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बारिश के बाद Dhamtari Safe Drinking Water अभियान

Dhamtari Safe Drinking Water अभियान के तहत मानसून के अंतिम दौर में हुई भारी बारिश के बाद जिले में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता की निगरानी तेज कर दी गई है। जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) जल जीवन मिशन के माध्यम से पानी की शुद्धता, क्लोरीनेशन और जल टंकियों की सफाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

बारिश के बाद जलभराव और दूषित पानी से डायरिया, हैजा, टाइफाइड तथा हेपेटाइटिस-ए और ई जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने स्रोत से लेकर घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अभियान चलाया है।

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बारिश के बाद Dhamtari Safe Drinking Water अभियान

कलेक्टर के निर्देश पर संचालित इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी करना और किसी भी तरह के प्रदूषण की स्थिति में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

अभियान के तहत पानी की गुणवत्ता जांच, क्लोरीनेशन और जल टंकियों की सफाई को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी लगातार उपलब्ध होता रहे।

धमतरी में सुरक्षित पेयजल का मजबूत ढांचा

धमतरी जिले में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के लिए कुल 16,024 पेयजल स्रोत उपलब्ध हैं। इनमें 9,981 हैंडपंप, 718 नल-जल योजनाएं और 2 वृहद समूह जल प्रदाय योजनाएं शामिल हैं।

सुरक्षित भंडारण के लिए जिले में 548 जल टंकियां बनाई गई हैं। पानी को कीटाणुरहित रखने के लिए 529 क्लोरिनेटर मशीनें भी स्थापित की गई हैं।

इन मशीनों में नमक और पानी के घोल से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से सक्रिय क्लोरीन तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों और हानिकारक जीवाणुओं को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

गांव-गांव में पानी की गुणवत्ता पर नजर

पेयजल सुरक्षा व्यवस्था को केवल सरकारी अमले तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें ग्रामीण महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

जिले के 623 गांवों में फील्ड टेस्ट किट (FTK) उपलब्ध कराई गई हैं। इसके माध्यम से प्राथमिक स्तर पर पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है।

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3,110 जल बहिनियां संभाल रहीं जिम्मेदारी

धमतरी जिले में पेयजल की निगरानी के लिए 3,110 प्रशिक्षित ‘जल बहिनियां’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रत्येक गांव से पांच महिलाओं को पानी की जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

ये जल बहिनियां फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी की प्राथमिक जांच करती हैं। यदि जांच के दौरान पानी की गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित विभागीय अमला आगे की कार्रवाई करता है।

यह व्यवस्था ग्रामीण स्तर पर पानी की गुणवत्ता की समस्या को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद करती है।

हर सप्ताह 120 घरों के पानी की जांच

Dhamtari Safe Drinking Water व्यवस्था के तहत पानी की जांच केवल स्रोतों तक सीमित नहीं है। उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता भी प्रयोगशाला में जांची जा रही है।

जिले के चार विकासखंडों—कुरूद, मगरलोड, धमतरी और नगरी—से हर सप्ताह घरेलू पानी के नमूने लिए जाते हैं।

प्रत्येक विकासखंड से 30 नमूने, यानी कुल 120 घरेलू जल नमूनों का साप्ताहिक प्रयोगशाला परीक्षण कराया जा रहा है। इसके साथ ही हर सप्ताह 15 जल टंकियों की भी विशेष निगरानी की जाती है।

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पानी में बदलाव दिखे तो तुरंत सूचना दें

जिला प्रशासन और PHE विभाग ने नागरिकों से पेयजल स्रोतों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की है।

यदि पानी के रंग, गंध या स्वाद में असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल ग्राम पंचायत या PHE विभाग को देने की सलाह दी गई है। इससे संभावित समस्या पर समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।

बारिश के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए धमतरी में Dhamtari Safe Drinking Water अभियान के तहत निगरानी व्यवस्था को व्यापक बनाया गया है। 3,110 जल बहिनियों की भागीदारी, 529 क्लोरिनेटर, 548 जल टंकियां और हर सप्ताह 120 घरेलू नमूनों की लैब जांच इस व्यवस्था के प्रमुख हिस्से हैं। प्रशासन का लक्ष्य स्रोत से घर तक पानी की गुणवत्ता बनाए रखते हुए लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

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