रायपुर, 5 नवंबर 2026। Chhattisgarh High Court ने सरकारी भर्ती और वेटिंग लिस्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने राजनांदगांव जिला न्यायाधीश द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर रहे उम्मीदवार चंद्रशेखर कंवर की नियुक्ति का आदेश बरकरार रखा है। मामला Assistant Grade-III पद पर भर्ती से जुड़ा है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब भर्ती विज्ञापन में पहले से यह शर्त दी गई थी कि चयन सूची जारी होने के एक वर्ष के भीतर किसी चयनित उम्मीदवार के इस्तीफा देने या अन्य कारण से पद खाली होने पर प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति की जाएगी, तो भर्ती प्राधिकरण इस शर्त से पीछे नहीं हट सकता।
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Chhattisgarh High Court ने क्यों खारिज की अपील?
यह फैसला 30 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्णा राम मोहपात्रा और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने राजनांदगांव के जिला न्यायाधीश की ओर से दाखिल अपील को खारिज कर दिया।
खंडपीठ ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में नियोक्ता ने स्वयं स्पष्ट प्रावधान किया था कि चयन सूची जारी होने के एक साल के भीतर पद खाली होने पर वेटिंग लिस्ट से उम्मीदवार को नियुक्त किया जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित प्राधिकरण के पास उस शर्त को नजरअंदाज करने का विवेकाधिकार नहीं रह जाता।
अदालत के अनुसार, वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार के दावे पर विचार करने से इनकार करना मनमाना और अनुचित होगा। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने एकलपीठ द्वारा पहले दिए गए नियुक्ति संबंधी निर्देश को बरकरार रखा।
राजनांदगांव में 9 पदों पर हुई थी भर्ती
इस मामले की शुरुआत जून 2023 में जारी भर्ती विज्ञापन से हुई थी। राजनांदगांव जिला न्यायाधीश कार्यालय ने विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इनमें Assistant Grade-III के कुल नौ पद शामिल थे।
इन नौ पदों में से दो पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित रखे गए थे। भर्ती प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों को कौशल परीक्षा (Skill Test) में शामिल होना था।
चंद्रशेखर कंवर ने भी इस परीक्षा में भाग लिया और ST वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहला स्थान हासिल किया। इस कारण चयन सूची में शामिल किसी उम्मीदवार के इस्तीफे के बाद खाली होने वाले पद पर उनका दावा बना।
ST वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर थे चंद्रशेखर कंवर
अंतिम चयन सूची 17 सितंबर 2023 को जारी की गई थी। इसके बाद चयनित ST उम्मीदवार ने नियुक्ति ग्रहण कर ली, लेकिन चयन सूची जारी होने के एक वर्ष के भीतर ही उसने इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद चंद्रशेखर कंवर ने खाली हुए पद पर नियुक्ति की मांग करते हुए राजनांदगांव जिला न्यायाधीश के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया। उनका तर्क था कि भर्ती विज्ञापन की शर्त के अनुसार रिक्त पद वेटिंग लिस्ट से भरा जाना चाहिए और वे ST प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर हैं।
हालांकि, उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया गया।
चयनित उम्मीदवार के इस्तीफे से खाली हुआ पद
जिला न्यायाधीश कार्यालय की ओर से कंवर की मांग खारिज करने के पीछे यह तर्क दिया गया कि चयनित उम्मीदवार नियुक्ति ग्रहण कर चुका था। इसलिए बाद में उसके इस्तीफा देने से उत्पन्न रिक्ति को वेटिंग लिस्ट से भरने योग्य नहीं माना जा सकता।
प्राधिकरण का कहना था कि ऐसी स्थिति में पद को नई भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाना चाहिए। इस फैसले को चुनौती देते हुए चंद्रशेखर कंवर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर उनकी नियुक्ति करने का निर्देश दिया था।
भर्ती विज्ञापन की शर्त बनी फैसले का आधार
जिला न्यायाधीश ने एकलपीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी। अपील में कहा गया कि वेटिंग लिस्ट में शामिल उम्मीदवार को नियुक्ति का कोई स्वतः प्राप्त अधिकार नहीं होता और नियोक्ता को यह तय करने की स्वतंत्रता है कि रिक्त पद नई भर्ती से भरा जाए या नहीं।
लेकिन खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने भर्ती विज्ञापन की उस विशेष शर्त पर भरोसा किया, जिसमें एक वर्ष के भीतर इस्तीफे, हटाए जाने, मृत्यु या किसी अन्य कारण से पद खाली होने पर वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति का प्रावधान था।
अदालत ने माना कि जब भर्ती प्राधिकरण ने स्वयं यह नियम बनाया है, तो उसे उसका पालन करना होगा।
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उम्मीदवार को नियुक्ति और वरिष्ठता पर क्या निर्देश मिले?
एकलपीठ ने अधिकारियों को चंद्रशेखर कंवर की नियुक्ति छह सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया था। साथ ही, बीच की अवधि के लिए उन्हें पिछला वेतन (Back Wages) देने का आदेश नहीं दिया गया था।
उनकी वरिष्ठता वास्तविक नियुक्ति की तारीख से निर्धारित करने की बात भी कही गई थी। अब खंडपीठ द्वारा जिला न्यायाधीश की अपील खारिज किए जाने के बाद एकलपीठ का यह निर्देश बरकरार रहेगा।
Chhattisgarh High Court का यह फैसला सरकारी भर्ती में विज्ञापन की शर्तों और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत ने साफ किया है कि यदि भर्ती नियमों में निर्धारित अवधि के भीतर रिक्त पद को वेटिंग लिस्ट से भरने का प्रावधान है, तो संबंधित विभाग मनमाने तरीके से उससे इनकार नहीं कर सकता। यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो सरकारी भर्तियों में प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं।
