Boter Village यानी नारायणपुर जिले के दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र के बोटेर गांव में स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार तिरंगा फहराया गया। कभी नक्सल प्रभाव वाले इलाके के रूप में पहचाने जाने वाले इस गांव में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का दृश्य ग्रामीणों के लिए भावुक और ऐतिहासिक रहा।
बोटेर के सरकारी प्राथमिक स्कूल और 29वीं बटालियन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कैंप में ध्वजारोहण किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि पहले नक्सली भय और प्रतिबंधों के कारण यहां स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व नहीं मनाए जाते थे।
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Boter Village में पहली बार तिरंगा
सरकारी प्राथमिक स्कूल के सहायक शिक्षक रविकांत ने बताया कि स्कूल में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। उनके अनुसार, पूरे गांव में उत्साह का माहौल था और बच्चे भी तिरंगा लेकर काफी खुश नजर आए।
उन्होंने बताया कि पुलिस कैंप स्थापित होने के बाद इलाके में सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ। इससे पहले नक्सली गतिविधियों के डर के कारण स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि रेखापाल, दीवालूर और कुमनार में भी तिरंगा फहराया गया।
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नक्सल भय से आजादी की नई तस्वीर
बोटेर के ग्रामीणों के मुताबिक, पहले नक्सली राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोकते थे। ग्रामीण कौरू राम मंडावी ने बताया कि निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के साथ कथित तौर पर मारपीट की जाती थी।
उनके अनुसार, ग्रामीणों को बाजार या दूसरे गांव जाने के लिए भी अनुमति की जरूरत पड़ती थी। उन्होंने कहा कि पिछले साल पुलिस कैंप स्थापित होने के बाद से नक्सलियों की मौजूदगी नहीं देखी गई और अब ग्रामीण स्वतंत्र रूप से राष्ट्रीय पर्व मना पा रहे हैं।
Boter Village में पुलिस कैंप के बाद बदली स्थिति
ग्रामीण राजू राम मंडावी ने बताया कि इस बार तिरंगा फहराने को लेकर पूरे गांव में खुशी है। उन्होंने कहा कि पुलिस कैंप स्थापित होने के बाद क्षेत्र में सड़कें बनी हैं और जरूरत के समय पुलिसकर्मी ग्रामीणों की मदद करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में भी सुरक्षा बल मदद करते हैं। दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने से दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को राहत मिली है।
सड़क, राशन और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच
पुलिस कैंप की स्थापना के बाद ग्रामीणों ने सड़क, स्वास्थ्य, राशन और सरकारी दस्तावेजों से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार की बात कही है। लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच बढ़ना ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
अब राष्ट्रीय पर्व के आयोजनों में बच्चों की भागीदारी भी बढ़ रही है। स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों ने ITBP जवानों के साथ तिरंगा हाथ में लेकर देशभक्ति के नारे लगाए।
ग्रामीणों ने सुनाई डर से आजादी की कहानी
बोटेर और गुंडेकोट को पहले नक्सली प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता था। ग्रामीणों के अनुसार, राष्ट्रीय त्योहार मनाने पर रोक थी और उन्हें कथित तौर पर तिरंगे के बजाय काले झंडे लगाने के निर्देश दिए जाते थे।
अब उसी क्षेत्र में बच्चे राष्ट्रीय ध्वज लेकर देशभक्ति के नारे लगा रहे हैं। ग्रामीणों के लिए यह बदलाव सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ सामान्य जीवन की वापसी का संकेत है।
ऑपरेशन कगार के बाद मजबूत हुई सुरक्षा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 21 मई 2025 को ऑपरेशन कगार के तहत चलाए गए एक बड़े सुरक्षा अभियान के बाद इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। करीब 50 घंटे चले अभियान में 27 नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।
इनमें माओवादी संगठन के महासचिव केशव राव उर्फ बासवराजू भी शामिल था, जिस पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। अभियान के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ी और नया पुलिस कैंप स्थापित किया गया।
अबूझमाड़ में सुरक्षा और विकास की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार भी वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा तथा विकास से जुड़े प्रयासों पर लगातार जानकारी साझा करती रही है। (mha.gov.in)
Boter Village में बदली जिंदगी की तस्वीर
पुलिस कैंप के बाद ग्रामीणों ने डर कम होने और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की बात कही है। सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सहायता के साथ सरकारी सेवाओं तक पहुंच बढ़ने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव आया है।
इस साल का स्वतंत्रता दिवस इस बदलाव का प्रतीक बन गया। जहां कभी राष्ट्रीय पर्व मनाने पर कथित प्रतिबंध था, वहीं अब बच्चे और ग्रामीण ITBP जवानों के साथ तिरंगा फहराकर देशभक्ति के नारे लगा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने पर जोर देती रही है। (narayanpur.gov.in)
Boter Village में पहली बार तिरंगा फहराया जाना अबूझमाड़ के बदलते हालात की अहम तस्वीर पेश करता है। ग्रामीणों के अनुसार, सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद डर कम हुआ, सड़क और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं में सुधार आया और राष्ट्रीय पर्व मनाने का रास्ता खुला। बच्चों के हाथों में तिरंगा और ITBP जवानों के साथ देशभक्ति के नारे इस बदलाव को और खास बनाते हैं।
