PM Modi Degree Row से जुड़े मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। यह अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी के खुलासे के मामले में लगाए गए ₹25,000 के खर्च/जुर्माने के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री की जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए इस मामले में ऐसा कोई बड़ा जनहित नहीं दिखता, जो RTI कानून के तहत निजता से संबंधित अपवादों को पार कर सके।
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PM Modi Degree Row पर गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह तथ्य कि संबंधित व्यक्ति भारत के प्रधानमंत्री और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं, उनकी शैक्षणिक डिग्री की जानकारी को स्वतः सार्वजनिक हित की सूचना नहीं बना देता।
अदालत ने RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के संदर्भ में जानकारी की निजता और जनहित के बीच संतुलन पर विचार किया। कोर्ट के अनुसार, किसी व्यक्ति की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी के खुलासे के लिए व्यापक जनहित का आधार होना आवश्यक है।
अदालत ने यह भी कहा कि किसी जानकारी के पहले से सार्वजनिक क्षेत्र में होने की बात अपने आप RTI Act के तहत उसे उपलब्ध कराने का दायित्व पैदा नहीं करती।
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RTI के तहत डिग्री की जानकारी क्यों बनी मुद्दा?
मामला मूल रूप से 2016 के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के एक आदेश से जुड़ा था। CIC ने गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
गुजरात यूनिवर्सिटी ने इस आदेश को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बाद में मार्च 2023 में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने CIC के आदेश को रद्द कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ केजरीवाल ने अपील की थी।
PM Modi Degree Row में ₹25,000 का मामला
मार्च 2023 के एकल न्यायाधीश के फैसले में केजरीवाल पर ₹25,000 का खर्च लगाया गया था। फैसले में कहा गया था कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है, क्योंकि बड़े जनहित में इसके खुलासे की आवश्यकता स्थापित नहीं हुई।
केजरीवाल ने इसी आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की। गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने 29 सितंबर को अपील खारिज कर दी और स्टे के लिए दायर सिविल आवेदन भी खारिज कर दिया।
CIC के पुराने आदेश पर कोर्ट की अहम बात
हाईकोर्ट ने CIC की कार्रवाई के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया। अदालत के अनुसार, दूसरी अपील के चरण में केजरीवाल के पत्र को CIC द्वारा RTI आवेदन के रूप में स्वतः लेना और गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देना निर्धारित प्रक्रिया के दायरे से बाहर था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन जानकारियों के खुलासे का निर्देश दिया गया था, उनके संबंध में जनहित या व्यापक जनहित के आधार पर खुलासा आवश्यक नहीं माना जा सकता।
यह टिप्पणी RTI कानून में निजी सूचना बनाम सार्वजनिक हित के सवाल को इस मामले का प्रमुख कानूनी मुद्दा बनाती है।
PM Modi Degree Row का पुराना घटनाक्रम
इस विवाद की शुरुआत 2016 में हुई थी, जब CIC ने गुजरात यूनिवर्सिटी से प्रधानमंत्री की डिग्री के बारे में जानकारी देने को कहा था। यूनिवर्सिटी ने CIC के निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
मार्च 2023 में एकल न्यायाधीश ने CIC के आदेश को रद्द किया और ₹25,000 का खर्च लगाया। सितंबर 2026 में इस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर खंडपीठ ने सुनवाई पूरी की और 29 सितंबर को फैसला सुनाते हुए अपील खारिज कर दी।
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PM Modi Degree Row में अब क्या?
30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गुजरात हाईकोर्ट का 29 सितंबर का आदेश इस अपील पर स्थिति स्पष्ट करता है। हालांकि, इस तरह के मामलों में आगे कोई कानूनी कदम उठाया जाता है या नहीं, यह संबंधित पक्षों के निर्णय पर निर्भर करेगा।
इस मामले का महत्व केवल प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री तक सीमित नहीं है। यह RTI Act के तहत व्यक्तिगत जानकारी, निजता और जनहित के बीच संतुलन से जुड़े कानूनी प्रश्नों को भी सामने लाता है।
PM Modi Degree Row में गुजरात हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज करते हुए प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी के खुलासे के लिए व्यापक जनहित की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने RTI Act की निजता संबंधी धाराओं और CIC की प्रक्रिया पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। 30 सितंबर 2026 तक इस मामले में हाईकोर्ट का 29 सितंबर का फैसला उपलब्ध स्थिति का प्रमुख न्यायिक आधार है।
