हिंसा वाले क्षेत्र को खाली कराना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां बनाना है जहां हिंसा दोबारा लौटने की संभावना कम हो।

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सड़क और टेलीकॉम से बदली सुरक्षा व्यवस्था

पहले बस्तर जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सड़क और संचार की कमी सुरक्षा तथा प्रशासन दोनों के लिए चुनौती रही है। अब सड़क निर्माण से सुरक्षा बलों के साथ डॉक्टरों, शिक्षकों और सरकारी अधिकारियों की पहुंच भी आसान होने की बात कही गई है।

ETGovernment की रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में 4,000 किलोमीटर से अधिक सड़कें और 1,333 टेलीकॉम टावर संचालित किए जा चुके हैं। इससे सुरक्षा के साथ-साथ लोगों की डिजिटल सेवाओं और बाजार तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की बात कही गई है।

Chhattisgarh Security में AI और ड्रोन की भूमिका

तकनीक भी Chhattisgarh Security व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। AI, ड्रोन, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल साक्ष्यों का इस्तेमाल पैटर्न पहचानने, स्थिति की बेहतर निगरानी करने और जांच को मजबूत करने में किया जा सकता है।

हालांकि जी.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि तकनीक मानव निर्णय का विकल्प नहीं है। तकनीकी उपकरणों के साथ पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग और संस्थागत क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। भविष्य की पुलिसिंग में अपराध की भौतिक और डिजिटल, दोनों तरह की समझ आवश्यक होगी।

मई 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बस्तर में केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक भी हुई थी, जिसमें राज्यों के बीच आंतरिक सुरक्षा समेत विभिन्न मुद्दों पर समन्वय पर चर्चा हुई।

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Cyber Crime बना नई चुनौती

जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सरकारी तथा कारोबारी सेवाएं बढ़ रही हैं, साइबर अपराध का खतरा भी बदल रहा है। UPI फ्रॉड, फिशिंग, पहचान की धोखाधड़ी, डिजिटल-अरेस्ट स्कैम और डेटा से जुड़े अपराध नई चुनौतियों के रूप में सामने आ रहे हैं।

इस चुनौती से निपटने के लिए दो स्तरों पर काम जरूरी बताया गया है—पहला, आम नागरिकों में साइबर जागरूकता बढ़ाना और दूसरा, पुलिस बल की साइबर क्षमता को मजबूत करना।

इस दिशा में केंद्र स्तर पर भी साइबर अपराध से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। मई 2026 की PIB जानकारी में राज्यों को साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन 1930 के कॉल सेंटरों को गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप मजबूत करने की बात कही गई थी।

उद्योग और निवेश के लिए सुरक्षा क्यों जरूरी

राज्य में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ सुरक्षा की भूमिका भी बदल रही है। अब औद्योगिक सुरक्षा का मतलब केवल फैक्ट्री के गेट की निगरानी नहीं, बल्कि कर्मचारियों, लॉजिस्टिक्स, परिवहन मार्गों, सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और बिजनेस कंटिन्युटी की सुरक्षा भी है।

रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका को घटना होने के बाद प्रतिक्रिया देने से आगे बढ़ाकर संभावित जोखिमों की पहचान और रोकथाम से जोड़ने की बात कही गई है। इससे स्थानीय विवादों या संभावित व्यवधानों को गंभीर समस्या बनने से पहले समझने पर जोर दिया जा सकता है।

Niyad Nellanar से विकास तक

Niyad Nellanar को भी सुरक्षा और विकास को जोड़ने वाली व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया गया है। सुरक्षा कैंप केवल सुरक्षा उपस्थिति का केंद्र न रहकर आसपास के क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, स्वास्थ्य और आजीविका जैसी सुविधाओं तक पहुंच बनाने का आधार बन सकते हैं।

इस दृष्टिकोण में किसी परियोजना की सफलता केवल सुरक्षा ढांचे की स्थापना से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में होने वाले वास्तविक बदलाव से मापने पर जोर दिया गया है।

युवाओं के लिए बढ़ते अवसर

सुरक्षा और कनेक्टिविटी में सुधार का सबसे बड़ा असर युवाओं के अवसरों पर पड़ सकता है। बेहतर सड़कें शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान करती हैं, जबकि टेलीकॉम नेटवर्क डिजिटल सेवाओं और व्यापक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का अवसर देता है।

निवेश और कारोबार बढ़ने पर कौशल, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी बन सकते हैं। इस दृष्टिकोण में विकास का लक्ष्य केवल हिंसा में कमी नहीं, बल्कि युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय के विकल्प बढ़ाना है।

Chhattisgarh Security का बदलता मॉडल सुरक्षा को विकास, कनेक्टिविटी, डिजिटल तकनीक और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में Clear-Hold-Build रणनीति, सड़क और टेलीकॉम विस्तार, AI व ड्रोन जैसी तकनीक और साइबर अपराध से निपटने की तैयारी इस बदलाव के प्रमुख हिस्से हैं। ETGovernment से बातचीत में जी.पी. सिंह ने जिस व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा, उसमें सुरक्षा को विकास का अंतिम लक्ष्य नहीं बल्कि सुरक्षित और स्थिर विकास के लिए आधार माना गया है।

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