Chhattisgarh CM विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (All India Institute of Ayurveda-AIIA) स्थापित करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि राज्य में यह राष्ट्रीय स्तर का संस्थान स्थापित होता है तो आयुर्वेद चिकित्सा, उच्च शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ मध्य भारत में आयुर्वेद का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
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Chhattisgarh CM ने क्यों रखी AIIA की मांग?
Chhattisgarh CM विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान राज्य में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक जनजातीय औषधीय ज्ञान से समृद्ध राज्य है, इसलिए यहां इस तरह का संस्थान स्थापित करना अत्यंत उपयोगी होगा।
उन्होंने बताया कि नई दिल्ली और गोवा में संचालित AIIA ने आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी मॉडल को छत्तीसगढ़ में भी विकसित किया जा सकता है।
Chhattisgarh CM के प्रस्ताव से राज्य को क्या लाभ होगा?
मुख्यमंत्री के अनुसार यदि राज्य में AIIA की स्थापना होती है तो इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा।
इस संस्थान के माध्यम से लोगों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आयुर्वेद चिकित्सा उपलब्ध होगी। साथ ही युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध के अवसर प्राप्त होंगे।
इसके अलावा आयुर्वेदिक चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत होगी।
आयुष और शोध को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
Chhattisgarh CM ने कहा कि राज्य के लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र में अनेक दुर्लभ औषधीय पौधे और जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं। जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक औषधीय ज्ञान की समृद्ध विरासत भी मौजूद है।
ऐसे में AIIA की स्थापना से इन संसाधनों पर वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। इससे आयुर्वेद आधारित नवाचार, औषधि विकास और चिकित्सा शिक्षा को नई गति मिल सकती है।
केंद्र सरकार की योजना में क्यों मजबूत है छत्तीसगढ़ की दावेदारी?
केंद्रीय बजट 2026 में देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की घोषणा की गई है।
इसी को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आग्रह किया है कि प्रस्तावित तीन संस्थानों में से एक छत्तीसगढ़ को दिया जाए। उनका तर्क है कि इससे केवल राज्य ही नहीं बल्कि पूरे मध्य भारत के लोगों को उन्नत आयुर्वेद चिकित्सा और शोध सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
छत्तीसगढ़ बनेगा आयुर्वेद का राष्ट्रीय केंद्र?
मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि यह संस्थान स्थापित होता है तो छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि औषधीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान की उपलब्धता राज्य को आयुर्वेद आधारित अनुसंधान और चिकित्सा के लिए उपयुक्त बनाती है। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावों के मूल्यांकन के बाद लिया जाएगा।
Chhattisgarh CM विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की मांग राज्य के स्वास्थ्य और आयुष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इससे आयुर्वेद चिकित्सा, उच्च शिक्षा, अनुसंधान, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापक लाभ मिल सकता है। साथ ही छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद के प्रमुख केंद्र के रूप में नई पहचान मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।
