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बलरामपुर का चरचरी गांव: ‘लाल पानी’ की पहचान से ‘शुद्ध पानी’ की नई कहानी तक

रायपुर, 24 अगस्त 2025।
छत्तीसगढ़-उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसे बलरामपुर जिले के चरचरी गांव की पहचान लंबे समय तक “लाल पानी” के नाम से रही। यहां के हैंडपंप से लाल पानी निकलता था और ग्रामीणों को तालाब-नदी का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता था। यही वजह थी कि गांव में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आम हो गई थीं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और पानी की कहानी भी नई दिशा ले रही है।

पानी के लिए संघर्ष से राहत तक
आदिवासी बहुल इस गांव के लोग बताते हैं कि कभी उन्हें पीने के लिए दूर-दूर से पानी लाना पड़ता था। जिस तालाब में जानवर नहलाए जाते थे, वही पानी पीने के लिए भी उपयोग करना उनकी मजबूरी थी। ग्रामीण संगीता और उमा देवी बताती हैं, “पहले पानी लाने में घंटों लग जाता था, घर का काम भी समय पर नहीं हो पाता था। अब कुआं और नल नजदीक होने से पानी आसानी से मिल रहा है। हम सब बहुत खुश हैं।”

जल जीवन मिशन से बदली तस्वीर
1600 की आबादी वाले इस गांव में अब 27 हैंडपंप हैं, जिनमें से 12 पीएचई विभाग द्वारा लगाए गए हैं। लाल पानी वाला हैंडपंप बंद करवा दिया गया है। जल जीवन मिशन के तहत गांव में हर घर नल से जल पहुंचाने का कार्य जारी है। लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से बनने वाली टंकी का 35% काम पूरा हो चुका है।

स्थानीय नेतृत्व और सरकार की भूमिका
गांव के सरपंच महेंद्र कुमार ने बताया कि पीएचई विभाग की मदद से अब ग्रामीण शुद्ध पानी पी रहे हैं। उन्होंने कहा कि काम तेजी से हो रहा है, लेकिन और तेज गति से होगा तो ग्रामीणों को और अधिक लाभ मिलेगा।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी कहा, “चरचरी जैसे दूरस्थ गांवों में शुद्ध पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। हमने सबसे पहले हैंडपंप और कुओं की व्यवस्था करवाई। अब हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए तेजी से काम हो रहा है। कुछ इलाकों तक पहुंचना कठिन है, लेकिन वहां भी शुद्ध पानी पहुंचाने का प्रयास जारी है।”

नतीजा – बदल रही है गांव की पहचान
कभी “लाल पानी वाले गांव” के नाम से पहचाने जाने वाला चरचरी अब धीरे-धीरे “शुद्ध पानी वाले गांव” के रूप में पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। लंबे इंतजार के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही हर घर नल से जल मिलेगा और यह उनका अधूरा सपना पूरा होगा।